सीएए हिंसा: UP पुलिस का दावा, चार दिन में पीएफआई के 108 सदस्य गिरफ्तार

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सीएए हिंसा: पुलिस का दावा, चार दिन में पीएफआई के 108 सदस्य गिरफ्तार

लखनऊ। नागरिकता संशोधन कानून के विरोध में विगत दिसम्बर माह में हुई हिंसा पीएफआई ने भड़काई थी। अपर मुख्य सचिव गृह अवनीश अवस्थी और कार्यकारी डीजीपी हितेश चंद्र अवस्थी ने आज यानी सोमवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कहा है कि पिछले चार दिन में पीएफआई के 108 सदस्य गिरफ्तार किए गए हैं। यह सारे लोग सीएए के विरोध में हुई हिंसा में शामिल थे।

Caa Violence Police Claim 108 Pfi Members Arrested In Four Days :

श्रीअवस्थी ने बताया कि चार दिनों के लिए विशेष अभियान चलाया गया था। पहले भी पीएफआई के 25 पदाधिकारी और सदस्य गिरफ्तार हो चुके हैं। प्रदेश के 13 जनपदों में पीएफआई संगठन सक्रिय है। अब तक हुई 108 में लखनऊ से 14, सीतापुर से तीन, मेरठ से 21, गाजियाबाद से 9, मुजफ्फरनगर से 6, शामली से सात, बिजनौर से 4, वाराणसी से 20, कानपुर से 5, गोंडा से एक, बहराइच से 16, हापुड़ से एक और जौनपुर से एक सदस्य को गिरफ्तार किया गया है।

बता दें कि नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) के विरोध में हिंसा भड़काने के आरोप में यूपी पुलिस ने पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (पीएफआई) के आठ सदस्यों को गिरफ्तार किया था। पांच को कानपुर और तीन को लखनऊ से गिरफ्तार किया गया था। आरोपी प्रदर्शनों के लिए महीनों से फंड मुहैया करवा रहे थे। शुक्रवार को गंगा यात्रा में सीएम के कार्यक्रम का विरोध करने के लिए भीड़ जुटाने की तैयारी में थे। इसके पहले ही इन्हें बृहस्पतिवार रात बेगमपुरवा में बैठक करते हुए गिरफ्तार किया गया।

आरोपियों ने पूछताछ में बताया, 20 दिसंबर को बाबूपुरवा और यतीमखाना में हुई हिंसा इनका हाथ था। इनका नेतृत्व वसीम कर रहा था, जो हिंसा के कुछ दिन बाद लखनऊ में गिरफ्तार किया गया। लखनऊ से गिरफ्तार आरोपियों की पहचान शकीलुर रहमान, शबी खान और मोहम्मद अरशद के रूप में हुई है। इन्होंने 19 दिसंबर को प्रदर्शन के दौरान कथित तौर पर हिंसा भड़काई। उपद्रवियों ने मदेयगंज चौकी जला दी थी।

पुलिस का दावा है कि पीएफआई के बड़े नेता कर्नाटक और तमिलनाडु से फंड मुहैया करवा रहे थे। यह फंड सरहद पार से आईएसआई भेज रही थी। पांचों आरोपियों को फंड से भीड़ जुटाने और हिंसा के लिए सामान जुटाने की जिम्मेदारी दी गई थी। आरोपियों ने अपने संगठन के कई और सदस्यों के नाम भी बताए हैं।

लखनऊ। नागरिकता संशोधन कानून के विरोध में विगत दिसम्बर माह में हुई हिंसा पीएफआई ने भड़काई थी। अपर मुख्य सचिव गृह अवनीश अवस्थी और कार्यकारी डीजीपी हितेश चंद्र अवस्थी ने आज यानी सोमवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कहा है कि पिछले चार दिन में पीएफआई के 108 सदस्य गिरफ्तार किए गए हैं। यह सारे लोग सीएए के विरोध में हुई हिंसा में शामिल थे। श्रीअवस्थी ने बताया कि चार दिनों के लिए विशेष अभियान चलाया गया था। पहले भी पीएफआई के 25 पदाधिकारी और सदस्य गिरफ्तार हो चुके हैं। प्रदेश के 13 जनपदों में पीएफआई संगठन सक्रिय है। अब तक हुई 108 में लखनऊ से 14, सीतापुर से तीन, मेरठ से 21, गाजियाबाद से 9, मुजफ्फरनगर से 6, शामली से सात, बिजनौर से 4, वाराणसी से 20, कानपुर से 5, गोंडा से एक, बहराइच से 16, हापुड़ से एक और जौनपुर से एक सदस्य को गिरफ्तार किया गया है। बता दें कि नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) के विरोध में हिंसा भड़काने के आरोप में यूपी पुलिस ने पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (पीएफआई) के आठ सदस्यों को गिरफ्तार किया था। पांच को कानपुर और तीन को लखनऊ से गिरफ्तार किया गया था। आरोपी प्रदर्शनों के लिए महीनों से फंड मुहैया करवा रहे थे। शुक्रवार को गंगा यात्रा में सीएम के कार्यक्रम का विरोध करने के लिए भीड़ जुटाने की तैयारी में थे। इसके पहले ही इन्हें बृहस्पतिवार रात बेगमपुरवा में बैठक करते हुए गिरफ्तार किया गया। आरोपियों ने पूछताछ में बताया, 20 दिसंबर को बाबूपुरवा और यतीमखाना में हुई हिंसा इनका हाथ था। इनका नेतृत्व वसीम कर रहा था, जो हिंसा के कुछ दिन बाद लखनऊ में गिरफ्तार किया गया। लखनऊ से गिरफ्तार आरोपियों की पहचान शकीलुर रहमान, शबी खान और मोहम्मद अरशद के रूप में हुई है। इन्होंने 19 दिसंबर को प्रदर्शन के दौरान कथित तौर पर हिंसा भड़काई। उपद्रवियों ने मदेयगंज चौकी जला दी थी। पुलिस का दावा है कि पीएफआई के बड़े नेता कर्नाटक और तमिलनाडु से फंड मुहैया करवा रहे थे। यह फंड सरहद पार से आईएसआई भेज रही थी। पांचों आरोपियों को फंड से भीड़ जुटाने और हिंसा के लिए सामान जुटाने की जिम्मेदारी दी गई थी। आरोपियों ने अपने संगठन के कई और सदस्यों के नाम भी बताए हैं।