महाराष्ट्र में संवैधानिक संकट टालने के लिए कैबिनेट का फैसला, मनोनीत एमएलसी बनेेंगे उद्धव ठाकरे

udhav
महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने विधान परिषद चुनाव के लिए भरा नामांकन

नई दिल्ली। कोरोना वायरस के चलते पूरे देश में लॉकडाउन चल रहा है। इस कारण महाराष्ट्र में विधान परिषद चुनाव भी नहीं हो पा रहे हैं। ऐसे में राज्य में संवैधानिक संकट की स्थिति बन रही है। दरअसल, महाराष्ट्र में शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे मुख्यमंत्री तो बन गए लेकिन अभी तक वह विधानमंडल के किसी भी सदन के सदस्य नहीं हैं।

Cabinet To Decide Constitutional Crisis In Maharashtra Uddhav Thackeray To Be Nominated Mlc :

संविधान के मुताबिक विधानसभा या विधान परिषद का सदस्य ही राज्य का मुख्यमंत्री बन सकता है। यदि किसी को मुख्यमंत्री पद की शपथ दिला भी जाती है तो छह माह के भीतर किसी भी सदन की सदस्यता अवश्य लेनी होती है। इस समय कोरोना वायरस के चलते एमएलसी चुनाव भी नहीं हो सके। ऐसे में महाराष्ट्र कैबिनेट ने उन्हें राज्यपाल भगत सिंह कोश्‍यारी की तरफ से मनोनीत किये जाने को लेकर प्रस्ताव भेजने का निर्णय किया है।

महाराष्ट्र सरकार के मंत्री नवाब मलिक ने बताया कि राज्यपाल की तरफ से मनोनीत किए जाने वाले दो सदस्यों के खाली पदों में एक सीट के लिए मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे के नाम की सिफारिश की जाएगी। बता दें कि कोरोना वायरस के कारण एमएलसी चुनाव अभी नहीं करवाये जा सकते हैं। ऐसा संवैधानिक संकट को टालने की कारण किया जा रहा है।

बता दें कि महाराष्ट्र में कोरोना वायरस के कारण एमएलसी चुनाव टाल दिये गये थे। इसके बाद से ही मुख्‍यमंत्री की कुर्सी पर संकट मंडरा रहा था। हालांकि अब संकट के बादल छंटते हुए दिख रहे हैं। संविधान की धारा 164 (4) के अनुसार किसी भी राज्‍य का मुख्‍यमंत्री के लिए अनिवार्य है कि वह छह माह के अंदर ही सदन का सदस्‍य बन जाये। ज्ञात हो कि उद्धव ठाकरे ने 28 नवंबर 2019 को मुख्‍यमंत्री पद की शपथ ली थी। इसलिए ये जरूरी था कि इस पद पर बने रहने के लिए 28 मई से पहले वह विधानमंडल सदस्‍य बन जायें।

गौरतलब है कि उद्धव ठाकरे ने महाराष्ट्र में कभी विधानसभा का चुनाव नहीं लड़ा था। उनके पुत्र आदित्य ठाकरे इस परिवार से चुनाव लड़ने वाले पहले सदस्‍य थे। चुनाव के बाद जब भाजपा से रिश्ता बिगड़ा तो शिवसेना ने कांग्रेस और एनसीपी के साथ मिलकर सरकार बना ली। गठबंधन करने वाले सहयोगियों ने उद्धव को मुख्यमंत्री बनाने का समर्थन किया जिसके बाद उद्धव ने सत्ता संभाल ली।

 

नई दिल्ली। कोरोना वायरस के चलते पूरे देश में लॉकडाउन चल रहा है। इस कारण महाराष्ट्र में विधान परिषद चुनाव भी नहीं हो पा रहे हैं। ऐसे में राज्य में संवैधानिक संकट की स्थिति बन रही है। दरअसल, महाराष्ट्र में शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे मुख्यमंत्री तो बन गए लेकिन अभी तक वह विधानमंडल के किसी भी सदन के सदस्य नहीं हैं। संविधान के मुताबिक विधानसभा या विधान परिषद का सदस्य ही राज्य का मुख्यमंत्री बन सकता है। यदि किसी को मुख्यमंत्री पद की शपथ दिला भी जाती है तो छह माह के भीतर किसी भी सदन की सदस्यता अवश्य लेनी होती है। इस समय कोरोना वायरस के चलते एमएलसी चुनाव भी नहीं हो सके। ऐसे में महाराष्ट्र कैबिनेट ने उन्हें राज्यपाल भगत सिंह कोश्‍यारी की तरफ से मनोनीत किये जाने को लेकर प्रस्ताव भेजने का निर्णय किया है। महाराष्ट्र सरकार के मंत्री नवाब मलिक ने बताया कि राज्यपाल की तरफ से मनोनीत किए जाने वाले दो सदस्यों के खाली पदों में एक सीट के लिए मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे के नाम की सिफारिश की जाएगी। बता दें कि कोरोना वायरस के कारण एमएलसी चुनाव अभी नहीं करवाये जा सकते हैं। ऐसा संवैधानिक संकट को टालने की कारण किया जा रहा है। बता दें कि महाराष्ट्र में कोरोना वायरस के कारण एमएलसी चुनाव टाल दिये गये थे। इसके बाद से ही मुख्‍यमंत्री की कुर्सी पर संकट मंडरा रहा था। हालांकि अब संकट के बादल छंटते हुए दिख रहे हैं। संविधान की धारा 164 (4) के अनुसार किसी भी राज्‍य का मुख्‍यमंत्री के लिए अनिवार्य है कि वह छह माह के अंदर ही सदन का सदस्‍य बन जाये। ज्ञात हो कि उद्धव ठाकरे ने 28 नवंबर 2019 को मुख्‍यमंत्री पद की शपथ ली थी। इसलिए ये जरूरी था कि इस पद पर बने रहने के लिए 28 मई से पहले वह विधानमंडल सदस्‍य बन जायें। गौरतलब है कि उद्धव ठाकरे ने महाराष्ट्र में कभी विधानसभा का चुनाव नहीं लड़ा था। उनके पुत्र आदित्य ठाकरे इस परिवार से चुनाव लड़ने वाले पहले सदस्‍य थे। चुनाव के बाद जब भाजपा से रिश्ता बिगड़ा तो शिवसेना ने कांग्रेस और एनसीपी के साथ मिलकर सरकार बना ली। गठबंधन करने वाले सहयोगियों ने उद्धव को मुख्यमंत्री बनाने का समर्थन किया जिसके बाद उद्धव ने सत्ता संभाल ली।