कैग की रिपोर्ट में खुलासा: सपा सरकार में लापरवाह बन रहे ‘आबकारी अधिकारी’ डूबे 1440 करोड़ रुपये

SP government
कैग की रिपोर्ट में खुलासा: सपा सरकार में लापरवाह बन रहे 'आबकारी अधिकारी' डूबे 1440 करोड़ रुपये

लखनऊ। कैग की रिपोर्ट ने सपा सरकार में मठाधीश आबकारी अधिकारियों की लापरवाही को उजागर किया है। रिपोर्ट में खुलासा हुआ कि आबकारी अफसरों की लापरवाही से 1440.60 करोड़ रुपये का राजस्व डूब गया है। वहीं, बीजेपी सरकार में भी कैग द्वारा इसको लेेकर चेताया गया है, बावजूद इसके अफसरों की लापरवाही जारी है।

Cag Report Revealed Excise Officers Becoming Negligent In Sp Government Sinking Rs 1440 Crore :

कैग की रिपोर्ट में 62.57 करोड़ के राजस्व के नुकसान की बात सामने आयी है।  कैग की रिपोर्ट के मुताबिक, वर्ष 2012 से 2017 के बीच दुकानों के लाइसेंस को रद करने और बेसिक अनुज्ञापन शुल्क व सिक्यॉरिटी जमा न किए जाने के चलते सरकार को 1391.84 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ था। इसके साथ ही बिना बीयर बार के लाइसेंस के बीयर बेचे जाने से 38.40 करोड़ और मॉडल शाप पर कम लाइसेंस फीस के चलते 10.36 करोड़ के राजस्व (कुल 1440.60 करोड़) का नुकसान हुआ था।

बीयर की बिक्री में भी धांधली
रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि बोतलबंद बीयर की फुटकर बिक्री में भी जमकर धांधली की गयी है। वर्ष 2012 से 2017 के बीच सरकार दावा करती थी कि विदेशी शराब की बिक्री में बीयर की बिक्री भी शामिल है जबकि ये नियमों के विपरीत था। बोतलबंद बीयर की बिक्री के लिए अलग से लाइसेंस की जरूरत होती है। कैग की रिपोर्ट में बताया गया है कि 362 में से 119 लाइसेंसी बिना एफएल—7बी लाइसेंस के ही बीयर बेचते रहे, जिसके कारण 2.36 करोड़ के राजस्व का नुकसान हुआ है। मॉडल शाप की लाइसेंस फीस निश्चित न किए जाने के चलते भी सरकार को 1.36 करोड़ के राजस्व का नुकसान हुआ।

करेतर वसूली में थी 31.61 प्रतिशत की कमी
कैग ने अपनी रिपोर्ट में राजस्व प्राप्तियों का भी आकलन किया गया है, जिसके बाद उन्होंने बताया है कि वर्ष 2016-17 के सापेक्ष 2017-18 में करेतर राजस्व वसूली में 31.67% की कमी थी। कैग ने अपनी विस्तृत रिपोर्ट के बाद सिफारिश की है कि वित्त विभाग को अपने बजट अनुमानों को और अधिक यथार्थवादी बनाने के लिए अपनी बजट तैयार करने की विधियों का पुनरीक्षण करना चाहिए। कैग ने राजस्व बकाए के संबंध में कहा है कि 31 मार्च 2018 को कुछ मुख्य राजस्व शीर्षों का राजस्व बकाया 22,564.66 करोड़ रुपये था। इसमें 10,581.96 करोड़ रुपये का बकाया पांच वर्षों से अधिक का था। वर्ष 2017-18 की समाप्ति पर कुल राजस्व बकाया कुल राजस्व प्राप्ति का 19 प्रतिशत था। इसमें से 47 प्रतिशत पिछले पांच या अधिक वर्षों से वसूली के लिए था। यह प्रदेश में शिथिल राजस्व प्रशासन एवं अनुपालनहीनता को दर्शाता है।

लखनऊ। कैग की रिपोर्ट ने सपा सरकार में मठाधीश आबकारी अधिकारियों की लापरवाही को उजागर किया है। रिपोर्ट में खुलासा हुआ कि आबकारी अफसरों की लापरवाही से 1440.60 करोड़ रुपये का राजस्व डूब गया है। वहीं, बीजेपी सरकार में भी कैग द्वारा इसको लेेकर चेताया गया है, बावजूद इसके अफसरों की लापरवाही जारी है। कैग की रिपोर्ट में 62.57 करोड़ के राजस्व के नुकसान की बात सामने आयी है।  कैग की रिपोर्ट के मुताबिक, वर्ष 2012 से 2017 के बीच दुकानों के लाइसेंस को रद करने और बेसिक अनुज्ञापन शुल्क व सिक्यॉरिटी जमा न किए जाने के चलते सरकार को 1391.84 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ था। इसके साथ ही बिना बीयर बार के लाइसेंस के बीयर बेचे जाने से 38.40 करोड़ और मॉडल शाप पर कम लाइसेंस फीस के चलते 10.36 करोड़ के राजस्व (कुल 1440.60 करोड़) का नुकसान हुआ था। बीयर की बिक्री में भी धांधली रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि बोतलबंद बीयर की फुटकर बिक्री में भी जमकर धांधली की गयी है। वर्ष 2012 से 2017 के बीच सरकार दावा करती थी कि विदेशी शराब की बिक्री में बीयर की बिक्री भी शामिल है जबकि ये नियमों के विपरीत था। बोतलबंद बीयर की बिक्री के लिए अलग से लाइसेंस की जरूरत होती है। कैग की रिपोर्ट में बताया गया है कि 362 में से 119 लाइसेंसी बिना एफएल—7बी लाइसेंस के ही बीयर बेचते रहे, जिसके कारण 2.36 करोड़ के राजस्व का नुकसान हुआ है। मॉडल शाप की लाइसेंस फीस निश्चित न किए जाने के चलते भी सरकार को 1.36 करोड़ के राजस्व का नुकसान हुआ। करेतर वसूली में थी 31.61 प्रतिशत की कमी कैग ने अपनी रिपोर्ट में राजस्व प्राप्तियों का भी आकलन किया गया है, जिसके बाद उन्होंने बताया है कि वर्ष 2016-17 के सापेक्ष 2017-18 में करेतर राजस्व वसूली में 31.67% की कमी थी। कैग ने अपनी विस्तृत रिपोर्ट के बाद सिफारिश की है कि वित्त विभाग को अपने बजट अनुमानों को और अधिक यथार्थवादी बनाने के लिए अपनी बजट तैयार करने की विधियों का पुनरीक्षण करना चाहिए। कैग ने राजस्व बकाए के संबंध में कहा है कि 31 मार्च 2018 को कुछ मुख्य राजस्व शीर्षों का राजस्व बकाया 22,564.66 करोड़ रुपये था। इसमें 10,581.96 करोड़ रुपये का बकाया पांच वर्षों से अधिक का था। वर्ष 2017-18 की समाप्ति पर कुल राजस्व बकाया कुल राजस्व प्राप्ति का 19 प्रतिशत था। इसमें से 47 प्रतिशत पिछले पांच या अधिक वर्षों से वसूली के लिए था। यह प्रदेश में शिथिल राजस्व प्रशासन एवं अनुपालनहीनता को दर्शाता है।