मूर्ति विसर्जन रोक पर HC की कड़ी फटकार, ममता बोली- जब तक जीवित हूं, ऐसा करती रहूंगी

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नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल में मूर्ति विसर्जन पर रोक को लेकर कलकत्ता हाईकोर्ट ने एक बार फिर ममता सरकार को कड़ी फटकार लगाई है। इस मामले की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने कहा, प्रतिबंध लगाना सबसे आखिरी विकल्प है। कोर्ट ने कहा, आखिरी विकल्प का इस्तेमाल सबसे पहले क्यों, सरकार को सिलसिलेवार तरीके से कदम उठाने होंगे। कोर्ट ने कहा, सरकार ऐसे मनमाने आदेश नहीं दे सकती।

Calcutta High Court Takes On Mamata Banerjee Over Durga Immersion On Muharram :

कोर्ट ने कहा, सरकार बिना आधार अधिकार का इस्तेमाल कर रही है। हाईकोर्ट ने कहा कि सरकार कैलेंडर को नहीं बदल सकती है, क्योंकि आप सत्ता में हैं इसलिए दो दिनों के लिए बलपूर्वक आस्था पर रोक नहीं लगा सकते हैं। वहीं, सरकार के वकील ने कोर्ट में कहा कि क्या सरकार को कानून व्यवस्था का अधिकार नहीं है। वकील की ओर से कहा गया है कि अगर कानून व्यवस्था बिगड़ी तो किसकी जिम्मेदारी होगी।

पश्चिम बंगला सरकार ने फैसला लिया कि मुहर्रम के दिन को छोड़कर 2, 3 और 4 अक्टूबर को दुर्गा प्रतिमा का विसर्जन किया जा सकता है। दरअसल, इस साल भी पिछले साल की तरह ही मोहर्रम और दुर्गा पूजा मूर्ति विसर्जन एक ही दिन पड़ रहे हैं।

बताते चलें कि पिछले साल भी इसी तरह राज्य सरकार ने मूर्ति विसर्जन पर प्रतिबंध जारी किया था। पिछले साल 11 अक्टूबर को दशहरा था और 13 अक्टूबर को मोहर्रम। ममता के इस फैसले के खिलाफ कलकत्ता हाई कोर्ट में याचिका दायर की गई थी जिस पर सुनवाई के दौरान कलकत्ता हाई कोर्ट ने सरकार को फटकार लगाई थी।

ये है ममता का बयान-

वहीं मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कहा, जब मैं दुर्गा पूजा या गणेश उत्सव का शुभारंभ करती हूं तो तुष्टिकरण का आरोप नहीं लगता लेकिन ईद की नमाज अदा कर लूं तो विरोधी ऐसा आरोप लगाने लगते हैं। ममता ने कहा कि अगर ये तुष्टिकरण है तो मैं जब तक जीवित हूं, ऐसा करती रहूंगी। अगर कोई मेरे माथे पर गन भी रख दे तब भी मैं यही करूंगी। मैं किसी से भेदभाव नहीं करती। ये बंगाल की संस्कृति है, ये मेरी संस्कृति है।

नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल में मूर्ति विसर्जन पर रोक को लेकर कलकत्ता हाईकोर्ट ने एक बार फिर ममता सरकार को कड़ी फटकार लगाई है। इस मामले की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने कहा, प्रतिबंध लगाना सबसे आखिरी विकल्प है। कोर्ट ने कहा, आखिरी विकल्प का इस्तेमाल सबसे पहले क्यों, सरकार को सिलसिलेवार तरीके से कदम उठाने होंगे। कोर्ट ने कहा, सरकार ऐसे मनमाने आदेश नहीं दे सकती।कोर्ट ने कहा, सरकार बिना आधार अधिकार का इस्तेमाल कर रही है। हाईकोर्ट ने कहा कि सरकार कैलेंडर को नहीं बदल सकती है, क्योंकि आप सत्ता में हैं इसलिए दो दिनों के लिए बलपूर्वक आस्था पर रोक नहीं लगा सकते हैं। वहीं, सरकार के वकील ने कोर्ट में कहा कि क्या सरकार को कानून व्यवस्था का अधिकार नहीं है। वकील की ओर से कहा गया है कि अगर कानून व्यवस्था बिगड़ी तो किसकी जिम्मेदारी होगी।पश्चिम बंगला सरकार ने फैसला लिया कि मुहर्रम के दिन को छोड़कर 2, 3 और 4 अक्टूबर को दुर्गा प्रतिमा का विसर्जन किया जा सकता है। दरअसल, इस साल भी पिछले साल की तरह ही मोहर्रम और दुर्गा पूजा मूर्ति विसर्जन एक ही दिन पड़ रहे हैं।बताते चलें कि पिछले साल भी इसी तरह राज्य सरकार ने मूर्ति विसर्जन पर प्रतिबंध जारी किया था। पिछले साल 11 अक्टूबर को दशहरा था और 13 अक्टूबर को मोहर्रम। ममता के इस फैसले के खिलाफ कलकत्ता हाई कोर्ट में याचिका दायर की गई थी जिस पर सुनवाई के दौरान कलकत्ता हाई कोर्ट ने सरकार को फटकार लगाई थी।ये है ममता का बयान-वहीं मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कहा, जब मैं दुर्गा पूजा या गणेश उत्सव का शुभारंभ करती हूं तो तुष्टिकरण का आरोप नहीं लगता लेकिन ईद की नमाज अदा कर लूं तो विरोधी ऐसा आरोप लगाने लगते हैं। ममता ने कहा कि अगर ये तुष्टिकरण है तो मैं जब तक जीवित हूं, ऐसा करती रहूंगी। अगर कोई मेरे माथे पर गन भी रख दे तब भी मैं यही करूंगी। मैं किसी से भेदभाव नहीं करती। ये बंगाल की संस्कृति है, ये मेरी संस्कृति है।