क्या टूथब्रश और लकड़ी की चाबी से जेल का दरवाजा खोल जा सकता है?

भोपाल: मध्य प्रदेश की राजधानी स्थित केंद्रीय कारागार से प्रतिबंधित संगठन स्टूडेंट इस्लामिक मूवमेंट ऑफ इंडिया (सिमी) से जुड़े आठ विचाराधीन कैदियों के फरार होने के मामले में पुलिस ने बड़ा खुलासा किया है। भोपाल के पुलिस महानिरीक्षक योगेश चौधरी के मुताबिक, इन कैदियों ने टूथब्रश (प्लास्टिक) और लकड़ी से चाबियां बनाई थीं और इसी से ताला खोलकर बैरक से बाहर आए।




सिमी के ‘आतंकियों’ के मुठभेड़ में मारे जाने को लेकर उठ रहे सवालों के बाद भोपाल के आईजी चौधरी ने सोमवार की देर शाम संवाददाताओं के सामने ब्योरा दिया। उन्होंने बताया कि भोपाल जेल में सिमी से जुड़े कुल 29 विचाराधीन कैदी हैं। इनमें से आठ दो बैरकों में थे। इन आठों ने टूथब्रश सहित अन्य सामान से चाबियां बनाई थीं। ताला खोलने के बाद उन्होंने प्रहरी रमाशंकर यादव की गला रेतकर हत्या की और चंदन सिंह के हाथ-पैर बांध दिए, फिर चादरों को रस्सी की तरह इस्तेमाल कर 25 फीट ऊंची दीवार फांद कर भाग गए।




सवाल उठता है कि तीन-तीन बैरकों के सेल से बाहर आना, फिर बैरक से आना आसान नहीं है। सेल में भी दरवाज़ा होता है और बैरक में भी दरवाज़ा होता है। सेल और बैरक के ब्लॉक के बीच कैदियों को दो दरवाज़े तोड़ने पड़े होंगे। तब भी जेल के भीतर तैनात सुरक्षाकर्मियों को खबर नहीं हुई। अगर ये बैरक से निकल भी भागे तो 16 से 21 फीट ऊंची दीवार क्या सिर्फ चादरों और कंबलों के सहारे फांदी जा सकती है। जब ये इनके सहारे दीवार फांद रहे थे तब जेल की बाहरी दीवार के कोने पर बने वॉच टावर पर तैनात हथियारबंद सुरक्षाकर्मी क्या कर रहे थे। एक सवाल यह भी है कि सेंट्रल जेल की दीवार पर बिजली की तार होती है। क्या उस वक्त बिजली की तार काम नहीं कर रही थी या इन्होंने तार काट दी।

चौधरी बताते हैं कि जो विचाराधीन कैदी मारे गए हैं, उनमें से तीन ऐसे थे, जिन्होंने रविवार रात की घटना से पहले दो सुरक्षा जवानों की हत्या की थी। जब चौधरी से फरार कैदियों के कपड़ों, जूतों और उनके जंगल में पहुंचने और ग्रामीणों के यह कहने पर कि उनके पास हथियार नहीं थे के अलावा वायरल हुए वीडियो को लेकर सवाल किया, तो उन्होंने कहा कि यह सब जांच का विषय है। जांच में जो भी तथ्य सामने आएंगे, उसकी जानकारी मीडिया को दी जाएगी।

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