कैंसर पीड़ितों के लिए वरदान बना फर्टिलिटी प्रिजर्वेशन, ऑटोट्रांसप्लांट से पूरी होगी संतान की चाहत

कैंसर पीड़ितों के लिए वरदान बना फर्टिलिटी प्रिजर्वेशन, ऑटोट्रांसप्लांट से पूरी होगी संतान की चाहत
कैंसर पीड़ितों के लिए वरदान बना फर्टिलिटी प्रिजर्वेशन, ऑटोट्रांसप्लांट से पूरी होगी संतान की चाहत

लखनऊ। कैंसर जैसी खतरनाक बीमारी आजकल कम उम्र के लोगों को भी अपना शिकार बना रहा है। पहले के समय में कैंसर की समस्या ज़्यादातर 40 की उम्र के बाद देखने को मिलता था लेकिन आज के समय में युवावस्था में कैंसर की समस्या देखने को मिलती है। देश में हल साल करीब 10 से 12 लाख कैंसर के केस सामने आ रहे हैं जिसके इलाज में लोगों को बांझपन जैसी समस्या का सामना करना पड़ता है।

एग्रेसिव कैंसर में एग्रेसिव दवाओं का इस्तेमाल किया जाता है जिसका इलाज किसी भी मरीज की प्रजनन क्षमता को भविष्य में प्रभावित करने का खतरा पैदा कर सकता है। कैंसर मरीजों की जीवन में संतानोत्पत्ति का सुख और जागरूकता के लिए इंडियन फर्टिलिटी सोसाइटी आईएफएस, स्पेशल इंटरेस्ट ग्रुप एसआईजी संयुक्त रूप से प्रयास कर रहे हैं ताकि लोगों को फर्टिलिटी प्रिजर्वेशन के प्रति जागरूक किया जाए और उनकी काउंसलिंग हो सके। दुनिया भर में ये एक नया प्रयास है जो बहुत लोकप्रिय हो रहा है।

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लोगों को जागरूक करने के लिए देश में भी सेमिनारों की श्रंखला का आयोजन किया जा रहा है। इसी कड़ी में रविवार 25 फरवरी को होटल क्लार्कअवध में एक भव्य सेमिनार हुआ। जहांस्थानीय आयोजक और अजंता हास्पिटल व आईवीएफ सेंटर की चेयर पर्सन डॉ.गीता खन्ना ने फर्टिलिटी प्रिजर्वेशन की पूरी तकनीक विस्तार से बताई। उन्होंने कैंसर पीड़ित पर इलाज के दौरान प्रजनन क्षमता पर पड़ने वाले प्रभाव पर भी प्रकाश डाला। डॉ. खन्ना ने बताया कि आज के दौर में देर से विवाह और कॅरियर को प्राथमिकता देने के चलते अलग सामाजिक परिस्थिति पैदा होती हैं जिसके लिए फर्टिलिटी प्रिजर्वेशन का महत्व और भी बढ़ जाता है।

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लखनऊ के अंजन्ता हॉस्पिटल की डॉ.गीता खन्ना ने बताया की अब क़ैसर का भी इलाज संभव है और कैंसर की वजह से आप निःसंतान नहीं रहेंगे अब आपकी इस समस्या के लिए भी तकनीकी आ गयी है। अगर महिला में कैंसर की समस्या है तो कैंसर का इलाज शुरू करने से पहले उसकी ओवरी के हिस्से को निकाल कर सुरक्षित रख लिया जाता है और जब तक महिला का इलाज चलता है तब तक के लिए ओवरी को फ्रीज कर दिया जाता है। इलाज पूरा और सफल होने के बाद ओवरी को फिर से वापस डाल दिया जाता है और इसके बाद आप मां बन सकती हैं। क़ैसर पीड़ित महिला ओवरी प्रिजर्व कर भविष्य में फॅमिली प्लानिंग कर सकते हैं। बीमारी से मुक्त होने पर ओवरी ट्रांसप्लांट कर दी जाती है।

बांझपन के मुख्य कारण—

  • सिर्फ महिलाओं को न ठहराएँ बांझपन का दोषी
  • महिलाओं और पुरुषों में बांझपन का औसत 50-50% होता है।
  • पुरुषों एमिन स्पर्म बनने वाले एप्रिडिडमेस डक्ट का ब्लॉक हो जाना।
  • महिलाओं में फ़ेलोपियन ट्यूब का ब्लॉक हो जाना।
  • अधिक तनाव लेना।
  • लैपटॉप और मोबाइल का अधिक और गलत तरीके से इस्तेमाल करना।

कैंसर के इलाज से महिलाओं में ब्लड कैंसर, ओवरी कैंसर, यूट्रेस कैंसर वहीं पुरुषों में टेस्टीकुलर व ब्लड कैंसर सबसे घातक  होता है।
15 वर्ष से कम उम्र वाली लड़कियां ओवेरियन टिशू क्रायो प्रिजेर्वेशन(otc) तथा 15 वर्ष से कम उम्र के लड़कों को टेस्टीकुलर क्रायो प्रिजेर्वेशन जरूर करवा लेना चाहिए।

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लिक्विड नाइट्रोजन की मदद से करते हैं प्रिजर्व

  • फर्टिलिटी प्रिजर्व तकनीक में लिक्विड नाइट्रोजन का इस्तेमाल किया जाता है जिसका तापमान 196 डिग्री रखा जाता है।
  • लैब में कई सालों तक आप ओवरी और टेस्टीज को फ्रीज़ कर सकते हैं।
  • लैब में एग फ्रीजिंग, सीमेन फ्रीजिंग और एमब्रयोफ्रीजिंग के लिए करीब एक डेढ़ लाख का खर्चा आता है।

लखनऊ। कैंसर जैसी खतरनाक बीमारी आजकल कम उम्र के लोगों को भी अपना शिकार बना रहा है। पहले के समय में कैंसर की समस्या ज़्यादातर 40 की उम्र के बाद देखने को मिलता था लेकिन आज के समय में युवावस्था में कैंसर की समस्या देखने को मिलती है। देश में हल साल करीब 10 से 12 लाख कैंसर के केस सामने आ रहे हैं जिसके इलाज में लोगों को बांझपन जैसी समस्या का सामना करना पड़ता है। एग्रेसिव कैंसर में…
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