स्मारक घोटाला : पूर्व IAS समेत 39 पर चलेगा केस, नसीमुद्दीन, बाबू सिंह कुशवाहा समेत 199 लोग पाये गये थे दोषी

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स्मारक घोटाला : पूर्व IAS समेत 39 पर चलेगा केस, नसीमुद्दीन, बाबू सिंह कुशवाहा समेत 199 लोग पाये गये थे दोषी

लखनऊ। मायावती सरकार के दौरान लखनऊ और नोएडा में हुए स्मारक घोटाले में शामिल पूर्व आईएएस अफसर राम बोध मौर्य समेत 39 लोगों की मुश्किलें बढ़ने जा रहीं हैं। योगी सरकार ने इनके खिलाफ भ्रष्टाचार का केस चलाने की अनुमति दे दी है। सूत्रों की माने तो जांच में नौकरशाहों के साथ कई सफेदपोशों पर भी शिकंजा कसा जायेगा। योगी सरकार पहले भी कई बार घोटालों में शामिल आरोपियों के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई करने के संकेत दे चुकी हैं।

Case Filed Against Former Ias On 39 Nasimuddin Babu Singh Kushwaha 199 People Were Found Guilty :

सरकार ने जिन अफसरों के खिलाफ अभियोजन स्वीकृति दी है, उनमें तत्कालीन निदेशक खनिज राम बोध मौर्य, राजकीय निर्माण निगम के तत्कालीन एमडी सीपी सिंह, संयुक्त निदेशक खनिज सुहेल अहमद फारुखी के अलावा 36 अन्य अधिकारी व इंजीनियर शामिल हैं। लोकायुक्त की जांच में भी यह दोषी मिले थे। इनमें राम बोध और सीपी सिंह रिटायर हो चुके हैं।

सूत्रों की माने तो 1410 करोड़ रुपये के स्मारक घोटाले में सतर्कता अधिष्ठान ने उक्त अफसरों और इंजीनियरों के खिलाफ दो वर्ष पूर्व अभियोजन स्वीकृति मांगी थी। सरकार से अनुमति मिलने के बाद अब इन अधिकारियों के खिलाफ सतर्कता अधिष्ठान न्यायालय में चार्जशीट दाखिल करेगा।

नसीमुद्दीन और बाबू सिंह कुशवाहा भी पाए गये थे दोषी
स्मारक घोटले की जांच शुरुआत में लोकायुक्त जस्टिस एनके मेहरोत्रा ने की थी। जांच में बसपा सरकार में मंत्री रहे नसीमुद्दीन और बाबू सिंह कुशवाहा भी दोषी पाए गये थे। बता दें कि मायावती शासन के दौरान 2007 से 2012 के दौरान नोएडा और लखनऊ में करीब 1410 करोड़ रुपये का स्मारक घोटाला हुआ था। इसकी जांच लोकायुक्त एनके मेहरोत्रा ने की थी। जांच में बसपा सरकार में मंत्री रहे नसीमुद्दीन सिद्दकी, बाबू सिंह कुशवाहा समेत 199 लोगों को घोटाले का जिम्मेदार ठहराया गया था। लोकायुक्त की रिपोर्ट के बाद सरकार ने शुरुआती जांच ईओडब्ल्यू से कराई थी और फिर मामले को सतर्कता अधिष्ठान के हवाले कर दिया गया।

घोटाले में यह लोग थे शामिल
स्मारक घोटाले में एक विधायक, दो पूर्व विधायक, दो वकील, खनन विभाग के पांच अधिकारी, राजकीय निर्माण निगम के 57 इंजीनियर व 37 लेखाकार, एलडीए के पांच इंजीनियर, पत्थरों की आपूर्ति करने वाली 60 फर्में व 20 कंसोर्टियम प्रमुख तथा आठ बिचौलिये शामिल थे। इसके साथ ही लोकायुक्त ने अपनी रिपोर्ट में नसीमुद्दीन, बाबू सिंह कुशवाहा, राजकीय निर्माण निगम के तत्कालीन एमडी सीपी सिंह, खनन के तत्कालीन संयुक्त निदेशक सुहेल अहमद फारूकी और 15 अन्य इंजीनियरों के खिलाफ केस दर्ज कराने और घोटाले की धनराशि की वसूली करने के साथ ही पूरे मामले की जांच सीबीआई या स्पेशल टास्क फोर्स गठित कर कराने की भी संस्तुति की थी।

34 फीसदी महंगा खरीदा था पत्थर
लोकायुक्त की रिपोर्ट में सामने आया था कि, स्मारक में लगने वाले पत्थर को कीमत से 34 फीसदी ज्यादा दर पर खरीदा गया था। इससे सरकार को 14.10 अरब रुपये की क्षति हुई थी। रिपोर्ट में उन्होंने क्षति की भरपाई के लिए क्रिमिनल लॉ एमेडमेंट ऑर्डिनेंस 1944 की धारा 3 के तहत न्यायालय से अनुमति लेकर आरोपियों की संपत्ति कुर्क करके वसूली की सिफारिश की थी।

लखनऊ। मायावती सरकार के दौरान लखनऊ और नोएडा में हुए स्मारक घोटाले में शामिल पूर्व आईएएस अफसर राम बोध मौर्य समेत 39 लोगों की मुश्किलें बढ़ने जा रहीं हैं। योगी सरकार ने इनके खिलाफ भ्रष्टाचार का केस चलाने की अनुमति दे दी है। सूत्रों की माने तो जांच में नौकरशाहों के साथ कई सफेदपोशों पर भी शिकंजा कसा जायेगा। योगी सरकार पहले भी कई बार घोटालों में शामिल आरोपियों के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई करने के संकेत दे चुकी हैं। सरकार ने जिन अफसरों के खिलाफ अभियोजन स्वीकृति दी है, उनमें तत्कालीन निदेशक खनिज राम बोध मौर्य, राजकीय निर्माण निगम के तत्कालीन एमडी सीपी सिंह, संयुक्त निदेशक खनिज सुहेल अहमद फारुखी के अलावा 36 अन्य अधिकारी व इंजीनियर शामिल हैं। लोकायुक्त की जांच में भी यह दोषी मिले थे। इनमें राम बोध और सीपी सिंह रिटायर हो चुके हैं। सूत्रों की माने तो 1410 करोड़ रुपये के स्मारक घोटाले में सतर्कता अधिष्ठान ने उक्त अफसरों और इंजीनियरों के खिलाफ दो वर्ष पूर्व अभियोजन स्वीकृति मांगी थी। सरकार से अनुमति मिलने के बाद अब इन अधिकारियों के खिलाफ सतर्कता अधिष्ठान न्यायालय में चार्जशीट दाखिल करेगा। नसीमुद्दीन और बाबू सिंह कुशवाहा भी पाए गये थे दोषी स्मारक घोटले की जांच शुरुआत में लोकायुक्त जस्टिस एनके मेहरोत्रा ने की थी। जांच में बसपा सरकार में मंत्री रहे नसीमुद्दीन और बाबू सिंह कुशवाहा भी दोषी पाए गये थे। बता दें कि मायावती शासन के दौरान 2007 से 2012 के दौरान नोएडा और लखनऊ में करीब 1410 करोड़ रुपये का स्मारक घोटाला हुआ था। इसकी जांच लोकायुक्त एनके मेहरोत्रा ने की थी। जांच में बसपा सरकार में मंत्री रहे नसीमुद्दीन सिद्दकी, बाबू सिंह कुशवाहा समेत 199 लोगों को घोटाले का जिम्मेदार ठहराया गया था। लोकायुक्त की रिपोर्ट के बाद सरकार ने शुरुआती जांच ईओडब्ल्यू से कराई थी और फिर मामले को सतर्कता अधिष्ठान के हवाले कर दिया गया। घोटाले में यह लोग थे शामिल स्मारक घोटाले में एक विधायक, दो पूर्व विधायक, दो वकील, खनन विभाग के पांच अधिकारी, राजकीय निर्माण निगम के 57 इंजीनियर व 37 लेखाकार, एलडीए के पांच इंजीनियर, पत्थरों की आपूर्ति करने वाली 60 फर्में व 20 कंसोर्टियम प्रमुख तथा आठ बिचौलिये शामिल थे। इसके साथ ही लोकायुक्त ने अपनी रिपोर्ट में नसीमुद्दीन, बाबू सिंह कुशवाहा, राजकीय निर्माण निगम के तत्कालीन एमडी सीपी सिंह, खनन के तत्कालीन संयुक्त निदेशक सुहेल अहमद फारूकी और 15 अन्य इंजीनियरों के खिलाफ केस दर्ज कराने और घोटाले की धनराशि की वसूली करने के साथ ही पूरे मामले की जांच सीबीआई या स्पेशल टास्क फोर्स गठित कर कराने की भी संस्तुति की थी। 34 फीसदी महंगा खरीदा था पत्थर लोकायुक्त की रिपोर्ट में सामने आया था कि, स्मारक में लगने वाले पत्थर को कीमत से 34 फीसदी ज्यादा दर पर खरीदा गया था। इससे सरकार को 14.10 अरब रुपये की क्षति हुई थी। रिपोर्ट में उन्होंने क्षति की भरपाई के लिए क्रिमिनल लॉ एमेडमेंट ऑर्डिनेंस 1944 की धारा 3 के तहत न्यायालय से अनुमति लेकर आरोपियों की संपत्ति कुर्क करके वसूली की सिफारिश की थी।