नलकी समान की खरीद फरोख्त ने पकड़ी रफ्तार, 3 महीने मे 1 लाख करोड़ रुपये का नुकसान

pisa

नई दिल्ली: कोरोनाकाल ने जहां एक तरफ देश की अर्थव्यवस्था को बिगड़ दिया है वहीं दूसरी तरफ नकली सामान की बिक्री की वजह से अर्थव्यवस्था डगमगा रही है। दरअसल, बीते साल नकली उत्पादों की बिक्री की वजह से अर्थव्यवस्था को 1 लाख करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है।

Case Of Purchase Of Tube Wells Became Fast Loss Of Rs 1 Lakh Crore In 3 Months :

आपको बता दें जालसाजीरोधी संस्था एएसपीए ने एक रिपोर्ट जारी की है, जिसमें बताया गया है कि 2019 में जालसाजी या नकली उत्पाद बनाने-बेचने की घटनाओं में भी 24 फीसदी इजाफा हुआ। जिसके कारण अर्थव्यवस्था को भारी नुकसान हुआ है और लगातार हो रहा है।

3 महीने मे 150 मामले

रिपोर्ट के अनुसार, इस साल फरवरी से अप्रैल तक नकली उत्पाद बनाने-बेचने के 150 मामले सामने आए जिसमें अधिकतर जाली पीपीई किट, सैनिटाइजर्स और मास्क से जुड़े थे। महामारी की वजह से इन उत्पादों की मांग अचानक बहुत बढ़ गई थी। मांग बढ़ाने से कंपनिया इसकी भरपाई नहीं कर पा रही थी। जिसके कारण नकली उत्पाद बनाकर बेचने वालों को मौका मिल गया। उन्होंने अपने जाल को और ज्यादा फैला लिया।

रिपोर्ट के मुताबिक 2018 से तुलना करें तो 2019 में जालसाजी के मामले 24 फीसदी बढ़ गए और कुल 1 लाख करोड़ रुपये की चपत सरकारी राजस्व को लगाई है। आर्थिक सहयोग एवं विकास संगठन के अनुसार, दुनिया में नकली उत्पादों का कारोबार कुल व्यापार का 3.3 फीसदी है। जो कि लगातार तेजी से बढ़ रहा है।

नई दिल्ली: कोरोनाकाल ने जहां एक तरफ देश की अर्थव्यवस्था को बिगड़ दिया है वहीं दूसरी तरफ नकली सामान की बिक्री की वजह से अर्थव्यवस्था डगमगा रही है। दरअसल, बीते साल नकली उत्पादों की बिक्री की वजह से अर्थव्यवस्था को 1 लाख करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है। आपको बता दें जालसाजीरोधी संस्था एएसपीए ने एक रिपोर्ट जारी की है, जिसमें बताया गया है कि 2019 में जालसाजी या नकली उत्पाद बनाने-बेचने की घटनाओं में भी 24 फीसदी इजाफा हुआ। जिसके कारण अर्थव्यवस्था को भारी नुकसान हुआ है और लगातार हो रहा है।

3 महीने मे 150 मामले

रिपोर्ट के अनुसार, इस साल फरवरी से अप्रैल तक नकली उत्पाद बनाने-बेचने के 150 मामले सामने आए जिसमें अधिकतर जाली पीपीई किट, सैनिटाइजर्स और मास्क से जुड़े थे। महामारी की वजह से इन उत्पादों की मांग अचानक बहुत बढ़ गई थी। मांग बढ़ाने से कंपनिया इसकी भरपाई नहीं कर पा रही थी। जिसके कारण नकली उत्पाद बनाकर बेचने वालों को मौका मिल गया। उन्होंने अपने जाल को और ज्यादा फैला लिया। रिपोर्ट के मुताबिक 2018 से तुलना करें तो 2019 में जालसाजी के मामले 24 फीसदी बढ़ गए और कुल 1 लाख करोड़ रुपये की चपत सरकारी राजस्व को लगाई है। आर्थिक सहयोग एवं विकास संगठन के अनुसार, दुनिया में नकली उत्पादों का कारोबार कुल व्यापार का 3.3 फीसदी है। जो कि लगातार तेजी से बढ़ रहा है।