अब देह व्यापार का धंधा भी हो रहा Cashless, वेबसाइट के जरिये हो रहा प्रचार

मुंबई। नोटबंदी के बाद से केंद्र सरकार ने ‘कैशलेस इंडिया’ की तरफ लोगों को जागरूक करना शुरू कर दिया है। पुराने नोटों का चलन बंद हो जाने के बाद से कुछ ऐसे धंधों में सबसे ज्यादा फर्क पड़ा जो चोरी छिपे होते हैं। ऐसा ही नया तरीका खोज निकाला, सेक्स रैकेट संचालकों ने। अपने ग्राहकों को लुभाने और आयकर विभाग व पुलिस को चकमा देने के लिए अब देह व्यापार के धंधे को भी कैशलेस करने की जुगत शुरू कर दी गयी है। एजेंट पेमेंट के लिए कैशलेस और ऑनलाइन ट्रांजेक्शन का सहारा ले रहे हैं और इन सब का प्रचार हो रहा है ऑनलाइन वेबसाइट के जरिये।



ऐसे काम कर रहे हैं एजेंट—

  • पूरा धंधा फिल्मों में ऑडिशन और सर्विस के नाम पर चलाया जा रहा है। फिल्मों में काम दिलाने के नाम पर लड़कियों को बुलाया जाता है।
  • सरकार ने नोटबंदी का फैसला लिया है, तब से देह व्यापार का धंधा लगभग बंद हो गया।
  • धंधे से जुड़े लोग चाहकर भी अपना काला धन सफेद नहीं कर सकते।
  • ज्यादातर लोग वो हैं, जो लड़कियों को फिल्मों में काम के बहाने मुंबई बुलाते हैं और फिर उन्हें सेक्स रैकेट में धकेल देते हैं।
  • मुंबई की चकाचौंध में अंधी हो चुकीं कई लड़कियां अपनी महंगी जरूरतों को पूरा करने के लिए आसानी से इस धंधे को अपना लेती हैं।




फिल्मी स्टाइल में चलाते हैं पूरा रैकेट—

  • जिस्मफरोशी का यह धंधा पर्दे के पीछे चलाया जाता था। लेकिन नोटबंदी के बाद से इसे खुलकर चलाया जा रहा है।
  • किसी को शक न हो। इसके कॉर्डिनेटर्स ग्राहकों को बतौर प्रोड्यूसर ऑफिस में बुलाते हैं।
  • पैसे फिल्मों में एक्ट्रेस को साइन करने के नाम पर लेते हैं। ताकि पैसा काला धन न कहा जाए।
  • जो भी पैसा लिया जाता है, वह डेबिट-क्रेडिट कार्ड से या ऑनलाइन ट्रांजेक्शन के जरिए आता है।
  • इन दलालों या कॉर्डिनेटर्स ने कई तरह की वेबसाइट्स बना रखी हैं। जहां से लड़कियों की बुकिंग एस्कॉर्ट सर्विस के नाम पर होती है।
  • पैसा फिल्मों के नाम पर वसूला जाता है।




कास्टिंग एजेंसी के नाम पर जाता है पैसा—

  • वेबसाइट्स पर स्लोगन लगा रखा है। ताकि ज्यादा से ज्यादा ग्राहक संपर्क में आ सकें।
  • कास्टिंग एजेंसी के नाम पर बैंकों में अकाउंट खोले गए हैं।
  • कार्ड स्वेप करने के लिए मशीने भी लेकर रखी हैं। ताकि पेमेंट में कोई दिक्कत न हो।

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इन वेबसाइट पर खुलकर हो रहा प्रचार




कोडवर्ड में होती है बात—

  • सेक्स रैकेट से जुड़े कॉर्डिनेटर खुद बताते हैं कि आयकर विभाग और पुलिस से बचने के लिए वे कोडवर्ड का इस्तेमाल करते हैं।
  • कॉर्डिनेटर माडलों को चेक से पेमेंट करता है। जिस पर लिखा होता है कि उन्हें यह अमाउंट कंपनी के साथ अनुबंध करने और कंपनी के असाइनमेंट पूरा करने के लिए बतौर सैलरी दिया गया है।
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