कैशलेस ट्रांजैक्शन में हुआ 60 फीसदी बढ़ावा, डिजिटल इंडिया का सपना जल्द होगा पूरा

कैशलेस ट्रांजैक्शन में हुआ 60 फीसदी बढ़ावा, डिजिटल इंडिया का सपना जल्द होगा पूरा
कैशलेस ट्रांजैक्शन में हुआ 60 फीसदी बढ़ावा, डिजिटल इंडिया का सपना जल्द होगा पूरा
नई दिल्ली। 8 नवंबर 2016 को घोषित नोटबंदी के बाद कई लोगों को तमाम तरह की समस्या का समाना करना पड़ा। वहीं कुछ लोगों ने सरकार के इस कदम को सराहा भी लेकिन, अब जो आंकड़े निकलकर सामने आए हैं वो यकीनन केंद्र सरकार के लिए अच्छी खबर है। इस डेढ़ साल के दौरान कैशलेस ट्रांजैक्शन में लगभग 60 फीसदी का इजाफा हुआ है। इसमें से सबसे बड़ी हिस्सेरदारी डेबिट और क्रेडिट कार्ड से हो रही खरीददारी की है। इससे…

नई दिल्ली। 8 नवंबर 2016 को घोषित नोटबंदी के बाद कई लोगों को तमाम तरह की समस्या का समाना करना पड़ा। वहीं कुछ लोगों ने सरकार के इस कदम को सराहा भी लेकिन, अब जो आंकड़े निकलकर सामने आए हैं वो यकीनन केंद्र सरकार के लिए अच्छी खबर है। इस डेढ़ साल के दौरान कैशलेस ट्रांजैक्शन में लगभग 60 फीसदी का इजाफा हुआ है। इसमें से सबसे बड़ी हिस्सेरदारी डेबिट और क्रेडिट कार्ड से हो रही खरीददारी की है। इससे साफ है कि नोटंबदी के बाद से लोगों का रुझान डिजिटल लेनदेन की तरफ बढ़ा है

आरबीआई ने जारी की रिपोर्ट

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आरबीआई द्वारा जारी की गयी रिपोर्ट में मोदी सरकार के लिए अच्छी खबर यह है कि नवंबर के बाद से लगातार इलेक्ट्रॉनिक ट्रांजैक्शन में बढ़ोत्तरी हुई है, इससे सरकार के कैशलेस इकोनॉमी और डिजिटल इंडिया बनाने का सपना जल्द ही पूरा होता नज़र आ रहा है। आरबीआई रिपोर्ट के मुताबिक, मार्च 2018 में 109 करोड़ 80 लाख इलेक्ट्रॉनिक पेमेंट ट्रांजैक्शन हुई हैं। जबकि नवंबर 2016 में 67 करोड़ 15 लाख ट्रांजैक्शन हुई थीं। हालांकि, जनवरी 2018 में रिकॉर्ड 112 करोड़ 23 लाख ट्रांजैक्शन न हुईं थीं।

सबसे ज्यादा डेबिट/क्रेडिट कार्ड का हो रहा इस्तेमाल

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डेबिट और क्रेडिट कार्ड का इस्तेमाल काफी समय से हो रहा है। खासकर नौकरीपेशा लोग इसका इस्तेमाल ज्यादा करते हैं लेकिन, नोटबंदी के बाद से अचानक इसके इस्तेमाल में काफी तेजी आई है। आरबीआई की रिपोर्ट से पता चला कि कुल कैशलेस ट्रांजैक्शन में कार्ड्स की हिस्सेदारी 22 फीसदी है। मार्च 2018 में 24 करोड़ 71 लाख ट्रांजैक्शंन पीओएस मशीन पर डेबिट व क्रेडिट कार्ड से हुई हैं।

ऐप और वॉलेट के इस्तेमाल में भी हुआ बढ़ावा

नोटबंदी के बाद से ही डिजिटल लेनदेन बढ़ रहा है। संसद के वित्त स्थायी समिति को सौंपी गई एक रिपोर्ट में इस बात का जिक्र है कि UPI-BHIM, आईएमपीएस, एम-वॉलेट और डेबिट कार्ड के जरिए लोग पहले से ज्यादा डिजिटल पेमेंट कर रहे हैं। रिपोर्ट में यह बात सामने आई है कि रोजमर्रा के कामकाजों में डिजिटल पेमेंट का चलन बढ़ा है।

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जल्द पूरा होगा कैशलेस इकोनॉमी का सपना

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नोटबंदी की घोषणा के दौरान कहा था कि देश को कैशलेस इकोनॉमी की तरफ ले जाना है। वित्त मंत्री अरुण जेटली भी बार-बार इसकी तरफदारी करते नजर आए। इसके लिए सिस्टम में कैश का इस्तेमाल कम किया जाए। आरबीआई की वार्षिक रिपोर्ट से मोदी सरकार के इस सपने को बल मिलता दिख रहा है। क्योंकि, नए नोट या यूं कहें कि कैश आने के बाद भी लोग लगातार कैशलेस ट्रांजैक्शेन को तवज्जों दे रहे हैं।

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