सावधान : गुटखा, सिगरेट पहुंचाएंगे शरीर में कोरोना

cigarette

लखनऊ: कोविड-19 के इस बुरे दौर में तंबाकू सेवन व धूम्रपान करने वालों को संक्रमण का खतरा ज्यादा है। इसलिए नशा छोड़ देना ऐसे लोगों की जिंदगी के लिए वरदान होगा। विशेषज्ञों के मुताबिक खैनी, गुटखा खाने वाले कई गैरसंचारी रोगों से भी जकड़ जाते हैं और किसी और बीमारी से ग्रसित व्यक्ति के लिए कोरोना वायरस खतरनाक साबित हो रहा है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्लयूएचओ) और शोधकर्ताओं ने भी चेतावनी दी है कि तम्बाकू से कमजोर हुए फेफड़े कोरोना को संक्रमण का दायरा बढ़ाने में मुफीद साबित हो रहे हैं।

Caution Gutkha Cigarettes Will Deliver Corona In The Body :

केजीएमयू के मेडिसिन विभाग के प्रोफेसर अरविंद मिश्रा के मुताबिक यूं तो तंबाकू का किसी भी रूप में उपयोग करना नुकसानदेह ही है। यह ना सिर्फ इस्तेमाल करने वालों को नुकसान पहुंचाता है, बल्कि उनके आस-पास के लोगों को भी गंभीर रूप से प्रभावित करता है। उस पर से कोरोना वायरस चूंकि फेफड़ों को प्रभावित करता है, इसलिए सिगरेट, हुक्का या वाटरपाइप जैसी चीज का सेवन करने वालों के लिए यह और गंभीर खतरा हो सकता है।

सुशांत सिंह केस: महाराष्ट्र सरकार कर रही CBI जांच का विरोध, सुप्रीम कोर्ट मे दाखिल किया जवाब

उन्होंने बताया कि तम्बाकू लेने के दौरान इंसान हाथ-मुंह को छूता है। यह भी संक्रमण का जरिया है और कोरोना हाथ के जरिए मुंह तक पहुंच सकता है या हाथों में मौजूद कोरोना तम्बाकू में जाकर मुंह तक पहुंच सकता है। तम्बाकू चबाने के दौरान मुंह में अतिरिक्त लार बनती है, ऐसे में जब इंसान थूकता है तो संक्रमण दूसरों तक पहुंच सकता है। इतना ही नहीं, इससे मुंह, जीभ, होंठ और जबड़ों का कैंसर भी हो सकता है।

डॉ. अरविंद के मुताबिक तंबाकू सेवन करने वालों में गैरसंचारी रोग- दिल और फेफड़े की बीमारी, कैंसर और डायबिटीज होने का खतरा बढ़ जाता है। कोरोना संक्रमित होने पर ऐसे लोगों की मौत हो जा रही है। उन्होंने कहा कि तंबाकू सेवन करने वालों में संक्रमित करने वाली बीमारियां- टीबी और लोवर रिपारेटरी इंफेक्शन का खतरा भी बढ़ जाता है।

रिपोर्ट के मुताबिक तंबाकू में जहरीले केमिकल मिले होते हैं जो फेफड़ों को नुकसान पहुंचाते हैं। इससे सेवन करने वाले व्यक्ति की प्रतिरोधक क्षमता कमजोर हो जाती है। ऐसे टीबी के मरीज जो तंबाकू का सेवन करते हैं उनमें मृत्यु का अंदेशा 38 प्रतिशत अधिक हो जाता है।

स्मोकिंग से भी कोविड-19 का खतरा

स्मोकिंग और किसी भी रूप में तम्बाकू लेने पर सीधा असर फेफड़े के काम करने की क्षमता पर पड़ता है और सांस लेने से जुड़ी बीमारियां बढ़ती हैं। संक्रमण होने पर कोरोना सबसे पहले फेफड़े पर अटैक करता है, इसलिए इसका मजबूत होना बेहद जरूरी है। वायरस फेफड़े की कार्यक्षमता को घटाता है। अब तक की रिसर्च के मुताबिक धूम्रपान करने वाले लोगों में वायरस का संक्रमण और मौत दोनों का खतरा ज्यादा है।

सिगरेट, सिगार, बीड़ी, वाटरपाइप और हुक्का पीने वालों पर कोविड-19 का रिस्क ज्यादा है। सिगरेट पीने के दौरान हाथ और होंठ का इस्तेमाल होता है और संक्रमण का खतरा रहता है। एक ही हुक्का को कई लोग इस्तेमाल करते हैं जो कोरोना का संक्रमण सीधे तौर पर एक से दूसरे इंसान में पहुंचा जा सकता है।

आंकड़ों में तंबाकू का खतरा

  • 50% तंबाकू इस्तेमाल करने वाले लोगों की हो जाती है मौत
  • 27 करोड़ लोग तंबाकू का इस्तेमाल करते हैं भारत में
  • 02 सबसे बड़ा उत्पादक है तंबाकू का भारत
  • 3500 लोग रोज मरते हैं तंबाकू खाने वाले। इनमें से सात फीसदी मौतें 30 साल तक के युवाओं की होती है।
लखनऊ: कोविड-19 के इस बुरे दौर में तंबाकू सेवन व धूम्रपान करने वालों को संक्रमण का खतरा ज्यादा है। इसलिए नशा छोड़ देना ऐसे लोगों की जिंदगी के लिए वरदान होगा। विशेषज्ञों के मुताबिक खैनी, गुटखा खाने वाले कई गैरसंचारी रोगों से भी जकड़ जाते हैं और किसी और बीमारी से ग्रसित व्यक्ति के लिए कोरोना वायरस खतरनाक साबित हो रहा है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्लयूएचओ) और शोधकर्ताओं ने भी चेतावनी दी है कि तम्बाकू से कमजोर हुए फेफड़े कोरोना को संक्रमण का दायरा बढ़ाने में मुफीद साबित हो रहे हैं। केजीएमयू के मेडिसिन विभाग के प्रोफेसर अरविंद मिश्रा के मुताबिक यूं तो तंबाकू का किसी भी रूप में उपयोग करना नुकसानदेह ही है। यह ना सिर्फ इस्तेमाल करने वालों को नुकसान पहुंचाता है, बल्कि उनके आस-पास के लोगों को भी गंभीर रूप से प्रभावित करता है। उस पर से कोरोना वायरस चूंकि फेफड़ों को प्रभावित करता है, इसलिए सिगरेट, हुक्का या वाटरपाइप जैसी चीज का सेवन करने वालों के लिए यह और गंभीर खतरा हो सकता है। सुशांत सिंह केस: महाराष्ट्र सरकार कर रही CBI जांच का विरोध, सुप्रीम कोर्ट मे दाखिल किया जवाब उन्होंने बताया कि तम्बाकू लेने के दौरान इंसान हाथ-मुंह को छूता है। यह भी संक्रमण का जरिया है और कोरोना हाथ के जरिए मुंह तक पहुंच सकता है या हाथों में मौजूद कोरोना तम्बाकू में जाकर मुंह तक पहुंच सकता है। तम्बाकू चबाने के दौरान मुंह में अतिरिक्त लार बनती है, ऐसे में जब इंसान थूकता है तो संक्रमण दूसरों तक पहुंच सकता है। इतना ही नहीं, इससे मुंह, जीभ, होंठ और जबड़ों का कैंसर भी हो सकता है। डॉ. अरविंद के मुताबिक तंबाकू सेवन करने वालों में गैरसंचारी रोग- दिल और फेफड़े की बीमारी, कैंसर और डायबिटीज होने का खतरा बढ़ जाता है। कोरोना संक्रमित होने पर ऐसे लोगों की मौत हो जा रही है। उन्होंने कहा कि तंबाकू सेवन करने वालों में संक्रमित करने वाली बीमारियां- टीबी और लोवर रिपारेटरी इंफेक्शन का खतरा भी बढ़ जाता है। रिपोर्ट के मुताबिक तंबाकू में जहरीले केमिकल मिले होते हैं जो फेफड़ों को नुकसान पहुंचाते हैं। इससे सेवन करने वाले व्यक्ति की प्रतिरोधक क्षमता कमजोर हो जाती है। ऐसे टीबी के मरीज जो तंबाकू का सेवन करते हैं उनमें मृत्यु का अंदेशा 38 प्रतिशत अधिक हो जाता है।

स्मोकिंग से भी कोविड-19 का खतरा

स्मोकिंग और किसी भी रूप में तम्बाकू लेने पर सीधा असर फेफड़े के काम करने की क्षमता पर पड़ता है और सांस लेने से जुड़ी बीमारियां बढ़ती हैं। संक्रमण होने पर कोरोना सबसे पहले फेफड़े पर अटैक करता है, इसलिए इसका मजबूत होना बेहद जरूरी है। वायरस फेफड़े की कार्यक्षमता को घटाता है। अब तक की रिसर्च के मुताबिक धूम्रपान करने वाले लोगों में वायरस का संक्रमण और मौत दोनों का खतरा ज्यादा है। सिगरेट, सिगार, बीड़ी, वाटरपाइप और हुक्का पीने वालों पर कोविड-19 का रिस्क ज्यादा है। सिगरेट पीने के दौरान हाथ और होंठ का इस्तेमाल होता है और संक्रमण का खतरा रहता है। एक ही हुक्का को कई लोग इस्तेमाल करते हैं जो कोरोना का संक्रमण सीधे तौर पर एक से दूसरे इंसान में पहुंचा जा सकता है।

आंकड़ों में तंबाकू का खतरा

  • 50% तंबाकू इस्तेमाल करने वाले लोगों की हो जाती है मौत
  • 27 करोड़ लोग तंबाकू का इस्तेमाल करते हैं भारत में
  • 02 सबसे बड़ा उत्पादक है तंबाकू का भारत
  • 3500 लोग रोज मरते हैं तंबाकू खाने वाले। इनमें से सात फीसदी मौतें 30 साल तक के युवाओं की होती है।