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CBI छापेमारी: पूर्व नौकरशाहों के सहारे कसने लगा अखिलेश-माया पर शिकंजा

Cbi Raid Chini Mil Ghotala Khanan Ghotala

By टीम पर्दाफाश 
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लखनऊ। चीनी मिल घोटाले में फंसे पूर्व आईएएस अधिकारियों पर केन्द्रीय जांच ब्यूरो(सीबीआई) का शिकंजा जिस कदर कसता जा रहा है, उससे साफ तौर पर अंदाजा लगाया जा सकता है कि इस घोटाले की आंच बहुत ऊपर तक जाने वाली है। जिन अधिकारियों के घर छापेमारी हुई और पूछताछ हो रही है, वो तत्कालीन सरकार के दौरान बसपा प्रमुख मायावती के बहुत करीबी थे। उन अफसरों में पहला नाम पूर्व आईएएस अधिकारी नेतराम और दूसरा विनय प्रिय दुबे का है। सीबीआई ने इन दोनों अफसरों के ठिकानों पर छापेमारी कर कई अहम दस्तावेज़ बरामद किए हैं।

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सीबीआई ने नेतराम के लखनऊ के गोमतीनगर स्थित आवास और विनय प्रिय के अलीगंज स्थित आवास पर छापा मारा है। आपको बता दें कि नेतराम मायावती के पूर्व सचिव भी रह चुके हैं। मायाराज में नेतराम का खासा रुतबा हुआ करता था। नेतराम रुतबे का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि उनसे मिलने के लिए कैबिनेट मंत्रियों तक को समय लेना पड़ता था। हालांकि अखिलेश यादव के शासनकाल में नेतराम को राष्ट्रीय एकीकरण विभाग में भेज दिया गया, जिसके बाद साल 2014 में वो उत्तर प्रदेश प्रशासन एवम प्रबंधन अकादमी के महानिदेशक के पद से रिटायर हो गए।

ये है पूरा घोटाला-

साल 2012 में आई कैग रिपोर्ट के अनुसार साल 2010 से 2011 के दौरान यूपी सरकार द्वारा 21 चीनी मिलों को औने पौने दामों में बेंचे जाने से सरकारी खजाने को 1100 करोड़ रुपए का नुकसान हुआ था। सरकार को हुए इस नुकसान के पीछे की मंशा सत्ताधारी पक्ष के करीबी चन्द औद्योगिक घरानों को सीधे लाभ पहुंचाना था।

जानकारों की माने तो इस घोटाले की नींव तत्काली मुख्यमंत्री मायावती के सबसे करीबी मंत्री रहे नसीमुद्दीन सिद्दीकि ने रखी थी। नसीमुद्दीन ने करीब 17 सरकारी चीनी मिलों को औने पौने दामोें में शराब कारोबारी पोंटी चड्ढा की कंपनियों को बेंच दी। इन चीनी मिलों की जो कीमत सरकार को मिली वह उस जमीन की कीमत के बराबर भी नहीं थी जिन पर चीनी मिलें खड़ीं थी। जिन चीनी मिलों को 20 से 25 करोड़ में प्राइवेट कंपनियों को बेंच दिया गया उनमें मौजूद मशीनों की कीमत कहीं ज्यादा आंकी गई थी।

अखिलेशराज पर भी कसने लगा शिकंजा-

तत्कालीन अखिलेश सरकार के दौरान बहुचर्चित खनन घोटाले को लेकर भी सीबीआई ने जांच शुरू कर दी है और कार्रवाई का सिलसिला भी शुरू हो गया है। सीबीआई ने बुधवार को बुलंदशहर के जिलाधिकारी अभय कुमार सिंह के निवास पर छापा मारा है। खनन मामले में अभय कुमार सिंह भी रडार पर थे। आपको बता दें कि ये मामला तब का है जब राज्य में समाजवादी पार्टी की सरकार थी और अखिलेश यादव राज्य के मुख्यमंत्री थे।

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सीबीआई ने बुलंदशहर, लखनऊ, फतेहपुर, आजमगढ़, इलाहाबाद, नोएडा, गोरखपुर, देवरिया में छापेमारी की। इस दौरान सीबीआई ने बुलंदशहर के डीएम अभय सिंह के खिलाफ केस दर्ज कर लिया गया है। उनके अलावा देवरिया के डीएम विवेक के खिलाफ भी केस दर्ज हुआ है। अभय सिंह के आवास से 47 लाख रुपये की रिकवरी हुई है तो वहीं देवरिया के एडीएम देवीशरण उपाध्याय के घर से 10 लाख रुपये रिकवर हुए हैं।

अवैध खनन का मामला 2012 से 2016 के बीच का है, इस वक्त राज्य में समाजवादी पार्टी की सरकार थी. तब खनन मंत्रालय का जिम्मा खुद मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ही संभाल रहे थे। ऐसे में उनपर भी लगातार सवाल उठते रहे हैं।

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