CBI के रडार पर यूपी के कई सफेदपोश समेत हजारों की संख्या में पीसीएस-इंजीनियर

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लखनऊ। तत्कालीन समाजवादी पार्टी की सरकार में यूपी लोक सेवा आयोग (यूपीपीएससी) की 20 हजार भर्तियों की जांच सीबीआई करेगी। इन नियुक्तियों की जांच के लिए यूपी सरकार ने केंद्र सरकार से सिफारिश की थी। इस मामले में जल्द ही सीबीआई एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू करेगी। इस जांच में पीसीएस से लेकर डॉक्टर और इंजीनियर तक के पद शामिल हैं। आरोप है कि नियमों को ताक पर रखकर इन भर्तियों को अंजाम दिया गया। परीक्षा केंद्रों के निर्धारण में…

लखनऊ। तत्कालीन समाजवादी पार्टी की सरकार में यूपी लोक सेवा आयोग (यूपीपीएससी) की 20 हजार भर्तियों की जांच सीबीआई करेगी। इन नियुक्तियों की जांच के लिए यूपी सरकार ने केंद्र सरकार से सिफारिश की थी। इस मामले में जल्द ही सीबीआई एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू करेगी।

इस जांच में पीसीएस से लेकर डॉक्टर और इंजीनियर तक के पद शामिल हैं। आरोप है कि नियमों को ताक पर रखकर इन भर्तियों को अंजाम दिया गया। परीक्षा केंद्रों के निर्धारण में मनमानी की गई और डॉक्टर व इंजीनियरों की भर्ती में भी खेल किया गया।

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मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने यूपीपीएससी की जांच के लिए कैबिनेट से प्रस्ताव पास कराया था, जिसके बाद अगस्त में गृह विभाग ने इसे केंद्र सरकार को भेज दिया था। इससे पूर्व राज्य सरकार पर भर्तियों में धांधली का आरोप लगाते हुए इलाहाबाद में प्रतियोगी छात्रों की ओर से कई बार प्रदर्शन किए गए थे।

साक्ष्य जुटा रही है सीबीआई-

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सीबीआई यूपीपीएससी के दफ्तर में अपना एक अस्थायी ऑफिस भी खोल सकती है, क्योंकि जांच के दौरान सभी जरूरी दस्तावेज़ यहीं से उपलब्ध होंगे। सूत्रों की मानें तो सीबीआई ने इस भर्ती में हुई धांधली के साक्ष्य भी जुटाने शुरू कर दिये हैं। वहीं आयोग के अफसरों का कहना है कि अभी तक सीबीआई जांच के बारे में अधिकृत जानकारी नहीं मिल सकी है।

जांच में आएंगे कई सफ़ेदपोश-

यूपीपीएससी की भर्तियों में धांधली सामने आने के बाद सीबीआई जांच की जद में कई सफ़ेदपोश भी आ सकते हैं। तत्कालीन यूपीपीएससी के अध्यक्ष अनिल यादव की नियुक्ति में भी नियमों की अनदेखी की गयी थी। इसी के साथ कार्यवाहक अध्यक्ष रहे डॉक्टर एसके जैन व अध्यक्ष अनिरुद्ध सिंह यादव के कार्यकाल में घोषित कई भर्तियों के परिणाम जांच के दायरे में आएंगे।

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