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भ्रष्टाचार पर मोदी सरकार का एक और वार, 22 टैक्स अफसरों को जबरन किया रिटायर

By रवि तिवारी 
Updated Date

नई दिल्ली। केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार (Narendra Modi Government) के दूसरे कार्यकाल में सरकारी विभागों की सफाई यानी ‘नाकारा अफसरों’ को निकालने का सिलसिला लगातार जारी है। इसी कड़ी में केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर एवं सीमा शुल्क बोर्ड (CBIC) के 22 सीनियर अधिकारियों को जबरन रिटायर (Compulsory Retirement) कर दिया है। ये सभी अफसर टैक्स डिपार्टमेंट के हैं. इससे पहले भी टैक्स विभाग के ही 12 वरिष्ठ अफसरों को जबरन रिटायर कर दिया गया था।

आपको बता दें कि इसके पहले जून महीने में भी वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण (Finance Minister Nirmala Sitharaman) ने वित्त मंत्रालय (Finance Ministry) का कार्यभार संभालते ही सख्त फैसला लेते हुए कई बड़े अधिकारियों को जबरन रिटायर कर दिया था। डिपार्टमेंट ऑफ पर्सनल एंड एडमिनिस्ट्रेटिव रिफॉर्म्स के नियम 56 के तहत वित्त मंत्रालय के इन अफसरों को सरकार समय से पहले ही रिटायरमेंट दे रही है।

जून महीने में नियम 56 के तहत रिटायर किए गए सभी अधिकारी इनकम टैक्स डिपार्टमेंट में चीफ कमिश्नर, प्रिंसिपल कमिश्नर्स और कमिश्नर जैसे पदों पर तैनात थे। रिपोर्ट्स के मुताबिक इनमें से कई अफसरों पर कथित तौर पर भ्रष्टाचार, अवैध और बेहिसाब संपत्ति जैसे गंभीर आरोप थे।

क्या है फंडामेंटल रूल 56?

दरअसल, फंडामेंटल रूल 56 का इस्तेमाल ऐसे अधिकारियों पर किया जा सकता है जो 50 से 55 साल की उम्र के हों और 30 साल का कार्यकाल पूरा कर चुके हैं। सरकार के पास यह अधिकार है कि वह ऐसे अधिकारियों को अनिर्वाय रिटायरमेंट दे सकती है। ऐसा करने के पीछे सरकार का मकसद नॉन-परफॉर्मिंग सरकारी सेवक को रिटायर करना होता है। ऐसे में सरकार यह फैसला लेती है कि कौन से अधिकारी काम के नहीं हैं। यह नियम बहुत पहले से ही प्रभावी है।

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