CCTV कैमरे लगा रहे थे विधानसभा की सुरक्षा में सेंध, 100 में सिर्फ 6 करते हैं काम

लखनऊ। यूपी विधानसभा में 12 जुलाई की सुबह विस्फोटक मिलने के 24 घंटे बाद मचे हडकंप ने सूबे की सबसे सुरक्षित और वीआईपी मानी जाने वाली जगह की सुरक्षा की पोल खुलकर रख दी है। विधानसभा भवन की तीन स्तरीय सुरक्षा का हाल तो विधान मंडप में मिले विस्फोट से ही पता चल गया था, लेकिन जब इस घटना की जांच शुरू हुई तो पता चला कि ​भवन की मॉनीटरिंग के लिए लगे किए गए इंतजामात भी फेल पड़े हैं। इसके बाद से पूरे प्रदेश की सुरक्षा और निगरानी प्रणाली पर सवाल खड़ा हो गया है।

यूपी विधानसभा में विस्फोटक पहुंचने की घटना को प्रथम दृष्टया आतंकी साजिश बताया गया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा जांच की जिम्मेदारी राष्ट्रीय सुरक्षा एजेंसी (NIA) को सौंपे जाने के बाद जैसे ही NIA की टीम ने कार्रवाई शुरू की ​तो एक-एक कर यूपी विधानसभा की सुरक्षा व्यवस्था की पर्तें उधड़ना शुरू हो गईं। NIA ने जाँच की शुरूआती प्रक्रिया के तहत जैसे ही विधानसभा में लगे CCTV कैमरों को खंगाला, तो पता चला कि परिसर के भीतर निगरनी में लगे 100 CCTV कैमरों में से मात्र 6 कैमरे ही चालू हालत में थे बाकी कैमरे कब से खराब हैं इसकी जानकारी विधानसभा प्रशासन के पास भी नहीं थी।

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​सीसीटीवी कैमरों के बंद होने की सूरत में एनआईए के सामने इस जांच को आगे बढ़ाने की चुनौती और मजबूत हो गई है। एनआईए अब इस बात की जानकारी जुटाने में लगी है कि हाल ही के दिनों में ​विधानसभा प्रशासन ने कितनी कर्मचारियों को संविदा के तहत रखा है। उनमें से कितनों की गतिविधियां विधान मंडप तक थीं। इन सभी कर्मचारियों का पुलिस सत्यापन करवाया गया था या नहीं इन तमाम पहलुओं को खंगाला जा रहा है।

एनआई की जांच में जो दूसरा पहलू सामने आया है वह भी कम गंभीर नहीं है। विधानसभा की बाहरी सुरक्षा करने वाली स्थानीय पुलिस, सचिवालय प्रशासन की पुलिस और विधान मंडप की सुरक्षा व्यवस्था देखने वाले मार्शल्स की बीच में कोई समन्वय नहीं था। सीधे तौर पर तीन स्तर पर तैनात सुरक्षा बलों की कोई सामूहिक जवाबदेही निर्धारित नहीं की जा सकती।

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सीसीटीवी पर 35 लाख रुपए साल के खर्चा—

यूपी विधानसभा भी निगरानी के लिए लगाए गए 100 सीसीटीवी कैमरों के रखरखाव पर प्रतिवर्ष करीब 35 लाख रुपए खर्च किए जाते हैं। इन कैमरों की उपयोगिता विधानसभा के चप्पे-चप्पे पर नजर रखने की थी, लेकिन जब इनकी फुटेज की जरूरत हुई तो मात्र 6 कैमरों की फुटेज ही प्राप्त हो सकी। ऐसे में विधानसभा के भीतर के रख रखाव की अन्य मदों में खर्च होने वाले करोड़ों के बजट पर भी भ्रामक स्थिति बनती दिख रही है।

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