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भ्रष्टाचार पर मोदी सरकार का प्रहार, केंद्र ने मांगी भ्रष्ट और नकारा कर्मियों की सूची

By रवि तिवारी 
Updated Date

नई दिल्ली। मोदी सरकार ने भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त कदम उठाया है इसके तहत केंद्र सरकार ने देश के सभी बैंकों, सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों और अन्य विभागों से भ्रष्ट और नकारा कर्मचारियों की सूची मांगी है। कार्मिक मंत्रालय ने केंद्र सरकार के सभी विभागों से प्रत्येक श्रेणी के कर्मचारियों को कामकाज की समीक्षा ‘पूरे नियम कायदे’ से करने के साथ यह भी सुनिश्चित करने को कहा है कि किसी सरकारी कर्मचारी के खिलाफ जबरन सेवानिवृत्ति की कार्रवाई में मनमानी न हो।

मनमाना न हो निर्णय

कार्मिक मंत्रालय ने साथ ही निर्देश दिया कि कर्मचारियों के कामकाज की समीक्षा पूरे नियम और सत्यता के दायरे में हो और सुनिश्चित किया जाए कि जांच की आड़ में किसी सरकारी कर्मचारी के खिलाफ जबरन सेवानिवृत्ति की कार्रवाई जैसी मनमानी न होने पाए। निर्देश में सभी मंत्रालयों और विभागों से अपने प्रशासनिक नियंत्रण में सार्वजनिक क्षेत्रों के उपक्रम, बैंकों और स्वायत्त संस्थानों की समीक्षा कराने को कहा गया है।

प्रत्येक महीने देनी होगी रिपोर्ट

निर्देश के अनुसार सभी सरकारी संगठनों को प्रत्येक महीने की 15 तारीख को निर्धारित प्रारूप में रिपोर्ट देने को कहा गया है। इसकी शुरुआत 15 जुलाई 2019 से होगी। एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि मूल नियम 56 (जे), (आई) और केंद्रीय सिविल सेवा (पेंशन) नियम 1972 के नियम 48 के तहत जारी कार्मिक मंत्रालय के दिशा-निर्देशों के अंतर्गत बैंकों, सार्वजनिक उपक्रमों और केंद्र सरकार के विभागों में काम करने वाले कर्मचारियों के सेवा रिकॉर्ड की समीक्षा की जाएगी।

27 आईआरएस अफसरों पर हाल ही में गिरी थी गाज

केंद्र सरकार ने इस कानून का सहारा लेते हुए हाल ही में 15 आईआरएस के पर जनहित में गाज गिराई थी। इसी महीने की शुरुआत में आयकर विभाग के 12 आईआरएस अफसरों को भी इसी नियम के तहत हटाया गया था।

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