नि:शक्त दिव्यांगों को मिलेगी यूडीआईडी, पूरे देश में होगा मान्य

नि:शक्त दिव्यांगों को मिलेगी यूडीआईडी, पूरे देश में होगा मान्य

लखनऊ। केन्द्र सरकार ने 40 फीसदी से अधिक विकलांगता वाले दिव्यांगों को मिलने वाली सुविधाओं को राष्ट्रीय स्तर पर मुहैया करवाने के लिए आधार कार्ड की तर्ज पर यूडीआईडी कार्ड (स्वावलंबन कार्ड) जारी करने की योजना बनाई है। इस स्वांवलंबन कार्ड से नि:शक्त दिव्यांगों को सरकारी छूटें पाने में व्यवहारिक सुगमता प्राप्त हो सकेगी।

मिली जानकारी के मुताबिक केन्द्र सरकार ने नि:शक्त दिव्यांगों को दूसरे राज्यों में जाने पर मिलने वाली छूटों का लाभ उठाने के लिए परेशानी का सामना करना पड़ता है। एक राज्य दूसरे राज्य से जारी हुए दिव्यांग प्रमाणपत्र को स्वीकार करने से कतराते हैं। जिस वजह से दिव्यांग कोटे के लाभार्थियों को पात्रता के बावजूद परेशानियों का सामना करना पड़ता है। कई बार लाभार्थीयों के साथ संवेदनहीनता के मामले सामने आ चुके हैं।

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तमाम पहलुओं को ध्यान में रखते हुए केन्द्र सरकार ने नि:शक्त दिव्यांगों को यूडीआई जारी यानी स्वावलंबन कार्ड करने योजना बनाई। वेबसाइट www.swavlambancard.gov.in/pwd/application पर जाकर यूडीआई के पात्रों को अपना आवेदन पत्र भरना होगा, जिसके आधार पर केन्द्र सरकार नि:शक्त दिव्यांगों को एक पहचानपत्र जारी करेगी। जिसे उन्हें पूरे देश में मुफ्त यात्रा और पेंशन के संबन्ध में आने वाली समस्याओं का सामना नहीं करना पड़ेगा।

उत्तर प्रदेश की बात करें तो यहां प्रत्येक जिले में 17000 से लेकर 50000 तक दिव्यांग हैं जिन्हें सरकार पेंशन प्रदान करती हैं। इन दिव्यांगों को गरीबी सीमा से नीचे होने के चलते पेंशन मिलती है।

स्वावलंबन कार्ड रजिस्ट्रेशन साइट के मुताबिक केन्द्र सरकार को अब तक 36,000 से अधिक आवेदन प्राप्त हो चुके हैं। वेबसाइट पर स्वावलंबन कार्ड से मिलने वाले लाभ के बारे में बताया गया है। जो कि निम्नवत है —

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— स्वावलंबन कार्ड रखने वाले दिव्यांग जन को अन्य किसी दस्तावेज को अपने साथ रखने की आवश्यकता नहीं होगी। दिव्यांग जानों के तमाम आवश्यक दस्तावेज कार्ड के माध्यम से डिजटली कनेक्ट रहेंगे, जिन्हें रीडर के माध्यम से देखा जा सकेगा।
— स्वावलंबन कार्ड को पहचान पत्र के रूप में मान्यता प्रदान की जाएगी। स्वावलंबन कार्ड रखने वाले दिव्यांग जन को सरकारी सेवाओं और सुविधाओं का लाभ लेने के लिए किसी अन्य पहचानपत्र को पेश करने की आवश्यकता नहीं होगी। जबकि अभी तक कई दस्तावेज आवश्यक होते हैं।
— दिव्यांग जनों के सामाजिक और आर्थिक स्तर की समय समय पर मॉनी​टरिंग हो सकेगी।

 

 

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