केंद्र सरकार ने NRC की डेडलाइन बढ़ाने को लेकर सुप्रीम कोर्ट से अपील की

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केंद्र सरकार ने NRC की डेडलाइन बढ़ाने को लेकर सुप्रीम कोर्ट से अपील की

नई दिल्ली। केंद्र और असम सरकार ने शुक्रवार को उच्चतम न्यायालय का रुख कर राष्ट्रीय नागरिक पंजी (एनआरसी) को अंतिम रूप देने के लिए तय 31 जुलाई की समयसीमा बढ़ाने का अनुरोध किया। सरकार की तरफ से सुप्रीम कोर्ट में पेश हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि सीमावर्ती इलाकों में कई लोगों के नाम अधिकारियों की मिलीभगत से जोड़े गए हैं। ऐसे में करीब 20 फीसदी नामों के दोबारा सत्यापन के लिए थोड़े समय की जरूरत है।

Centre Government Pleaded Supreme Court To Extend July 31 Deadline For Final Nrc Assam :

केंद्र ने कहा कि असम में एनआरसी में गलत तरीके से कुछ लोगों को शामिल किये जाने और कुछ लोगों को उससे बाहर रखे जाने का पता लगाने के लिए 20 फीसद नमूना सर्वेक्षण के सत्यपान की अनुमति दी जाए। सरकार ने इस बात पर जोर देत हुए कहा कि लिस्ट में कुछ सुधार और कुछ नामों को जोड़े जाने की आवश्यकता है।

केंद्र ने उच्चतम न्यायालय को बताया कि भारत दुनिया की शरणार्थी राजधानी नहीं बन सकता। हमें एनआरसी में शामिल लोगों के लिए नमूना सत्यापन की प्रक्रिया पर फिर से विचार करने की जरूरत है। मामले की अगली सुनवाई अब 23 जुलाई होगी।

असम के लिए एनआरसी का पहला मसौदा उच्चतम न्यायालय के निर्देश पर 31 दिसंबर 2017 और एक जनवरी 2018 की दरम्यिानी रात को प्रकाशित हुआ था। उस समय 3.29 करोड़ आवेदकों में से 1.9 करोड़ लोगों के नाम इनमें शामिल किए गए थे।

20वीं सदी की शुरुआत में बांग्लादेश से असम में बड़ी संख्या में लोग आए। असम इकलौता राज्य है जहां एनआरसी है जिसे सबसे पहले 1951 में तैयार किया गया था।

नई दिल्ली। केंद्र और असम सरकार ने शुक्रवार को उच्चतम न्यायालय का रुख कर राष्ट्रीय नागरिक पंजी (एनआरसी) को अंतिम रूप देने के लिए तय 31 जुलाई की समयसीमा बढ़ाने का अनुरोध किया। सरकार की तरफ से सुप्रीम कोर्ट में पेश हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि सीमावर्ती इलाकों में कई लोगों के नाम अधिकारियों की मिलीभगत से जोड़े गए हैं। ऐसे में करीब 20 फीसदी नामों के दोबारा सत्यापन के लिए थोड़े समय की जरूरत है। केंद्र ने कहा कि असम में एनआरसी में गलत तरीके से कुछ लोगों को शामिल किये जाने और कुछ लोगों को उससे बाहर रखे जाने का पता लगाने के लिए 20 फीसद नमूना सर्वेक्षण के सत्यपान की अनुमति दी जाए। सरकार ने इस बात पर जोर देत हुए कहा कि लिस्ट में कुछ सुधार और कुछ नामों को जोड़े जाने की आवश्यकता है। केंद्र ने उच्चतम न्यायालय को बताया कि भारत दुनिया की शरणार्थी राजधानी नहीं बन सकता। हमें एनआरसी में शामिल लोगों के लिए नमूना सत्यापन की प्रक्रिया पर फिर से विचार करने की जरूरत है। मामले की अगली सुनवाई अब 23 जुलाई होगी। असम के लिए एनआरसी का पहला मसौदा उच्चतम न्यायालय के निर्देश पर 31 दिसंबर 2017 और एक जनवरी 2018 की दरम्यिानी रात को प्रकाशित हुआ था। उस समय 3.29 करोड़ आवेदकों में से 1.9 करोड़ लोगों के नाम इनमें शामिल किए गए थे। 20वीं सदी की शुरुआत में बांग्लादेश से असम में बड़ी संख्या में लोग आए। असम इकलौता राज्य है जहां एनआरसी है जिसे सबसे पहले 1951 में तैयार किया गया था।