कालाधन बाहर निकालने के लिए की गई नोटबंदी

नई दिल्ली: नोटबंदी के खिलाफ दायर याचिकाओं के जवाब में केन्द्र सरकार ने कहा है कि अर्थव्यवस्था को मजबूती प्रदान करने के लिए 70 साल से पड़े कालेधन को बाहर निकाला जा रहा है। केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दायर किया है। केन्द्र ने कहा है कि ब्लैक मनी का बोझ कम करने का प्रयास किया गया है। देश 70 सालों से ब्लैक मनी का बोझ झेल रहा है जिसे कम करने का प्रयास किया गया है। सरकार ने कैश ट्रांजेक्शन को कम करके उसे डिजिटल करने का प्रयास किया गया है।




केंद्र सरकार ने अपने हलफनामे में कहा है कि दबी हुई ब्लैक मनी बाहर निकालने का प्रयास किया गया है। केंद्र सरकार ने ब्लैक मनी पर काबू करने के लिए एसआईटी का गठन किया। दुनिया भर में जीडीपी का 4 फीसद लेनदेन होता है जबकि भारत में 12 फीसद कैश ट्रांजेक्शन होता है। नकद लेनदेन को डिजिटल ट्रांजेक्शन में बदलने का प्रयास किया जा रहा है।इस पूरी प्रक्रिया में थोड़ी बहुत परेशानी हुई है लेकिन इससे ब्लैक मनी पर काबू किया जा सकेगा। एटीएम मशीन को नए नोट के लिए बनाया जा रहा है और इसके लिए तेजी से काम हो रहा है। आतंकवाद फैलाने के लिए जाली नोट का इस्तेमाल होता था जिस पर इस कार्रवाई के लिए काबू पाया जा सकेगा और साथ ही सैकड़ों करोड़ रु पए के नकली नोट को रोका गया है।



ये तमाम कदम देश की भलाई के लिए उठाया गया है। साथ ही सरकार ने अपने हलफनामे में कहा है कि आरबीआई एक्ट की धारा-26 और बैंकिंग रेग्युलेशन एक्ट की धारा 35 (ए) के तहत सरकार को ये अधिकार है कि वह करंसी का लीगल टेंडर खत्म कर दे। सरकार रोजाना स्थिति पर नजर रख रही है और लोगों को तमाम राहत मुहैया कराया जा रहा है। पुराने नोट से किसानों को बीज आदि खरीदने की छूट दी गई है। सरकार का कहना है कि बेनामी संपत्ति से संबंधित एक्ट में बदलाव किया गया है और साथ ही ब्लैक मनी पर लगाम के लिए एसआईटी का गठन किया गया है। एसआईटी के अलावा ब्लैक मनी को लेकर कानून बनाया गया, विदेशों से कई समझौते हुए हैं साथ ही अब नोट को बैन किया गया है। पूरी प्रक्रिया को गोपनीय रखा गया।