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#Chandrayaan2: ISRO ने रचा इतिहास, ऑर्बिटर से सफलतापूर्वक अलग हुआ लैंडर ‘विक्रम’

Chandrayaan 2 Vikram Lander Isro Orbit Moon Mission India

By रवि तिवारी 
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नई दिल्ली। इसरो (ISRO) के वैज्ञानिकों ने सोमवार यानी दो सितंबर को चंद्रयान-2 (Chandrayaan-2) के ऑर्बिटर से लैंडर ‘विक्रम’ (Lander Vikram) को सफलतापूर्वक अलग करा दिया। इस काम को दोपहर 01 बजकर 15 मिनट पर अंजाम दी गई। चंद्रयान-2 सात सितंबर को चांद पर लैंड करेगा। दो सितंबर की दोपहर 12:45 से 13:45 बजे के बीच चंद्रयान के ऑर्बिटर से लैंडर विक्रम को अलग किया जाएगा। इसकी सफलता के बाद कुछ और चरण पूरे किए जाएंगे।

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ISRO की ओर से जानकारी दी गई 1.15 बजे विक्रम अलग हुआ। लैंडर ‘विक्रम’ (Lander Vikram) सात सितंबर को तड़के डेढ़ बजे से ढाई बजे के बीच चंद्रमा की सतह पर पहुंचेगा। देश के दूसरे चंद्र मिशन चंद्रयान-2 ने चंद्रमा की कक्षा में 20 अगस्त को प्रवेश किया था।

इसरो की ओर से जारी एक बयान के अनुसार ‘विक्रम लैंडर को आज (2 सितंबर, 2019) दोपहर 1:15 बजे चंद्रयान 2 ऑर्बिटर से सफलतापूर्वक अलग कर दिया। विक्रम लैंडर वर्तमान में 119 किमी x 127 किमी की कक्षा में स्थित है। चंद्रयान 2 ऑर्बिटर अपनी मौजूदा कक्षा में चंद्रमा की परिक्रमा करता रहेगा।’

7 तारीख को लैंडिंग

दो सितंबर को लैंडर ‘विक्रम’ ऑर्बिटर से अलग होने के बाद यह सात सितंबर को चांद के दक्षिणी ध्रुव क्षेत्र में ‘सॉफ्ट लैंडिंग’ करेगा. ऐसा करके भारत चांद के दक्षिणी ध्रुव क्षेत्र में पहुंचने वाला दुनिया का पहला देश बन जाएगा। भारत से पहले रूस, अमेरिका और चीन चांद पर पहुंच चुके हैं लेकिन वे चंद्रमा दक्षिणी ध्रुव क्षेत्र में नहीं पहुंच पाए थे। लैंडर के चंद्रमा की सतह पर उतरने के बाद इसके भीतर से ‘प्रज्ञान’ नाम का रोवर (Pragyan Rover) बाहर निकलेगा और अपने 6 पहियों पर चलकर चांद की सतह पर वैज्ञानिक प्रयोग करेगा।

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भारत के मिशन पर दुनिया की टकटकी

चंद्रयान-2 की लैंडिंग पर पूरी दुनिया की नजर है। नासा के पूर्व अंतरिक्ष यात्री डोनाल्ड ए थॉमस ने रविवार को कहा कि पूरी दुनिया इसे टकटकी लगाए देख रही है। हम चंद्रमा के भूमध्य रेखा के पास उतर चुके हैं, लेकिन दक्षिण ध्रुव पर कभी नहीं गए। यह हमारे लिए बेहद खास है, क्योंकि यहां बर्फ मिलने की उम्मीद है। बर्फ मिली तो पानी व उससे ऑक्सीजन मिल मिलने की संभावना है।

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