कोई काल्पनिक किरदार नहीं था शोले का गब्बर सिंह

Gabbar-Singh
कोई काल्पनिक किरदार नहीं था शोले का गब्बर सिंह

Character Of Gabbar Singh Was Inspired From Real Life Dacoit Gabbar Singh

फिल्म शोले में अभिनेता अमजद खान द्वारा निभाया गया गब्बर सिंह का किरदार बॉलीवुड का सबसे चर्चित नकारात्मक किरदार है। लेकिन बहुत कम ही लोग जानते होंगे कि अमदज खान ने जिस गब्बर सिंह को स्लिवर स्क्रीन पर बेहद दुर्दन्त बना दिया था वह कोई काल्पना मात्र नहीं था। गब्बर सिंह द्वारा ठाकुर साहब के हाथों का काटा जाना, तंबाकू खाना और लूट पाट करने की स्क्रिप्ट एक रियल लाइफ स्टोरी से प्रेरित थी। यहां तक की गब्बर सिंह नाम तक असली डाकू का नाम था, जिसे फिल्म के कहानीकार सलीम और जावेद की जोड़ी ने अपनी कलम से इस तरह से ढ़ाला कि वह सिनेमा के जरिए हमेशा के लिए एक फिल्मी किरदार बनकर अमर हो गया।

कौन था असली गब्बर सिंह —

भिंड जिले के डांग गांव में 1926 में साधारण से परिवार में गब्बर सिंह उर्फ गबरा का जन्म हुआ था। गब्बर ने 1955 में अपराध की दुनिया में कदम रखा और उस समय बीहड़ के कुख्यात डकैत कल्याण सिंह गुज्जर के गैंग में शामिल हो गया।

कल्याण गुज्जर के गिरोह में कुछ दिनों तक रहने के बाद गब्बर ने आपसी अनबन के बाद अपना अलग गिरोह बना लिया और वारदातों को अंजाम देने लगा। गब्बर यूं तो सामान्य डकैतों की तरह ही लूट पाट किया करता था, लेकिन उसे सबसे ज्यादा प्रसिद्धी तब मिली जब उसने 116 लोगों की नाक और कान काटकर अपनी कुल देवी को चढ़ाने का प्रण लिया।

बताया जाता है कि गब्बर सिंह को किसी तांत्रिक ने बताया था कि अगर वह 116 लोगों के नाक और कान काटकर अपनी कुल देवी के मंदिर में चढ़ाता है तो गोली उसे छू तक नहीं पाएगी।

तांत्रिक की सलाह पर गब्बर सिंह ने अपना सुरक्षा कवच बनाने के लिए लोगों की नाक कान काटना शुरू कर दिए। जिसके लिए उसने बड़ी संख्या में पुलिस वालों को अपना शिकार बनाया।लोग बताते हैं कि गब्बर ने अपनी कुल देवी को 116 लोगों के नाक कान काट कर चढ़ा दिए थे। गब्बर के इस कारनाम ने उसे एकाएक सुर्खियों में ला दिया। देशभर के अखबारों में उसकी चर्चा थी।

पुलिस के कई जवानों के नाक कान काट चुके गब्बर सिंह को लेकर मध्य प्रदेश पुलिस में भी एक खौफ कायम हो गया था। इलाके में लोग बच्चों को डराने के लिए गब्बर सिंह का नाम लेने लगे थे, क्योंकि गब्बर नाक कान काट लेता था।

पीएम नेहरू के सबसे विश्वासनीय आईपीएस ने किया था गब्बर सिंह का खत्मा —

मध्यप्रदेश के बीहड़ में दहशत का राज चलाने वाले गब्बर सिंह के आतंक को खत्म करने के लिए प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू ने उस समय के सबसे काबिल आईपीएस अधिकारी केएफ रुस्तमजी को भेजा था। केएफ रुस्तमजी केन्द्र सरकार की सिफारिश पर मध्य प्रदेश पुलिस के चीफ बनाए गए थे।

रूस्तमजी को बीहड़ से डाकुओं के आतंक को खत्म करने के मिशन पर ही दिल्ली से मध्य प्रदेश भेजा गया था। प्रधानमंत्री की ओर से मिले इस काम को रुस्तमजी ने पूरी सफलता के साथ अंजाम दिया। कुछ लोग कहते हैं कि रुस्तमजी में गजब की काबलियत थी। आम लोगों के बीच गब्बर का खौफ इतना बड़ा था कि कोई उसके बारे में मुंह खोलने को तैयार नहीं था। दूसरी ओर पुलिस की जद से हमेशा दूर रहे इस डकैत की कोई तस्वीर मौजूद नहीं थी। इसलिए रुस्तमजी ने बड़े डकैतों को खत्म करने के लिए छोटे गिरोहों की मदद ली।

आखिरकार 13 नवंबर 1959 को गब्बर सिंह के गिरोह को चंबल से होकर गुजरने वाले हाइवे से कुछ दूर पर बसे गम का टोला गांव में मध्यप्रदेश पुलिस ने घेर लिया। एक सफल एनकाउंटर में मध्य प्रदेश पुलिस ने गब्बर सिंह को मार गिराया। गब्बर सिंह की पहली तस्वीर पुलिस को उसके एनकाउंटर के बाद मिली, जिसमें उसका चेहरा पूरी तरह से क्षत विक्षत था। बताया जाता है कि गब्बर सिंह की मौत पुलिस दल की ओर से एनकाउंटर में प्रयोग हुए हैंडग्रेनेड से हुई थी।

असली गब्बर सिंह बना गया शोले का किरदार —

फिल्म शोले में दिखाए गए डकैत गब्बर सिंह का पूरा किरदार असली गब्बर सिंह से मिलता जुलता था। यहां तक की गब्बर के डॉयलॉग तक असली गब्बर की कहानी से प्रेरित थे। जैसे 50—50 कोस दूर जब कोई बच्चा रोता है तो मां कहती है बेटा चुप हो जा नहीं तो गब्बर आ जाएगा।

गब्बर सिंह का अंत करने वाले रुस्तमजी को मिला था सम्मान —

केएफ रुस्तमजी को आजाद भारत के सबसे सम्मानित पुलिस अधिकारी के रूप में देखा जाता है। वह एक मात्र ऐसे पुलिस अधिकारी है जिन्हें पद्म विभूषण सम्मान से नवाजा गया। रुस्तमजी के करियर के बारे में बात की जाए तो वह अंग्रेजी हुकूमत के दौर में पुलिस सेवा में आए थे। आजादी के बाद वह प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू के विश्वासपात्र अधिकारियों के रूप में देखे जाते थे। जिस वजह से पं0 नेहरू ने उन्हें अपना मुख्य सुरक्षा अधिकारी भी नियुक्त किया था। वह सात सालों तक पं0 नेहरू के मुख्य सुरक्षा अधिकारी रहे।

बीएसफ के गठन में निभाई अहम भूमिका—

बॉर्डर सिक्योरिटी फोर्सेज यानी बीएसएफ के गठन की पहल केएफ रुस्तमजी ने ही की थी। कुछ समय तक वह बीएसएफ के फाउंडर डायरेक्टर भी रहे। उनके नाम पर आज भी बीएसफ में आयोजन किए जाते हैं। बीएसएफ के अलावा इंड़ो तिब्बत सीमा सुरक्षा बल यानी आईटीबीपी के गठन में भी रुस्तम जी ने अहम भूमिका निभाई थी।

फिल्म शोले में अभिनेता अमजद खान द्वारा निभाया गया गब्बर सिंह का किरदार बॉलीवुड का सबसे चर्चित नकारात्मक किरदार है। लेकिन बहुत कम ही लोग जानते होंगे कि अमदज खान ने जिस गब्बर सिंह को स्लिवर स्क्रीन पर बेहद दुर्दन्त बना दिया था वह कोई काल्पना मात्र नहीं था। गब्बर सिंह द्वारा ठाकुर साहब के हाथों का काटा जाना, तंबाकू खाना और लूट पाट करने की स्क्रिप्ट एक रियल लाइफ स्टोरी से प्रेरित थी। यहां तक की गब्बर सिंह नाम…