चेतो ! वरना बूंद-बूंद को तरसोगे

लखनऊ: क्या होगा कल, यदि हम नहीं बचाएंगे जल। अब यह सवाल हर उस व्यक्ति के लिए अहम होने वाला है, क्योंकि प्राकृतिक संसाधनों के लगातार दोहन के बाद कई ब्लाकों में भूजल का स्तर खतरे के निशान से नीचे उतरने लगा है।




बीते दो सालों में राजधानी का जल स्तर काफी हद तक गिर गया है। जानकारी के मुताबिक दो साल में राजधानी का वॉटर लेवल 21 मीटर नीचे चला गया है। 2015 के सर्वे में राजधानी का वॉटर लेवल 155 मीटर था जबकि मौजूदा समय में सर्वे के दौरान पता चला कि वॉटर लेवल 155 से बढ़कर 176 मीटर पहुँच गया है।




जिसमें सदर और कैंट एरिया के हालात सबसे अधिक चिंताजनक हैं। बताया जा रहा है कि यहाँ भूजल का सबसे अधिक दोहन किया गया हैं। अभी हाल ही में लखनऊ यूनिवरसिटी की ओर से हाल ही में कराये सर्वे में यह बात पता चली है कि अगर जल्द ही जल दोहन पर नियंत्रण नहीं किया गया तो, आने वाले समय में राजधानी को पानी की एक-एक बूंद के लिए तरसना पड़ेगा।

Cheto Varna Bund Bund Ko Tarsoge :

करना होगा घरेलू बोरिंग पर रोक-

सरकार को अब घरो में होने वाले बोरिंग पर रोक लगानी पड़ेगी। अगर इन्हे रोका नहीं गया तो अगले तीन सालों में लखनऊ का भूजल लेवल लगभग समाप्त हो जाएगा। जानकारी के मुताबिक भूजल लेवल का सबसे खराब स्तर सदर और कैंट एरिया में हैं।

लखनऊ: क्या होगा कल, यदि हम नहीं बचाएंगे जल। अब यह सवाल हर उस व्यक्ति के लिए अहम होने वाला है, क्योंकि प्राकृतिक संसाधनों के लगातार दोहन के बाद कई ब्लाकों में भूजल का स्तर खतरे के निशान से नीचे उतरने लगा है। बीते दो सालों में राजधानी का जल स्तर काफी हद तक गिर गया है। जानकारी के मुताबिक दो साल में राजधानी का वॉटर लेवल 21 मीटर नीचे चला गया है। 2015 के सर्वे में राजधानी का वॉटर लेवल 155 मीटर था जबकि मौजूदा समय में सर्वे के दौरान पता चला कि वॉटर लेवल 155 से बढ़कर 176 मीटर पहुँच गया है। जिसमें सदर और कैंट एरिया के हालात सबसे अधिक चिंताजनक हैं। बताया जा रहा है कि यहाँ भूजल का सबसे अधिक दोहन किया गया हैं। अभी हाल ही में लखनऊ यूनिवरसिटी की ओर से हाल ही में कराये सर्वे में यह बात पता चली है कि अगर जल्द ही जल दोहन पर नियंत्रण नहीं किया गया तो, आने वाले समय में राजधानी को पानी की एक-एक बूंद के लिए तरसना पड़ेगा।करना होगा घरेलू बोरिंग पर रोक- सरकार को अब घरो में होने वाले बोरिंग पर रोक लगानी पड़ेगी। अगर इन्हे रोका नहीं गया तो अगले तीन सालों में लखनऊ का भूजल लेवल लगभग समाप्त हो जाएगा। जानकारी के मुताबिक भूजल लेवल का सबसे खराब स्तर सदर और कैंट एरिया में हैं।