Chhath Puja 2018: जाने कब है छठ पूजा और क्या है इसकी पूजन विधि

Chhath Puja 2018: जाने कब है छठ पूजा और क्या है इसकी पूजन विधि
Chhath Puja 2018: जाने कब है छठ पूजा और क्या है इसकी पूजन विधि

लखनऊ। चार दिनों तक चलने वाले सूर्य उपासना का महापर्व छठ नहाय खाय के साथ शुरू होने वाला है। कार्तिक महीने में भगवान सूर्य की पूजा की विशेष परंपरा है, शुक्ल पक्ष में षष्ठी तिथि को छठ पूजा का विशेष विधान है। मुख्य रूप से इस पूजा की शुरूआत बिहार और झारखंड से हुई है हालांकि अब यह देश-विदेश तक फ़ैल चुका है।

Chhath Puja 2018 Date Significance Vrat And Puja Vidhi :

बता दें कि कार्तिक मास में सूर्य अपनी नीच राशी में होता है अतः सूर्य देव की खास पूजा की जाती है। बता दें कि षष्ठी तिथि का सम्बन्ध संतान की आयु से होता है। इस दिन सूर्य देव और षष्ठी की पूजा करने से संतान प्राप्ति और और उसकी आयु रक्षा के लिए वरदान मिलता है। बता दें कि इस बार छठ पूजा 13 नवंबर को की जाएगी।

छठ पूजन विधि

  • कुल मिलाकर यह पर्व चार दिनों तक चलता है।
  • इसकी शुरुआत कार्तिक शुक्ल चतुर्थी से होती है और सप्तमी को अरुण वेला में इस व्रत का समापन होता है।
  • कार्तिक शुक्ल चतुर्थी को “नहा-खा” के साथ इस व्रत की शुरुआत होती है। इस दिन से स्वच्छता की स्थिति अच्छी रखी जाती है।
  • इस दिन लौकी और चावल का आहार ग्रहण किया जाता है।
  • दूसरे दिन को “लोहंडा-खरना” कहा जाता है। इस दिन उपवास रखकर शाम को खीर का सेवन किया जाता है।
  • खीर गन्ने के रस की बनी होती है। इसमें नमक या चीनी का प्रयोग नहीं होता।
  • तीसरे दिन उपवास रखकर डूबते हुए सूर्य को अर्घ्य दिया जाता है। साथ में विशेष प्रकार का पकवान “ठेकुवा” और मौसमी फल चढाएं। अर्घ्य दूध और जल से दिया जाता है।
  • चौथे दिन बिल्कुल उगते हुए सूर्य को अंतिम अर्घ्य दिया जाता है। इसके बाद कच्चे दूध और प्रसाद को खाकर व्रत का समापन किया जाता है।
  • इस बार पहला अर्घ्य 13 नवंबर को संध्या काल में दिया जाएगा और अंतिम अर्घ्य 14 नवंबर को अरुणोदय में दिया जाएगा।

नहीं रख पाते हैं व्रत तो करें ये उपाय

  • व्रत रखने वाले व्यक्ति को भोजन बनाने में सामान जुटाने में सहायता करें।
  • स्वयं भी चार दिनों तक सात्विक रहें।
  • अर्घ्य के समय भगवान सूर्य को जरूर अर्घ्य दें।
  • अंतिम दिन प्रातः व्रती के चरण स्पर्श करके उसका आशीर्वाद लें और प्रसाद ग्रहण करें।
  • अंतिम दो दिनों में अर्घ्य के समय “ॐ आदित्याय नमः” का 108 बार जाप करें।
लखनऊ। चार दिनों तक चलने वाले सूर्य उपासना का महापर्व छठ नहाय खाय के साथ शुरू होने वाला है। कार्तिक महीने में भगवान सूर्य की पूजा की विशेष परंपरा है, शुक्ल पक्ष में षष्ठी तिथि को छठ पूजा का विशेष विधान है। मुख्य रूप से इस पूजा की शुरूआत बिहार और झारखंड से हुई है हालांकि अब यह देश-विदेश तक फ़ैल चुका है। बता दें कि कार्तिक मास में सूर्य अपनी नीच राशी में होता है अतः सूर्य देव की खास पूजा की जाती है। बता दें कि षष्ठी तिथि का सम्बन्ध संतान की आयु से होता है। इस दिन सूर्य देव और षष्ठी की पूजा करने से संतान प्राप्ति और और उसकी आयु रक्षा के लिए वरदान मिलता है। बता दें कि इस बार छठ पूजा 13 नवंबर को की जाएगी। छठ पूजन विधि
  • कुल मिलाकर यह पर्व चार दिनों तक चलता है।
  • इसकी शुरुआत कार्तिक शुक्ल चतुर्थी से होती है और सप्तमी को अरुण वेला में इस व्रत का समापन होता है।
  • कार्तिक शुक्ल चतुर्थी को "नहा-खा" के साथ इस व्रत की शुरुआत होती है। इस दिन से स्वच्छता की स्थिति अच्छी रखी जाती है।
  • इस दिन लौकी और चावल का आहार ग्रहण किया जाता है।
  • दूसरे दिन को "लोहंडा-खरना" कहा जाता है। इस दिन उपवास रखकर शाम को खीर का सेवन किया जाता है।
  • खीर गन्ने के रस की बनी होती है। इसमें नमक या चीनी का प्रयोग नहीं होता।
  • तीसरे दिन उपवास रखकर डूबते हुए सूर्य को अर्घ्य दिया जाता है। साथ में विशेष प्रकार का पकवान "ठेकुवा" और मौसमी फल चढाएं। अर्घ्य दूध और जल से दिया जाता है।
  • चौथे दिन बिल्कुल उगते हुए सूर्य को अंतिम अर्घ्य दिया जाता है। इसके बाद कच्चे दूध और प्रसाद को खाकर व्रत का समापन किया जाता है।
  • इस बार पहला अर्घ्य 13 नवंबर को संध्या काल में दिया जाएगा और अंतिम अर्घ्य 14 नवंबर को अरुणोदय में दिया जाएगा।
नहीं रख पाते हैं व्रत तो करें ये उपाय
  • व्रत रखने वाले व्यक्ति को भोजन बनाने में सामान जुटाने में सहायता करें।
  • स्वयं भी चार दिनों तक सात्विक रहें।
  • अर्घ्य के समय भगवान सूर्य को जरूर अर्घ्य दें।
  • अंतिम दिन प्रातः व्रती के चरण स्पर्श करके उसका आशीर्वाद लें और प्रसाद ग्रहण करें।
  • अंतिम दो दिनों में अर्घ्य के समय "ॐ आदित्याय नमः" का 108 बार जाप करें।