कल से शुरू होगा छठ पूजा का पर्व, इन सामग्रियों को पहले से जुटा लें

Chhath Puja festival
कल से शुरू होगा छठ पूजा का पर्व, इन सामग्रियों को पहले से जुटा लें

नई दिल्ली। यूपी, बिहार के साथ साथ पूरे देश में मनाई जाने वाली छठ पूजा का पर्व 31 अक्टूबर से शुरू हो रहा है। चार दिनो तक चलने वाली इस पूजा में सूर्य षष्ठी उत्सव 2 नवंबर को होगा जबकि पूजा का समापन 3 नवंबर को सुबह प्रातः कालीन अर्घ्य के साथ किया जायेगा। 31 अक्टूबर यानी कल व्रत की शुरूवात नहाय-खाए विधान के साथ सम्पन्न होगी, 1 नवम्बर शुक्रवार को खरना, 2 नवंबर शनिवार को संध्याकालीन अर्घ्य व 3 नवंबर रविवार को प्रातःकालीन अर्घ्य के बाद ये व्रत पूरा होगा।

Chhath Puja Festival Will Start Tomorrow Gather These Materials In Advance :

आपको बता दें कि छठ पूजा को वैज्ञानिक दृष्टिकोण से भी काफी लाभकारी माना गया है, ऐसी मान्यता मानी जाती है कि सीता, कुंती व द्रौपदी जी ने भी इस व्रत को रखा था। इस पूजा में सूर्य देवता की पूजा की जाती है, जो भी महिलाएं व्रत रहती हैं वह नदी-तालाब में खड़े होकर सूर्य देव को अर्घ्य देती हैं। ये व्रत संतान प्राप्ति और संतान की मंगलकामना के लिए रखा जाता है.

पहले दिन नहाय खाय से शुरूवात होगी, इस दौरान व्रती नये वस्त्र धारण करती है फिर शाकाहारी भोजन करती हैं, जब व्रती खा लेती हैं उसके बाद ही घर के अन्य सदस्य खाना खाते हैं। दूसरे दिन खरना होता है, इस दिन महिलाएं व पुरूष दोनो व्रत रखते हैं, इसी दिन शाम को प्रसाद बनाया जाता है। तीसरे दिन निर्जला व्रत रहा जाता है और सांझ का अर्घ्य दिया जाता है, इस दौरान नदी, तालाब में खड़े होकर सूर्य को अर्घ्य दिया जाता है। आखिरी दिन यानी सप्तमी की सुबह सुर्योदय के समय भी तीसरे दिन की ही तरह पूजा की जाती है, फिर पूजा के बाद प्रसाद बांटा जाता है।

छठ पूजा सामग्री

– छठ पूजा का प्रसाद रखने के लिए बांस की दो बड़ी-बड़ी टोकरियां खरीद लें.

– बांस या फिर पीतल के सूप.

– दूध तथा जल के लिए एक ग्लास, एक लोटा और थाली.

– 5 गन्ने, जिसमें पत्ते लगे हों.

– शकरकंदी और सुथनी.

– पान और सुपारी.

– हल्दी, मूली और अदरक का हरा पौधा.

– बड़ा वाला मीठा नींबू, शरीफा, केला और नाशपाती.

– पानी वाला नारियल और मिठाई.

– चावल, सिंदूर, दीपक, शहद और धूप.

– गुड़, गेहूं, चावल का आटा और ठेकुआ

– अपने लिए नए वस्त्र जैसे सूट या साड़ी.

नई दिल्ली। यूपी, बिहार के साथ साथ पूरे देश में मनाई जाने वाली छठ पूजा का पर्व 31 अक्टूबर से शुरू हो रहा है। चार दिनो तक चलने वाली इस पूजा में सूर्य षष्ठी उत्सव 2 नवंबर को होगा जबकि पूजा का समापन 3 नवंबर को सुबह प्रातः कालीन अर्घ्य के साथ किया जायेगा। 31 अक्टूबर यानी कल व्रत की शुरूवात नहाय-खाए विधान के साथ सम्पन्न होगी, 1 नवम्बर शुक्रवार को खरना, 2 नवंबर शनिवार को संध्याकालीन अर्घ्य व 3 नवंबर रविवार को प्रातःकालीन अर्घ्य के बाद ये व्रत पूरा होगा। आपको बता दें कि छठ पूजा को वैज्ञानिक दृष्टिकोण से भी काफी लाभकारी माना गया है, ऐसी मान्यता मानी जाती है कि सीता, कुंती व द्रौपदी जी ने भी इस व्रत को रखा था। इस पूजा में सूर्य देवता की पूजा की जाती है, जो भी महिलाएं व्रत रहती हैं वह नदी-तालाब में खड़े होकर सूर्य देव को अर्घ्य देती हैं। ये व्रत संतान प्राप्ति और संतान की मंगलकामना के लिए रखा जाता है. पहले दिन नहाय खाय से शुरूवात होगी, इस दौरान व्रती नये वस्त्र धारण करती है फिर शाकाहारी भोजन करती हैं, जब व्रती खा लेती हैं उसके बाद ही घर के अन्य सदस्य खाना खाते हैं। दूसरे दिन खरना होता है, इस दिन महिलाएं व पुरूष दोनो व्रत रखते हैं, इसी दिन शाम को प्रसाद बनाया जाता है। तीसरे दिन निर्जला व्रत रहा जाता है और सांझ का अर्घ्य दिया जाता है, इस दौरान नदी, तालाब में खड़े होकर सूर्य को अर्घ्य दिया जाता है। आखिरी दिन यानी सप्तमी की सुबह सुर्योदय के समय भी तीसरे दिन की ही तरह पूजा की जाती है, फिर पूजा के बाद प्रसाद बांटा जाता है। छठ पूजा सामग्री - छठ पूजा का प्रसाद रखने के लिए बांस की दो बड़ी-बड़ी टोकरियां खरीद लें. - बांस या फिर पीतल के सूप. - दूध तथा जल के लिए एक ग्लास, एक लोटा और थाली. - 5 गन्ने, जिसमें पत्ते लगे हों. - शकरकंदी और सुथनी. - पान और सुपारी. - हल्दी, मूली और अदरक का हरा पौधा. - बड़ा वाला मीठा नींबू, शरीफा, केला और नाशपाती. - पानी वाला नारियल और मिठाई. - चावल, सिंदूर, दीपक, शहद और धूप. - गुड़, गेहूं, चावल का आटा और ठेकुआ - अपने लिए नए वस्त्र जैसे सूट या साड़ी.