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धारा 370 की बहाली पर कश्मीर के राजनीतिक दल एकजुट, चिदंबरम ने किया स्वागत

Chidambaram Welcomed Kashmirs Political Parties On The Restoration Of Article 370

By सोने लाल 
Updated Date

नई दिल्ली। जम्मू-कश्मीर से धारा 370 हटाए जाने का मामला फिर से एक बार गरम होता दिखाई दे रहा है। यहां की सभी बड़ी और राजनीतिक पार्टियो ने ने धारा 370 की बहाली के लिए एक साथ आने का ऐलान किया है। जम्मू-कश्मीर के सियासी दलों ने शनिवार को इसका घोषणा पत्र जारी किया। आपको बता दें कि धारा 370 एक ऐसी धारा थी, जो भारत के जम्मू -कश्मीर के नागरिकों को एक विशेष दर्जा और अधिकार प्राप्त करवाती थी। धारा 370 केवल जम्मू और कश्मीर के लोगों के लिए विशेष रूप से बनाई गयी एक विशेष धारा थी। अस्थाई, संक्रमण कालीन और मुख्य उपबन्ध सम्बन्धी भाग 21 का धारा 370 सम्मानित जवहार लाल नेहरू के हस्तक्षेपों के द्वारा तैयार किया गया था। जो जम्मू-कश्मीर से पूर्ण रूप से हटा दी गई है।

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जम्मू-कश्मीर के राजनीतिक दलों की ओर से जारी संयुक्त बयान में धारा 370 और राज्य की पूर्व स्थिति बहाल करने मांग की गई है। दलों की इस घोषणा का कांग्रेस नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री पी. चिदंबरम ने स्वागत किया है। उन्होंने उन 6 दलों को सलाम किया है जो केंद्र सरकार के फैसले के खिलाफ एकजुट हुए हैं।

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चिदंबरम ने रविवार को एक ट्वीट करते हुए लिखा,  धारा 370 की बहाली के लिए एकजुट हुईं मुख्यधारा की पार्टियों की एकता और जज्बे को सलाम। मेरी उनसे अपील है कि वे अपनी मांग के लिए डटकर खड़े हों। स्वयंभू राष्ट्रवादियों की आलोचनाओं को नजरंदाज करें जो इतिहास पढ़ते नहीं हैं बल्कि इतिहास को दोबारा लिखने की कोशिश करते हैं। देश के संविधान में राज्यों के विशेष प्रावधानों के कई उदाहरण हैं। सरकार अगर विशेष प्रावधानों का विरोध करेगी तो नगा मुद्दे को कैसे निपटाया जा सकता है?

बता दें, धारा 370 की बहाली के लिए दलों ने जो घोषणा पत्र बनाया है उसमें नेशनल कॉन्फ्रेंस के फारूक अब्दुल्ला, पीडीपी की महबूबा मुफ्ती, जेकेपीसीसी के जीए मीर, माकपा के एमवाई तारीगामी, जेकेपीसी के सज्जाद गनी लोन, जेकेएएनसी के मुजफ्फर शाह के नाम शामिल हैं।

इन दलों के संयुक्त बयान में कहा गया है कि केंद्र सरकार के फैसले के बाद से राजनीतिक दलों ने बड़ी मुश्किल से बुनियादी स्तर की बातचीत करने की कोशिश की है। इस बैठक में एक प्रस्ताव पास किया गया है। बयान में कहा गया है कि 5 अगस्त 2019 की घटना ने केंद्र सरकार और जम्मू-कश्मीर के रिश्ते को पूरी तरह से बदल दिया है।

संयुक्त बयान में कहा गया है कि यह जम्मू-कश्मीर के शांति प्रिय लोगों के लिए परीक्षा की घड़ी है। अपनी मांग उठाने के लिए एकजुट हुए नेताओं ने कहा है कि हम सभी संविधान के तहत जम्मू-कश्मीर का विशेष दर्जा बहाल करने के लिए सामूहिक रूप से लड़ने के लिए अपनी प्रतिबद्धता दोहराते हैं।

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