केशव की कृपा से दागी इंजीनियर बना यूपीआरएनएन का एमडी

लखनऊ। सियासत में सब जायज है। कल तक जिनके दाग आंखों में चुभ रहे थे आज वही दागी आंखों के तारे बन गए हैं। हम बात कर रहे हैं यूपीडा के मुख्य अभियंता विश्व दीपक की जिन्हें मंगलवार को उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने अपने विभाग के अंतर्गत आने वाले यूपी राजकीय निर्माण निगम (UPRNN) के कार्यवाहक प्रबंध निदेशक का अतिरिक्त कार्यभार सौंपा गया है। विश्व दीपक वही इंजीनियर हैं जिनकी देखरेख में बने लखनऊ आगरा एक्सप्रेसवे के निर्माण में हुए भ्रष्टाचार की जांच योगी आदित्यनाथ सरकार करवा रही है।

मुख्य अभियंता विश्व दीपक को लोक निर्माण विभाग से प्रतिनियुक्ति पर यूपीडा (यूपी एक्सप्रेसवेज औद्योगिक विकास प्राधिकरण) में भेजा गया था। यूपीडा वही प्राधिकरण है, जिसका गठन अखिलेश यादव ने अपने ड्रीम प्रोजेक्ट लखनऊ आगरा एक्सप्रेस वे के निर्माण की देख रेख के लिए अपने भरोसेमंद नौकरशाहों की सलाह पर किया था।

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दूसरी ओर केशव प्रसाद मौर्य वही नेता है जिन्होंने विपक्ष में रहते अखिलेश यादव के इस ड्रीम प्रोजेक्ट में भ्रष्टाचार होने की बात कही थी। उस समय मौर्य यूपी बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष हुआ करते थे और उन्होंने न गुंडाराज न भ्रष्टाचार जैसा चुनावी नारा दिया था। लेकिन अब उप मुख्यमंत्री बन चुके मौर्य को न तो अपना नारा याद है और न ही भ्रष्टाचार करने वालों के चहरे। वे अपने द्वारा ही खोले गए भ्रष्टाचार में संलिप्त रहे इंजीनियर को ईनाम देते नजर आ रहे हैं।

अगर केशव प्रसाद मौर्या के पुराने दावों की ही बात करें तो अखिलेश यादव के ड्रीम प्रोजेक्ट में सैकड़ों करोड़ का भ्रष्टाचार हुआ। एक्सप्रेसवे के निर्माण में जमीनों के अधिग्रहण से लेकर टेंडर और निर्माण में हर स्तर पर भ्रष्टाचार की जांच करवाने के दावे को पूरा करते हुए, सत्ता में आते ही बीजेपी एक्सप्रेस वे की जांच शुरू हो गई। योगी सरकार द्वारा करवाई जा रही आगरा एक्सप्रेसवे के भ्रष्टाचार के स्टेटस का तो अभी कुछ अता पता नहीं है लेकिन उसमें संलिप्त लोगों धीरे—धीरे क्लीन चिट मिलना शुरू हो गई है।

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विश्व दीपक की भूमिका हजारों करोड़ के भ्रष्टाचार के मामले में न केवल संदिग्ध है बल्कि प्रदेश सरकार उसकी जांच भी करवा रही है। ऐसे में उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य द्वारा उन्हें यूपीआरएनएन जैसी शीर्ष निर्माण इकाई का प्रबंध निदेशक बनाया जाना दाल में कुछ काले जैसा प्रतीत होता है। दूसरे शब्दों में कहे तो केशव प्रसाद मौर्य के इस फैसले से आगरा एक्सप्रेस वे में हुए भ्रष्टाचार की जांच पूरी होने से पहले ही संदेह के घेरे में आ गई है।

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