चीन ने बनाया दुनिया का सबसे बड़ा टेलिस्कोप, खोजेगा एलियन्स का रहस्य

नई दिल्ली। चीन ने पिछले दो दशकों में इतना शक्तिशाली होकर उभरा है कि वह अपनी तकनीकी काबलियत के दम पर दुनिया के सबसे ताकतवर देश अमेरिका तक को चैलेंज करने को तैयार है। विकास के नए आयाम स्थापित करने के बाद चीन अब अंतरिक्ष विज्ञान के क्षेत्र में सबसे आगे निकलने की कोशिश में है। इसी प्रतियोगिता में खुद को आगे खड़ा करने के लिए चीन ने एक विशेष टेलिस्कोप का निर्माण किया है। इस टेलिस्कोप का आकार फुटबाल के 30 मैदानों के बराबर है। जिसका अपर्चर 500 मीटर का है।




चीनी समाचार एजेन्सी के मुताबिक इस टेलिस्कोप ने रविवार से काम करना शुरू किया है। इस टेलिस्कोप को बनाने का काम चीन की राष्ट्रीय अतंरिक्षीय शोध संस्थान (एनएओ) के वैज्ञानिकों की ओर से किया गया है। वैज्ञानिकों ने इस टेलिस्कोप का नाम फास्ट (फाइव हंडरेड मीटर अपर्चर स्फेरिकल रेडियो टेलीस्कोप) रखा है। फास्ट के निर्माण की लगात 1800 लाख डॉलर बताई गई है। जिसे चीन के पिंगटेंग काउंटी के गुंईझाउ प्रोविंस में पहाड़ियों के बीच स्थापित किया गया है। इसे दुनिया की सबसे बड़ी सिंगल डिस्क रेडियो टेलिस्कोप करार दिया गया है। जिसे 4450 रिफ्लैक्ट पैनलस् को जोड़कर बनाया गया है, जिसकी सेन्सटीविटी दोगुनी है।

चीन के खगोल वैज्ञानिकों को उम्मीद है कि वे अपने इस प्रयास से छह दशक पुराने एलियन्स सभ्यता से जुड़े उस रहस्य को खोज निकालेंगे जिसमें उनके पृथ्वी की मानव सभ्यता से ज्यादा विकसित होने के दावे होते रहे हैं। हाल ही में रूस के एक रेडियो टेलिस्कोप स्टेशन ने एलियन्स के सिगनल मिलने के दावे किए ​थे, लेकिन उन्होंने इसकी आधिकारिक घोषणा के लिए पहले ​किसी पुख्ता निष्कर्ष तक पहुंचने का इंतजार करने की बात कही थी।




अपने वैज्ञानिकों की इस उपलब्धी के लिए चीन के प्रधानमंत्री शी जिनपिंग ने अपने वैज्ञानिकों का मनोबल बढ़ाने के लिए शुभकामना पत्र भी जारी किया है। वहीं एनएओ को चीफ यान जूं ने कहा कि यह टेलिस्कोप अंतरिक्ष में चीन की शोधों के ​लिए एक मील का पत्थर साबित होगा। विश्व के शीर्ष टेलिस्कोपों में गिना जाने वाला यह टेलिस्कोप आने वालो दो दशकों तक अपनी पहचान बनाए रखने में कामयाब रहेगा।

चीन की समाचार एजेन्सी के माने तो इस टेलिस्कोप के उपयुक्त पर्यावरण तैयार करने के लिए 10000 स्थानीय नागरिकों को दूसरी जगहों पर बसाया गया है। ऐसा कहा जा रहा है कि इस टेलिस्कोप के साथ बने शोधकेन्द्र को संचालित करने के लिए आसपास के वतावरण का शांत होना बेहद जरूरी है।

आपको बता दें कि अपने विकास की नुमाइश करने के लिए चीन 2020 तक पृथ्वी की कक्षा में अपना स्पेश सेन्टर स्थापित करने का प्रयास कर रहा है। जल्द ही चीन एक मानवयुक्त स्पेसक्राफ्ट चन्द्रमा पर भी भेजने वाला है।