टूटेगी चीन की कमर: वीके सिंह बोले-आर्थिक रूप से चोट पहुंचाने की जरूरत

v k singh
टूटेगी चीन की कमर: वीके सिंह बोले-आर्थिक रूप से चोट पहुंचाने की जरूरत

नई दिल्ली। भारत-चीन के बीच तनाव बढ़ाता जा रहा है। भारत सरकार चीन की कमर तोड़ने के लिए चीनी उपकरणों पर प्रतिबंध लगाने की तैयारी में है। इस बीच सड़क परिवहन और राजमार्ग राज्यमंत्री और पूर्व सेनाध्यक्ष जनरल वीके सिंह ने कहा कि युद्ध एक अंतिम विकल्प है।

Chinas Waist Will Be Broken Vk Singh Said Need To Be Hurt Financially :

उन्होंने कहा कि चीन की धोखाबाजी ने दोनों देशों के बीच विश्वास में कमी पैदा की है। चीन को सबक सिखाने के लिए कई और रास्ते हैं। उनमें से एक चीन का आर्थिक रूप से बहिष्कार करना है। वीके सिंह ने बताया कि चीन को सबसे पहले आर्थिक रूप से नुकसान पहुंचान बहुत जरूरी है।

इसके लिए वहां के सामानों का बहिष्कार करना जरूरी है। जब बाकी चीजें असफल हो जाती हैं, तब आप युद्ध का विकल्प चुनते हो। एक अखबार से बातचीत में उन्होंने कहा कि गलवां घाटी में जमीनी हालात भारतीय सैनिकों के नियंत्रण में है और कोई घुसपैठ नहीं हुई है। जहां तक पीपी 14 का संबंध है, वहां कोई घुसपैठ नहीं हुई है।

चीनी सैनिक हर साल स्थानांतरित करने की कोशिश करते हैं, लेकिन हम हर बार उन्हें वापस भेज देते हैं। वहीं, पैंगोंग सो में ऐसे हालात हमेशा नहीं होते हैं। गर्मियों और सर्दी के मौसम में कभी कभार ऐसी स्थिति पैदा हो जाती है।

 

नई दिल्ली। भारत-चीन के बीच तनाव बढ़ाता जा रहा है। भारत सरकार चीन की कमर तोड़ने के लिए चीनी उपकरणों पर प्रतिबंध लगाने की तैयारी में है। इस बीच सड़क परिवहन और राजमार्ग राज्यमंत्री और पूर्व सेनाध्यक्ष जनरल वीके सिंह ने कहा कि युद्ध एक अंतिम विकल्प है। उन्होंने कहा कि चीन की धोखाबाजी ने दोनों देशों के बीच विश्वास में कमी पैदा की है। चीन को सबक सिखाने के लिए कई और रास्ते हैं। उनमें से एक चीन का आर्थिक रूप से बहिष्कार करना है। वीके सिंह ने बताया कि चीन को सबसे पहले आर्थिक रूप से नुकसान पहुंचान बहुत जरूरी है। इसके लिए वहां के सामानों का बहिष्कार करना जरूरी है। जब बाकी चीजें असफल हो जाती हैं, तब आप युद्ध का विकल्प चुनते हो। एक अखबार से बातचीत में उन्होंने कहा कि गलवां घाटी में जमीनी हालात भारतीय सैनिकों के नियंत्रण में है और कोई घुसपैठ नहीं हुई है। जहां तक पीपी 14 का संबंध है, वहां कोई घुसपैठ नहीं हुई है। चीनी सैनिक हर साल स्थानांतरित करने की कोशिश करते हैं, लेकिन हम हर बार उन्हें वापस भेज देते हैं। वहीं, पैंगोंग सो में ऐसे हालात हमेशा नहीं होते हैं। गर्मियों और सर्दी के मौसम में कभी कभार ऐसी स्थिति पैदा हो जाती है।