लखनऊ की चिटफंड कंपनी कर रही फर्जी एफडीआर का खेल

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लखनऊ की चिटफंड कंपनी कर रही फर्जी एफडीआर का खेल

लखनऊ। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में फर्जी एफडीआर बनाने का खेल अर्से से चल रहा है। अब इस खेल से जुड़ा एक मामला बरेली जिले से सामने आया है। यहां बीसलपुर-बरेली मार्ग का निर्माण अधूरा छोड़ने और फर्जी एफडीआर जमा करने वाली एवरग्रीन कंपनी पर शिकंजा कसना शुरू हो गया है। इस पूरे खेल के तार लखनऊ की चिटफंड कंपनी चार्टर्ड मर्चेटाइल एमबी लिमिटेड कंपनी से जुड़े हैं। तीन साल पहले इसी कंपनी की फर्जी एफ़डीआर के चलते अमेठी में पीडबल्यूडी के एक अधिकारी पर कार्रवाई हुई थी।

Chit Fund Company Lucknow Froud :

दरअसल, केंद्रीय सड़क मार्ग निधि योजना के तहत पीडब्ल्यूडी ने पीलीभीत-बरेली के बीच करीब 15 किलोमीटर मार्ग के निर्माण को लखनऊ की एवरग्रीन कंपनी से अनुबंध किया था। लागत 24.34 करोड़ थी। अनुबंध के दौरान अधिकारियों ने कंपनी से शेड्यूल बैंक की एफडीआर लगाने के स्थान पर लखनऊ के चार्टर्ड मर्चेटाइल बैंक की पांच करोड़ रुपये की एफडीआर लगा दी। इसके साथ ही अनुबंध के मुताबिक 1.2 करोड़ रुपये के स्थान पर 1.66 करोड़ मोबलाइजेशन और 2.43 करोड़ के स्थान पर 3.50 करोड़ मशीनरी एडवांस के रूप में एवरग्रीन कंपनी को भुगतान कर दिए। इतना ही नहीं, अनुबंध समाप्त होने के दो वर्ष बाद भी 50 फीसद कार्य पूरा हो सका।

ऐसे हुआ खुलासा-

तीन साल बाद सड़क निर्माण आधा अधूरा छोड़कर एवरग्रीन कंपनी फरार हो गई। सड़क की गुणवत्ता काफी खराब निकली। सड़क पूरी तरह उखड़ गई। इस पर मुख्य अभियंता राकेश राजवंशी ने अनुबंध निरस्त कर कंपनी को ब्लैक लिस्ट कर दिया। उन्होंने जांच कराई तो पांच करोड़ की एफडीआर नॉन शेड्यूल बैंक की होना पता चला। मामले की सूचना शासन को भेजने पर उप मुख्यमंत्री व पीडब्ल्यूडी मंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने कंपनी के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज करने के निर्देश दिए। तब पीलीभीत के एक्सईएन ने एवरग्रीन कंपनी के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई।

लखनऊ। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में फर्जी एफडीआर बनाने का खेल अर्से से चल रहा है। अब इस खेल से जुड़ा एक मामला बरेली जिले से सामने आया है। यहां बीसलपुर-बरेली मार्ग का निर्माण अधूरा छोड़ने और फर्जी एफडीआर जमा करने वाली एवरग्रीन कंपनी पर शिकंजा कसना शुरू हो गया है। इस पूरे खेल के तार लखनऊ की चिटफंड कंपनी चार्टर्ड मर्चेटाइल एमबी लिमिटेड कंपनी से जुड़े हैं। तीन साल पहले इसी कंपनी की फर्जी एफ़डीआर के चलते अमेठी में पीडबल्यूडी के एक अधिकारी पर कार्रवाई हुई थी। दरअसल, केंद्रीय सड़क मार्ग निधि योजना के तहत पीडब्ल्यूडी ने पीलीभीत-बरेली के बीच करीब 15 किलोमीटर मार्ग के निर्माण को लखनऊ की एवरग्रीन कंपनी से अनुबंध किया था। लागत 24.34 करोड़ थी। अनुबंध के दौरान अधिकारियों ने कंपनी से शेड्यूल बैंक की एफडीआर लगाने के स्थान पर लखनऊ के चार्टर्ड मर्चेटाइल बैंक की पांच करोड़ रुपये की एफडीआर लगा दी। इसके साथ ही अनुबंध के मुताबिक 1.2 करोड़ रुपये के स्थान पर 1.66 करोड़ मोबलाइजेशन और 2.43 करोड़ के स्थान पर 3.50 करोड़ मशीनरी एडवांस के रूप में एवरग्रीन कंपनी को भुगतान कर दिए। इतना ही नहीं, अनुबंध समाप्त होने के दो वर्ष बाद भी 50 फीसद कार्य पूरा हो सका।

ऐसे हुआ खुलासा-

तीन साल बाद सड़क निर्माण आधा अधूरा छोड़कर एवरग्रीन कंपनी फरार हो गई। सड़क की गुणवत्ता काफी खराब निकली। सड़क पूरी तरह उखड़ गई। इस पर मुख्य अभियंता राकेश राजवंशी ने अनुबंध निरस्त कर कंपनी को ब्लैक लिस्ट कर दिया। उन्होंने जांच कराई तो पांच करोड़ की एफडीआर नॉन शेड्यूल बैंक की होना पता चला। मामले की सूचना शासन को भेजने पर उप मुख्यमंत्री व पीडब्ल्यूडी मंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने कंपनी के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज करने के निर्देश दिए। तब पीलीभीत के एक्सईएन ने एवरग्रीन कंपनी के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई।