चित्रकूटः दबंग ने खलिहान की जमीन बेंचा, पुलिस भी कुछ नहीं कर पाई

चित्रकूट। उत्तर प्रदेश में चित्रकूट जिले में इस समय सत्ता दल से जुड़े दबंग ग्राम समाज की जमीन कब्जियाने और उसे बेंचने के अभियान में जुटे हैं। लेकिन प्रशासन और पुलिस उनके खिलाफ कोई भी कार्रवाई कर सकने में अक्षम है। सदर तहसील के करारी गांव में हाल ही में गांव के एक दबंग ने खलिहान की जमीन कुछ दलितों को बेंच झार-झाखड़ लगवा कर कब्जा करा दिया। ग्राम प्रधान की शिकायत पर पहुंचे पुलिस कर्मी और राजस्व अधिकारी सिर्फ बयान दर्ज कर बैरंग वापस हो गए।




सदर तहसील के करारी गांव में बस्ती से लगी ग्राम समाज की भूमि गाटा संख्या-454 रकबा-0.121 हे0 खलिहान में दर्ज है, जिसमें गांव के किसान दो फसली खलिहान किया करते थे। इधर करीब दस साल से इस भूखंड़ में खलिहान न होने पर गांव के दबंगों की नजर टेढ़ी हो गई। पहले बिरवाही रूंध कर इसमें साग-भाजी और सब्जी उगाई, अब अपनी पैतृक भूमि बताकर शिवबरन सिंह ने उसे गांव के दलित छोटा, देशराज, गोरेलाल व मोतीलाल को पचास हजार रुपये में बेंच दिया। जब क्रेता गण झार-झांखड़ लगाकर निर्माण करने लगे, तब गांव वालों को पता चला कि यह जमीन बिक चुकी है।




ग्राम प्रधान कोदा प्रसाद ने इसकी शिकायत तहसीलदार सदर से 8 नवंबर को की, उन्होंने राजस्व निरीक्षक और भरतकूप पुलिस चौकी को संयुक्त आदेश जारी कर अवैध कब्जा हटवाने को कहा, लेकिन आदेश के 12 दिन बाद पहुंची पुलिस टीम और राजस्व लेखपाल अवैध कब्जा तो नहीं हटा पाए, सिर्फ ग्राम प्रधान व दबंग के बयान दर्ज कर खाना पूरी कर बैरंग वापस चले गए। उनके वापस होते ही दबंग ने ग्राम प्रधान को जान से मारने की धमकी देने लगा। गांव के लोग बताते हैं कि दबंग सत्ता पक्ष से जुड़ा हुआ है।

ग्राम प्रधान कोदा प्रसाद ने बताया कि ‘राजस्व अभिलेखों में यह भूखंड़ खलिहान में दर्ज है, इसके पूर्व कई किसान इसमें दो फसली खलिहान किया करते थे, लेकिन पिछले कुछ सालों से यह दबंग भूखंड़ में सब्जी की खेती कर रहा है, अब उसे बेंच लिया है।’ गांव के जुगुल किशोर रैदास ने बताया कि ‘यह सच है कि लंबरदार ने जमीन बेंची है, जांच में आई पुलिस ने पंचनामा में उससे जबरन दस्तखत करवा लिया है और कब्जा भी नहीं हटवाया।’




गांव के पूर्व प्रधान शिवकुमार वर्मा का कहना है कि ‘यह सार्वजनिक भूमि है, इसे बेंचने का हक किसी को नहीं है। यदि अवैध कब्जा न हटा तो खून-खराबा की नौबत आ सकती है।’ उध्र, जब ग्राम समाज की भूमि के विक्रेता शिवबरन सिंह से इस संवाददाता ने फोन पर मसले की जानकारी चाही तो वह बौखला गया और गुस्से में बोला कि ‘यह जमीन तहसीलदार के ‘बाप’ की नहीं है, जो कब्जा हटाने का आदेश दिया है। इसमें उनका पीढि़यों से खलिहान रहा है, चाहे हम इसमें सब्जी उगाए या फिर बेंचे, किसी से क्या मतलब।’ हालांकि पुलिस में दर्ज कराए बयान में इसने स्वीकार किया कि सरकारी जमीन है, बेंचेगे नहीं, लेकिन उसके उपरोक्त लहजे से साबित है कि उसकी नीयत ठीक नहीं है।




इस बावत जब हल्का लेखपाल हरी प्रसाद कुशवाहा से पूंछा गया तो उनका कहना था कि ‘करारी गांव में आज भी लंबरदारी प्रथा है, अगर उन्होंने विरोध किया तो अपमान सहें या जान जोखिम में डालें।’ उन्होंने बताया कि ‘कुछ दिन पूर्व ही गांव में जाकर खनिज अधिकारी शैलेन्द्र सिंह ने अवैध बालू खनन पर बागै नदी में छापा डाला था, तब इन्हीं दबंगों ने उन्हें घेर कर पीटा और बंधक बना लिया था।’

बाँदा से आर जयन की रिपोर्ट