वाह री यूपी पुलिस, निर्दोषों को ही भेज दिया जेल

चित्रकूट: बिल्कुल फिल्मी स्टाइल, ‘मैं जिंदा हूं, मुझे पति ने नहीं मारा!’ यह आवाज बुधवार को जब मुख्य दंड़ाधिकारी कर्वी की न्यायालय में चीख-चीख कर गूंजी तो वहां तमाशबीनों का मजमा लग गया। सैकड़ों की तादाद में वादकारी उस महिला को निहारने लगे, जिसे डेढ़ माह पहले पुलिस ने मृत घोषित कर उसके पति और चचेरी सास को एक साल के बच्चे के साथ जेल भेज दिया था।




हुआ कुछ यूं कि चित्रकूट जिले के राजापुर थाने के टिकरा गांव की ज्ञानवती (22) पत्नी मंझा उर्फ उदित नारायण 5 अक्टूबर 2016 को ससुराली जनों से बिना कुछ बताए अपनी मर्जी से कहीं चली गई। 15 अक्टूबर को महिला के पिता मिलनवा ने राजापुर थाने में पति और चचेरी सास सुमित्रा के खिलाफ बेटी को गायब करने का मुकदमा दर्ज करा दिया।

18 अक्टूबर को कौशांबी जिले की यमुना नदी में एक मृत महिला का शव बरामद हुआ, जिसकी पहचान मिलनवा ने अपनी बेटी ज्ञानवती के रूप में की। 20 अक्टूबर को चित्रकूट पुलिस ने उदितनारायण और उसकी चाची को एक साल के मासूम बेटे के साथ गिरफ्तार कर पत्नी की हत्या के आरोप में जेल भेज दिया।

गायब महिला बुधवार को अचानक मुख्य दंड़ाधिकारी (सीजेएम) की न्यायालय में हाजिर होकर जोर-जोर से चिल्लाने लगी ‘मैं जिंदा हूं, मुझे पति नहीं मारा, वह निर्दोष जेल बंद है।’ बस फिर क्या था, सैकड़ों की तादाद में वादकारी उस न्यायालय में जमा हो महिला को देखने लगे और पुलिस की कारगुजारी पर भला-बुरा कहने लगे। सीजेएम ने आनन-फानन सीओ राजापुर और वादी मुकदमा मिलनवा को तलब कर मुकदमे से आईसीपी की धारा-304 हटाने और वादी का सीआरपीसी की धारा-164 के तहत न्यायालय में बयान दर्ज कराने के अलावा निर्दोषों की रिहाई का फरमान सुना दिया।

ज्ञानवती के अधिवक्ता राजेश सिंह चौहान ने बताया कि ‘महिला अपनी स्वैच्छा से घर छोड़ कर गई थी, उसने न्यायालय में हाजिर होकर खुद के जीवित होने का शपथ पत्र देकर पति और सास को निर्दोष बताया है।’ राजापुर पुलिस उपाधीक्षक (सीओ) बृजराज सिंह ने बताया कि ‘15 अक्टूबर को दहेज की मांग पूरी न होने पर महिला के पिता ने पति और चचेरी सास के खिलाफ बेटी को गायब करने का मुकदमा दर्ज कराया था, 18 अक्टूबर को कौशांबी जिले में यमुना नदी से बरामद महिला के शव को मिलनवा ने अपनी बेटी का शव बताया।




तभी आईपीसी की धारा-304 तरमीम कर दोनों को गिरफ्तार जेल भेजा गया था। अब जब महिला जिंदा आ गई, तब पति और सास पर लगे आरोप वापस कर वादी के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है।’ उन्होंने बताया कि ‘बरामद महिला के शव की खोजबीन के लिए मामला कौशांबी जिला स्थानांतरित कर दिया जाएगा।’

सबसे बड़ा सवाल यह है कि पुलिस द्वारा भरे गए पंचनामा में बरामद शव क्षत-विक्षत नहीं था और उसके पोस्टमार्टम कराने की राय में आधा दर्जन ग्रामीणों के हस्ताक्षर होना बताया गया है, ऐसे में पुलिस की जिम्मेदारी नहीं बनती कि शव की शिनाख्त दृढ़ता से कराए, ताकि निर्दोष को डेढ़ माह से जेल न काटनी पड़ती।

चित्रकूट से आर जयन की रिपोर्ट