CISCE ने लिया 9वीं और 11वीं की कक्षा के लिए ये फैसला, पैरेंट्स और टीचर्स कर रहें विरोध

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CISCE ने लिया 9वीं और 11वीं की कक्षा के लिए ये फैसला, पैरेंट्स और टीचर्स कर रहें विरोध

नई दिल्ली। काउंसिल ऑफ इंडियन स्कूल सर्टिफिकेट एग्जामिनेशन (CISCE) ने ये फैसला लिया है कि जिस तरह 10वीं और 12वीं के प्रश्न पत्र को बोर्ड तैयार करता है। उसी तरह अब कक्षा 9वीं और 11वीं की कक्षा के लिए भी बोर्ड ही प्रश्न पत्र तैयार करेगा। जिसके बाद से पैरेंट्स से लेकर टीचर्स तक इस फैसले का विरोध कर रहे हैं।

Cisce Took This Decision Parents And Teachers Are Protesting For Class 9th And 11th :

इस संबंध में CISCE ने एक सर्कुलर जारी किया। इस सर्कुलर में कहा गया है कि ‘कक्षा 9वीं और 11वीं के लिए इंग्लिश, मैथ्स, साइंस समेत सभी मुख्य विषयों का प्रश्न पत्र अब स्कूल नहीं बोर्ड तैयार करेगा। ये प्रश्न पत्र सभी स्कूलों को वितरित किए जाएंगे। हालांकि स्टूडेंट्स की आंसर शीट्स स्कूलों के शिक्षकों द्वारा ही जांची जाएंगी।’

वहीं, पैरेंट्स और टीचर्स का कहना है कि ‘इससे बच्चों का मानसिक तनाव बढ़ेगा। इस संबंध में ऑल इंडिया पैरेंट एसोसिएशन के प्रमुख अशोक अग्रवाल ने कहा, ‘आखिर काउंसिल कितनी बोर्ड परीक्षाएं कराना चाहती है? ऐसा करने से सिर्फ स्टूडेंट्स और पैरेंट्स का मानसिक तनाव ही बढ़ेगा। 10वीं व 12वीं के अलावा बोर्ड जैसी और कोई परीक्षा नहीं होनी चाहिए।’

CISCE चेयरपर्सन गैरी आराथून ने पैरेंट्स और टीचर की चिंता को देखते हुए कहा है कि, ‘इस केंद्रीकृत प्रणाली को लेकर परेशान होने की जरूरत नहीं है। यह स्टूडेंट्स को आने वाली बोर्ड परीक्षा के लिए तैयार करेगी। किसी भी स्टूडेंट को बोर्ड परीक्षा के दौरान ऐसा नहीं लगना चाहिए कि वो किसी नई तरह की परीक्षा में शामिल हो रहे हैं। एक तरह के प्रश्न पत्र से शिक्षकों को भी पैटर्न समझने में मदद मिलेगी। बोर्ड में बैठने से पहले स्टूडेंट्स इसके पैटर्न से वाकिफ हो जाएंगे।’

नई दिल्ली। काउंसिल ऑफ इंडियन स्कूल सर्टिफिकेट एग्जामिनेशन (CISCE) ने ये फैसला लिया है कि जिस तरह 10वीं और 12वीं के प्रश्न पत्र को बोर्ड तैयार करता है। उसी तरह अब कक्षा 9वीं और 11वीं की कक्षा के लिए भी बोर्ड ही प्रश्न पत्र तैयार करेगा। जिसके बाद से पैरेंट्स से लेकर टीचर्स तक इस फैसले का विरोध कर रहे हैं। इस संबंध में CISCE ने एक सर्कुलर जारी किया। इस सर्कुलर में कहा गया है कि 'कक्षा 9वीं और 11वीं के लिए इंग्लिश, मैथ्स, साइंस समेत सभी मुख्य विषयों का प्रश्न पत्र अब स्कूल नहीं बोर्ड तैयार करेगा। ये प्रश्न पत्र सभी स्कूलों को वितरित किए जाएंगे। हालांकि स्टूडेंट्स की आंसर शीट्स स्कूलों के शिक्षकों द्वारा ही जांची जाएंगी।' वहीं, पैरेंट्स और टीचर्स का कहना है कि 'इससे बच्चों का मानसिक तनाव बढ़ेगा। इस संबंध में ऑल इंडिया पैरेंट एसोसिएशन के प्रमुख अशोक अग्रवाल ने कहा, 'आखिर काउंसिल कितनी बोर्ड परीक्षाएं कराना चाहती है? ऐसा करने से सिर्फ स्टूडेंट्स और पैरेंट्स का मानसिक तनाव ही बढ़ेगा। 10वीं व 12वीं के अलावा बोर्ड जैसी और कोई परीक्षा नहीं होनी चाहिए।' CISCE चेयरपर्सन गैरी आराथून ने पैरेंट्स और टीचर की चिंता को देखते हुए कहा है कि, 'इस केंद्रीकृत प्रणाली को लेकर परेशान होने की जरूरत नहीं है। यह स्टूडेंट्स को आने वाली बोर्ड परीक्षा के लिए तैयार करेगी। किसी भी स्टूडेंट को बोर्ड परीक्षा के दौरान ऐसा नहीं लगना चाहिए कि वो किसी नई तरह की परीक्षा में शामिल हो रहे हैं। एक तरह के प्रश्न पत्र से शिक्षकों को भी पैटर्न समझने में मदद मिलेगी। बोर्ड में बैठने से पहले स्टूडेंट्स इसके पैटर्न से वाकिफ हो जाएंगे।'