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राज्यसभा में कल पेश किया जाएगा नागरिकता संशोधन विधेयक, जानिये उच्च सदन का अंकगणित

Citizenship Amendment Bill Will Be Introduced In Rajya Sabha Tomorrow Know Arithmetic Of Upper House

By बलराम सिंह 
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नई दिल्ली। लोकसभा में पास होने के बाद नागरिकता संशोधन बिल को बुधवार में राज्यसभा में पेश किया जाएगा। भारतीय जनता पार्टी ने 10 और 11 दिसंबर के लिए सभी सांसदों को व्हिप जारी करके सभी सांसदों को सदन में उपस्थित रहने के निर्देश दिए हैं। पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बांग्लादेश के गैरमुस्लिम शरणार्थियों के लिए भारत में नागरिकता का रास्ता साफ करने वाले नागरिकता संशोधन विधेयक की अब राज्यसभा में असली परीक्षा है। यह बिल राज्यसभा में कल यानी बुधवार को पेश किया जाएगा। लोकसभा में बहुमत होने के कारण सरकार 80 के मुकाबले 311 वोटों से बिल को पास करवाने में कामयाब रही, लेकिन राज्यसभा का गणित दूसरा है। सरकार राज्यसभा में अल्पमत में है। बीजेपी को उम्मीद है कि सरकार जिस तरह तीन तलाक विधेयक और आर्टिकल 370 हटाने को निष्प्रभावी करने वाले विधेयक को राज्यसभा से पास करवाने में सफल रही थी।

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एनडीए के सबसे बड़े दल बीजेपी के राज्यसभा में 83 सांसद हैं। वहीं सहयोगी जनता दल (यूनाइटेड) यानी जेडी(यू) के 6 सांसद हैं। इसके अलावा एनडीए में शिरोमणी अकाली दल के तीन, रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया (आरपीआई) के एक जबकि अन्य दलों के 13 सदस्य हैं। इस तरह एनडीए गठबंधन के अपने 106 राज्यसभा सांसद हैं। यहां यह भी बता दें कि जेडीयू ने लोकसभा में भले बिल का साथ दिया, लेकिन पार्टी में इसको लेकर दो स्वर हैं। जेडीयू नेता प्रशांत किशोर इसके खिलाफ खड़े हैं।

उधर यूपीए में कांग्रेस के सबसे ज्यादा 46 सांसद हैं। वहीं, बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव की पार्टी राष्ट्रीय जनता दल और शरद पवार की एनसीपी के चार-चार सांसद हैं। इनके अलावा द्रविड़ मुनेत्र कषगम (डीएमके) के अपने पांच सांसद है जबकि अन्य यूपीए सहयोगियों के तीन सांसद हैं। यूपीए के पास कुल 62 राज्यसभा सांसद हैं।राज्यसभा में कुछ पार्टियां ऐसी हैं जो न एनडीए में शामिल हैं और न ही यूपीए में। हालांकि, विचारधारा के स्तर पर इन पार्टियों का रुख समय-समय पर साफ होता रहता है। जो पार्टियां किसी भी गठबंधन से परे हैं, उनमें राज्यसभा सांसदों के मामले में सबसे बड़ी पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) है जिनके 13 सांसद हैं।

उसके बाद उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की समाजवादी पार्टी के नौ, तेलंगाना के मुख्यमंत्री के. चंद्रशेखर राव की तेलंगाना राष्ट्र समिति के छह, मार्क्सवादी कम्यूनिस्ट पार्टी (सीपीएम) के पांच, उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती की बहुजन समाज पार्टी (बीएसपी) के चार, दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की आम आदमी पार्टी (आप) के तीन सांसद हैं। इनके अलावा, जम्मू-कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती की पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) के दो, भारतीय कम्यूनिस्ट पार्टी (सीपीआई) का एक जबकि कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री एचडी कुमारस्वामी की पार्टी जनता दल (सेक्युलर) यानी जेडी(एस) का भी एक सांसद है। इन्हें मिलाकर आंकड़ा 44 सांसदों का होता है। करीब-करीब साफ है कि ये सभी सिटिजनशिप बिल का विरोध करेंगे।

एनडीए और यूपीए, दोनों में किसी भी गठबंधन का हिस्सा नहीं बनने वाले कुछ और भी दल हैं जो बिल के समर्थन में दिख रहे हैं। इनमें तमिलनाडु की पार्टी ऑल इंडिया अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कषगम (एआईएडीएमके) के 11, ओडिशा के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक की बीजू जनता दल (बीजेडी) के सात, आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री जगन मोहन रेड्डी की वाईएसआर कांग्रेस पार्टी के दो और आंध्र प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू की तेलुगू देशम पार्टी के दो सांसद हैं। इनके अलावा, हाल में बीजेपी से नाता तोड़ एनसीपी और कांग्रेस के समर्थन से महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री बने उद्धव ठाकरे की शिवसेना के तीन सांसद हैं जो नागरिकता विधेयक के पक्ष में वोटिंग करेंगे। पार्टी ने लोकसभा में भी बिल का समर्थन किया है। साथ ही, तीन और सांसदों के बिल के समर्थन में खड़ा होने की उम्मीद है। इन सबको मिला दिया जाए तो कुल आंकड़ा 28 सांसदों तक पहुंचता है।

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राज्यसभा में 12 नामित सदस्य होते हैं। इन 12 नॉमिनेटेड सदस्यों में से आठ ने बीजपी जॉइन कर ली है जबकि चार सदस्य अब भी नॉमिनेटड कैटिगरी में ही हैं। इस कैटिगरी से तीन सदस्य एनडीए के पक्ष में जबकि बाकी एक सांसद यूपीए के पक्ष में वोटिंग करेंगे।

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