सीएम अखिलेश होंगे समाजवादी पार्टी के सर्वेसर्वा, अगले 72 घंटे करेंगे फैसला

लखनऊ। उत्तर प्रदेश की सत्तारूढ़ समाजवादी पार्टी के मुखिया कुनबे में अंदरूनी घमासान का दूसरा दौर शुरू हो चुका है। अंदरखाने की खबरों की माने तो सपा सुप्रीमो मुलायम सिंह यादव के परिवार में दोबारा शुरू होती दिख रही वार्चस्व की लड़ाई की पटकथा करीब महीने भर पहले चाचा शिवपाल और भतीजे सीएम अखिलेश यादव के बीच पहले ही लिखी जा चुकी है। जिसे टिकटों के बंटवारे ने ड्रामे में बदल दिया है।




ऐसी खबरें हैं कि अखिलेश यादव ने अपनी ओर से संभावित सभी 403 पार्टी प्रत्याशियों की सूची मुलायम सिंह यादव को सौंपे जाने के बाद से शिवपाल यादव ने सोशल मीडिया पर विरोध दर्ज करवाया था। जिसकी खबर मुलायम सिंह यादव को भी मिली और उन्होंने प्रतिक्रिया के रूप में उन्होंने अपने आवास पर पहुंचे शिवपाल यादव को घंटो तक इंतजार करवाकर दर्ज करवा दी।




जिसके बाद से समाजवादी पार्टी के एक गुट में ऐसी सुगबुगाहट है कि चाचा शिवपाल पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे सकते हैं। फिलहाल कहा यही जा रहा है कि आने वाले 72 घंटे यह तय कर देंगे कि यूपी के आगामी विधानसभा चुनावों समाजवादी पार्टी की स्थिति क्या होगी? चाचा और भतीजे के बीच गुटों में बंट चुकी पार्टी में कौन सा गुट किस गुट पर भारी पड़ेगा यह भी देखने वाली बात होगी।




सूत्रों की माने तो सपा सुप्रीमो मुलायम सिंह यादव जानते हैं कि 2017 के विधानसभा चुनाव उनके बेटे सीएम अखिलेश यादव की निजी सियासी हैसियत तय करने वाले हैं। वहीं दूसरा पहलू ये भी है कि सीएम अखिलेश जिस विकास की हवा पर सवार होकर यूपी के विधानसभा चुनावों को जीतने का सपना देख रहे हैं उसे गुटबाजी का शिकार पार्टी बीच में ही ले डूबेगी। ये परिस्थितियां ऐसे समय में उभरीं हैं जब किसी भी समय निर्वाचन आयोग सूबे में आदर्श चुनाव आचार संहिता लागू करने के निर्देश जारी कर सकता है। अब पूरा मामला मुलायम सिंह यादव के ऊपर निर्भर करता है कि वे इस ​परिस्थिति में कौन सा दांव लगाते हैं, जिससे उनका परिवार और विरासत दोनों बच जाएं।