रेल हादसे को लेकर शुरू हुआ CM अखिलेश यादव की आलोचनाओं का दौर

लखनऊ।कानपुर में रविवार को हुए रेल हादसे के बाद अखिलेश यादव आलोचना हो रही है। राजनीतिक गलियारों में चर्चा होने लगी है कि किसी राज्य में इतना बड़ा हादसा हो जाए और 100 से ज्यादा लोगों की जाने चली गई हों, उस राज्य के मुख्यमंत्री का घटना स्थल पर ना जाना जनता के बीच उसकी असंवेदनशीलता का परिचायक है। सीएम अखिलेश यादव की नासमझी पर उठ रहे सवालों को मध्यप्रदेश के सीएम शिवराज सिंह चौहान के दौरे ने और बड़ा बना दिया है।




सीएम अखिलेश यादव की आलोचना कर रहे लोगों का कहना है कि सीएम अखिलेश यादव ने सरकारी खजाने से मृतकों को 5 लाख रुपए की सरकारी सहायता तो सुनिश्चित कर दी, लेकिन वह यह सुनिश्चित नहीं कर पाए कि उन्हें एकबार कानपुर के अस्पतालों का दौरा कर हादसे के पीड़ितो का दर्द भी बांटाना चाहिए था। महज सरकारी मदद की घोषणा कर कोई मुख्यमंत्री अपने दायित्वों का निर्वाह नहीं कर सकता।

एक वरिष्ठ पत्रकार ने इस मुद्दे को लेकर अखिलेश यादव को एक नासमझ राजनेता करार दिया है। उनका कहना है कि अखिलेश यादव ने बतौर मुख्यमंत्री जितनी भी गलतियां की हैं उनमें यह सबसे बड़ी गलती के तौर पर देखी जा सकती है। वह लखनऊ में मौजूद थे और कानपुर तक नहीं जा सके, जबकि मध्य प्रदेश के सीएम शिवराज सिंह चौहान 600 किलोमीटर से उड़कर घायलों का हाल जानने के लिए कानपुर तक पहुंच गए। यह हादसा में सीएम अखिलेश का कानपुर ना जाना उनकी अपरिपक्वता के रूप में देखा जाएगा।




बीजेपी के एक नेता का कहना है कि यह समय हादसे में मारे गए और घायल हुए लोगों के परिजनों के लिए एक नाजुक समय है। सारे देश की संवेदनाएं उनके साथ हैं। ऐसे समय में राजनीति करना बेहद ओछी बात होगी। जिसे जो सही लगे कर सकता है। बाकी का निर्णय जनता के ऊपर है वह क्या सोचती है और समझती है।

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