सीएम का चेहरा बनने के लिए रोए थे नीतीश, मेरे कहने पर माने थे लालू: मुलायम

Cm Ka Chehra Banane Ke Liye Roye The Nitish Mere Kahne Par Mane The Lalu Mulayam

लखनऊ। समाजवादी पार्टी के संरक्षक मुलायम सिंह यादव एक ओर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से नजदीकियां बढ़ाते नजर आ रहें हैं तो दूसरी ओर बिहार में अपने समधी लालू प्रसाद यादव के साथ खड़े नजर आ रहे हैं। ​बिहार में महागठबंधन की अलग हुए सीएम नीतीश कुमार को लेकर मुलायम ने खुलासा करते हुए बताया है कि गठबंधन के तहत लड़गे गए बिहार विधानसभा के चुनाव में सीएम का चेहरा बनने के लिए नीतीश कुमार रोए थे, तब उन्होंने ही नीतीश को चेहरा बनाने के लिए लालू को मनाया था।

बिहार में महागठबंधन की सरकार को गिरने के 5 दिन बाद एकाएक मुखर हुए मुलायम के इस बयान की वर्तमान समय में कोई जरूरत नहीं थी। एक दिन पहले ही लालू प्रसाद यादव ने नीतीश को ​महागठबंधन का चेहरा बनाए जाने को लेकर यह बात कही थी कि मुलायम सिंह यादव के कहने के बाद ही उन्होने नीतीश का चेहरा आगे किया था।

लालू प्रसाद यादव के उस बयान के स्पष्टीकरण के रूप में मुलायम ने बुधवार को नीतीश पर धोखा का आरोप लगते हुए कहा है, ‘मुझे आज भी वह दिन याद है जब नीतीश मुख्यमंत्री का चेहरा बनने के लेकर रो रहे थे और राजद प्रमुख लालू यादव इस बात पर राजी नहीं थे, उन्हें नीतीश पर उस समय भी भरोसा नहीं था लेकिन मेरे कहने पर लालू तैयार हुए थे।’

मुलायम सिंह ने कहा कि लालू चाहते थे कि चुनाव के बाद विधायकों की संख्या के मुताबिक सीएम चुना जाये। मतलब साफ था कि लालू नीतीश के साथ सिर्फ गठबंधन चाहते थे लेकिन मुख्यमंत्री के चेहरे के बिना चुनाव में जाना चाहते थे। इसके पीछे लालू की रणनीति ये थी कि अगर उनकी पार्टी को ज्यादा सीट मिले तो वो बाद में नीतीश पर दबाव डाल सकें। हालांकि, मुलायम के दबाव में लालू ने नीतीश की मांग मान ली थी।

महागठबंधन को पहला धोखा मुलायम ने ही दिया था—

मुलायम भले ही आज नीतीश कुमार को धोखेबाज कह रहे हो लेकिन 2015 में बिहार विधानसभा चुनाव से पहले महागठबंधन के नींव रखे जाते समय वह भी उस गठबंधन का हिस्सा थे। लालू प्रसाद यादव ने उन्हें महागठबंधन के राष्ट्रीय चेहरे के रूप में पेश किया था। इस महागठबंधन को पीएम मोदी के बढ़ते राजनीतिक कद के खिलाफ एक मात्र विकल्प के रूप में देखा जा रहा था। लेकिन एकाएक यूपी के भ्रष्टाचारी इंजीनियर यादव सिंह और रामगोपाल यादव के परिवार के कनेक्शन सामने आया और मुलायम ने महागठबंधन से किनारा कर लिया था। उस समय मुलायम पर मोदी सरकार के दवाब में महागठबंधन से अलग होने के आरोप लगे थे। उस समय मुलायम ने इन आरोपों पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी थी। हालांकि यह बात जरूर समने आई थी कि सीटों के बटवारे में सपा को केवल तीन सीटें मिलने से मुलायम नाराज थे।

मुलायम से रिश्तेदारी के चलते लालू भी साध ली थी चुप्पी —

लालू प्रसाद यादव आज भले ही नीतीश कुमार की पलटू कुमार और कुर्सी कुमार जैसी संज्ञाएं दे रहे हो, लेकिन वास्तविकता यह है कि लालू जिस महागठबंधन के सहारे अपनी राजनीति को आगे बढ़ता देख रहे थे उसको पहला नुकसान उनके समधी मुलायम सिंह यादव ने ही पहुंचाया था। मुलायम ने जिस तरह से बने बनाए महागठबंधन से स्वयं और समाजवादी पार्टी को अलग किया ​था वह चौकाने वाला था। उन्हें महागठबंधन का नेता बनाया गया था। बतौर नेता उनका पीछे हटना कम विवादित नहीं था, लेकिन अपनी रिश्तेदारी के चलते लालू ने मुलायम सिंह यादव को लेकर कोई बयान नहीं दिया था।

लखनऊ। समाजवादी पार्टी के संरक्षक मुलायम सिंह यादव एक ओर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से नजदीकियां बढ़ाते नजर आ रहें हैं तो दूसरी ओर बिहार में अपने समधी लालू प्रसाद यादव के साथ खड़े नजर आ रहे हैं। ​बिहार में महागठबंधन की अलग हुए सीएम नीतीश कुमार को लेकर मुलायम ने खुलासा करते हुए बताया है कि गठबंधन के तहत लड़गे गए बिहार विधानसभा के चुनाव में सीएम का चेहरा बनने के लिए नीतीश कुमार रोए थे, तब उन्होंने ही नीतीश…