पीएम मोदी और शाह से मुलाकात के बाद सीएम नितीश का शरद यादव को झटका

नई दिल्ली। बिहार में महागठबंधन से अलग होकर बीजेपी के गंठबंधन से सरकार चला रहे मुख्यमंत्री नितीश कुमार के नेतृत्व वाली जदयू जल्द केन्द्र की एनडीए सरकार का हिस्सा बनने जा रही है। बताया जा रहा है कि बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने नितीश कुमार को केन्द्र की एनडीए सरकार में शामिल होने का न्यौता दिया है। इसके बाद शुक्रवार को नवनिर्वाचित उप राष्ट्रपति वेंकैया नायडू के शपथग्रहण समारोह में शामिल होने पहुंचे नीतीश कुमार ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से मुलाकात भी की। इस मुलाकात में बिहार और दिल्ली की राजनीति में जदयू की भूमिका को लेकर चर्चा भी हुई है।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से मुलाकात के बाद शनिवार को नीतीश कुमार ने जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष के अधिकार का प्रयोग करते हुए पार्टी के वरिष्ठ नेता शरद यादव को राज्यसभा में पार्टी नेता पद से हटा दिया है। जिसकी जानकारी उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू को पत्र के माध्यम से दी चुकी है। शरद यादव के अलावा पार्टी ने अपने प्रवक्ता और राज्यसभा सांसद अनवर अली को भी पार्टी से निकाल दिया है।

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मिली जानकारी के मुताबिक शरद यादव जदयू और बीजेपी के गठबंधन को लेकर लगातार नाराजगी जाहिर कर रहे हैं। जदयू के महागठबंधन से अलग होने के बाद भी शरद यादव महागठबंधन के पक्ष में खड़े नजर आ रहे हैं। शरद यादव को अनवर अली जैसे पार्टी के कद्दावर कहे जाने वाले नेताओं का साथ भी मिला हुआ है।

जदयू से बाहर किए जा सकते हैं शरद यादव —

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जदयू के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष और वरिष्ठ नेता शरद यादव जिस तरह से बिहार की नए गठबंधन सरकार को लेकर सीएम नीतीश कुमार पर हमलावर हैं, उसे लेकर उन पर अनुशासनात्मक कार्रवाई की जा सकती है। पार्टी कई बार उन्हें अपना पक्ष रखने के लिए 19 अगस्त को बुलाई गई राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में रखें। इसके बावजूद शरद यादव ने जिस तरह से अपना तीन दिन का दौरा किया वह पार्टी की अंदरूनी कलह को सड़क पर लाने के लिए काफी रहा।

आरजेडी में जा सकते हैं शरद यादव —

बिहार की राजनीति और शरद यादव के चेहरे की बात की जाए तो वह सक्रिय राजनीति से हमेशा दूर नजर आए हैं। वह पार्टी के रणनीतिक फैसलों को प्रभावित करने की ताकत ही रखते आए हैं। अपने राजनीतिक जीवन के शुरूआती दौर में शरद यादव ने भले ही बिहार में अपनी सियासी जमीन तैयार की हो लेकिन गुजरते समय के साथ वह जननेता से राजनेता बन गए। बिहार की राजनीति के नए समीकरणों में उनके लिए जगह बची नहीं है और केन्द्र की राजनीति में वह विपक्ष के साथ खड़े नजर आ रहे हैं। राज्यसभा में पार्टी नेता के पद से हटाकर नीतीश कुमार ने उन्हें पार्टी से बाहर निकाले जाने के संकेत दे दिया है। यह कहना गलत नहीं होगा कि इस कार्रवाई के बाद शरद यादव भी अपने लिए नए ठिकाने की तलाश में जुट गए होंगे। अब उन्हेंं निर्णय यह लेना होगा कि वह आरजेडी में जाकर लालू प्रसाद यादव के नेतृत्व वाली आरजेडी की रणनीति को धार देने का काम करेंगे या फिर कांग्रेस के साथ जुड़कर केन्द्र की राजनीति में एनडीए सरकार पर हमलावर होते रहेंगे।

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