सीएम योगी ने स्वीकारी हार बोले, सपा बसपा के बेमेल गठबंधन को समझने में हुई चूक

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सीएम योगी ने स्वीकारी हार बोले, सपा बसपा के बेमेल गठबंधन को समझने में हुई चूक
लखनऊ । उत्तर प्रदेश की गोरखपुर और फूलपुर लोकसभा सीट पर हुए उपचुनाव के परिणामों ने सूबे की राजनीति को नया रुख दे दिया है। भाजपा के खिलाफ सपा और बसपा ने जिस तरह से एकजुट होकर मुकाबला किया उसका नतीजा उम्मीद से ज्यादा चौकाने वाला रहा। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने परिणामों पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए हार को जनादेश के रूप में स्वीकार करते हुए कहा कि वह सपा और बसपा के बेमेल गठबंधन को समझ नहीं पाए। यूपी…

लखनऊ । उत्तर प्रदेश की गोरखपुर और फूलपुर लोकसभा सीट पर हुए उपचुनाव के परिणामों ने सूबे की राजनीति को नया रुख दे दिया है। भाजपा के खिलाफ सपा और बसपा ने जिस तरह से एकजुट होकर मुकाबला किया उसका नतीजा उम्मीद से ज्यादा चौकाने वाला रहा। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने परिणामों पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए हार को जनादेश के रूप में स्वीकार करते हुए कहा कि वह सपा और बसपा के बेमेल गठबंधन को समझ नहीं पाए। यूपी में राज्यसभा चुनावों को लेकर जिस तरह की राजनीतिक सौदेबाजी का नया दौर शुरू हुआ, उसने उपचुनावों के परिणाम को प्रभावित किया। जनता इस राजनीतिक सौदेबाजी को जल्द ही समझ जाएगी।

सीएम योगी आदित्यनाथ ने कहा कि लोकसभा उपचुनाव के दौरान जिस तरह की राजनीतिक सौदेबाजी का दौर शुरू हुआ है, उसे जनता जल्द ही समझ जाएगी। चूंकि उपचुनाव में स्थानीय मुद्दे ज्यादा हावी रहते हैं, इसलिए उपचुनावों का परिणाम प्रभावित हुआ है।प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में होने वाले 2019 के आम चुनावों में मुद्दे राष्ट्रीय होंगे और भाजपा एकबार फिर जीत के साथ वापसी करेगी।

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पांच बार गोरखपुर से सांसद रहने के बाद मुख्यमंत्री बने योगी आदित्यनाथ के बयान से स्पष्ट हो गया है कि उपचुनावों को लेकर भाजपा की रणनीति को बसपा सुप्रीमो मायावती ने सपा उम्मीदवारों को समर्थन देकर ही ध्वस्त कर दिया था। सपा और बसपा के चक्रव्यूह में फंसी योगी आदित्यनाथ और केशव प्रसाद मौर्य की​ प्रतिष्ठा धरी रह गई।

योगी की फायर और केशव की रणनीति दोनों रहीं फेल—

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उत्तर प्रदेश में सीएम योगी आदित्यनाथ को फायर ब्रांड नेता कहा जाता है। चुनावी मौसम में गरमी बढ़ाने के लिए उनकी फायर की डिमांड पूर्वी उत्तर प्रदेश से लेकर पश्चिमी उत्तर प्रदेश तक रहती है। गोरखपुर के सांसद के रूप में लगातार पांच बार चुनाव जीतने के बाद मुख्यमंत्री बने योगी का अपनी ही सीट को पार्टी की झोली में न डाल पाना उनकी क्षवि पर एक बट्टा लगा गया है। इसका कारण कुछ भी रहा हो लेकिन 29 सालों से भाजपा की पारंपरिक सीट का उसके हाथ से निकल जाना किसी भी सूरत में गले से नीचे नहीं उतरता।

यहां पर उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्या की स्थिति भी कुछ सहज नजर नहीं आ रही। फूलपुर सीट पर सांसद के रूप में जीतने वाले पहले भाजपाई केशव को पार्टी ने 2015 में यूपी भाजपा का प्रदेश अध्यक्ष बनाया था। केशव ने 2017 के विधानसभा चुनावों के लिए जिस तरह की रणनीति तैयार ​की उसी का परिणाम रहा कि भाजपा उनके नेतृत्व में 403 विधायकों वाली यूपी विधानसभा में 327 विधायकों के साथ काबिज हुई। केशव को उनकी रणनीति का ईनाम उप मुख्यमंत्री की कुर्सी के रूप में मिला। लेकिन फूलपुर सीट के उपचुनाव में केशव की रणनीति को माया और अखिलेश के गठजोड़ ने फेल कर दिया। केशव ने उपचुनाव में बाहुबली अतीक अहमद को वोट कटवा के रूप में मैदान में उतारा, सोशल इंजीनियरिंग का सहारा लिया लेकिन सारे प्रयास धरे रह गए।

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