UPPSC भर्ती की जांच करेगी सीबीआई, खुलेंगे डॉ0 अनिल यादव के कारनामे

लखनऊ। उत्तर प्रदेश के सीएम योगी आदित्यनाथ ने बुधवार को बड़ा फैसला लेते हुए उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग (UPPSC) में 2012 से 2016 के बीच हुई तमाम भर्तियों की सीबीआई जांच के आदेश जारी कर दिए। अपने फैसले की घोषणा कर रहे सीएम योगी आदित्यनाथ ने कहा कि पिछली सरकार के दौरान यूपीपीएससी (UPPSC) की भर्तियों में जमकर गड़बड़ी हुई। सीबीआई जांच में जो भी लोग दोषी पाए जाएंगे उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

सीएम योगी के आदेश के बाद 2012 से 2016 के बीच भर्ती हुए करीब 15,000 कर्मचारियों की नौकरी जांच के घेरे में आ गई है। जिनमें पीसीएस अधिकारी, शिक्षक, चिकित्सक और इंजीनियर भी शामिल हैं।

अखिलेश सरकार के दौरान यूपीपीएससी में भर्ती को लेकर उठे विवाद में आयोग के चेयरमैन डॉ0 अनिल यादव पर आरोप लगा था कि उन्होंने जाति​ विशेष के अभ्यार्थियों की भर्ती को प्राथमिकता दी थी। जिसे लेकर प्रदेश भर में यूपीपीएससी के खिलाफ छ़ात्रों ने आंदोलन किया था। हाईकोर्ट ने भी इस मामले को स्वत: संज्ञान में लेते हुए अखिलेश सरकार को आड़े हाथों लेना पड़ा। जिसके बाद अखिलेश सरकार ने नवंबर 2015 में अदालत के निर्देश के आगे विवश होकर डॉ0 अनिल यादव को हटाया था।


हालांकि डॉ0 अनिल यादव के हटने के बाद यूपीपीएससी के चेयरमैन बने सुनील जैन उनके ही इशारे पर काम करते रहे। बताया जाता है कि सुनील जैन (जाेकि अनिल यादव के कार्यकाल में आयोग के सदस्य हुआ करते थे) को अनिल यादव की सिफारिश पर ही आयोग का चेयरमैन बनाया गया था।

सीबीआई जांच के अंदेशे के चलते पहले ही जलाई जा चुकीं हैं उत्तर पुस्तिकाएं—

सूत्रों की माने तो डॉ0 अनिल यादव और सुनील जैन ने यूपीपीएससी का चेयरमैन रहते जो भी काले कारनामे किए, उनकी लीपा पोती भी अपने कार्यकाल के दौरान ही कर डाली थी। बड़े स्तर पर चली घूंस और जाति के आधार पर हुई भर्तियों के साक्ष्यों को मिटाने के लिए परीक्षा की उत्तर पुस्तिकाओं को जलवाया गया।

डॉ0 अनिल यादव की योग्यता से लेकर चरित्र पर उठे थे सवाल—

डॉ0 अनिल यादव को यूपीपीएससी का चेयरमैन बनाने को लेकर उनकी योग्यता पर सवाल उठे थे। इसके साथ ही अनिल यादव के खिलाफ दर्ज कई आपराधिक मामलों ने उनके इस पद पर बने रहने को चुनौती दी, लेकिन तत्कालीन मुख्यमंत्री अखिलेश यादव और उनके परिवार से अपने निजी संबन्धों के दम पर वह कुर्सी पर डंटे रहे। अपनी कुर्सी को बचाए रखने के लिए यादव ने आयोग के सदस्यों में अपने गुट के लोगों शामिल किया। जब अनिल यादव के कारनामों की कलई खुलने लगी और छात्र उनके कार्यकाल में हुई भर्तियों के खिलाफ अंदोलित हुए तो उन्होंने अखिलेश सरकार की मदद से अपनी कुर्सी बचाए रखी।