सीएम योगी के ना चाहते भी पोंटी चड्ढ़ा की पंजीरी ही फांकेगे बच्चे

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सीएम योगी के ना चाहते भी पोंटी चड्ढ़ा की पंजीरी ही फांकेगे बच्चे

Cm Yogi Fails Again Panjiri Supply Tendering Clauses Are Pro Ponty Chadha Group

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में पोषाहार के नाम पर दशकों से केवल पंजीरी ही बांटी जा रही है। पोषाहार की श्रेणी में आने वाली इस पंजीरी से गरीब बच्चों और गर्भवती महिलाओं का कुपोषण दूर हुआ हो यह अब तक किसी सरकारी आंकड़े में सामने नहीं आया, लेकिन इस पंजीरी ने पिछले एक दशक में पोषाहार आपूर्ति व्यवस्था से जुड़े अफसरों की हैसियत को जमकर पोषित किया है।

यही वजह है कि पोषाहार आपूर्ति व्यवस्था से जुड़े बाल एवं महिला पुष्टाहार विभाग के अधिकारी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को धोखा देने पर उतर आए हैं। जिसका सीधा मकसद पुराने पंजीरी सप्लायर के प्रति अपनी बफादारी को साबित करना है।

यह जग जाहिर है कि उत्तर प्रदेश में मायावती के सत्ता में रहते शराब कारोबारी पोंटी चड्ढ़ा ने अपना नया गणित लगाते हुए पोषाहार आपूर्ति का ठेका अपनी कंपनियों को दिला दिया था। पोंटी ग्रुप ने इस कारोबार में अपनी जड़ें इतनी गहरी जमाईं कि अखिलेश यादव की सरकार में भी पोषाहार के नाम पर पंजीरी की सप्लाई पोंटी ग्रुप के पास ही बनी रही।

2017 में यूपी की सत्ता में हुए परिवर्तन के बाद बनी योगी आदित्यनाथ की सरकार में मीडिया ने पंजीरी खरीद में लंबे समय से चले आ रहे भ्रष्टाचार का खुलासा किया, तमाम हो हंगामे के बीच महिला एवं बाल पुष्टाहार विभाग ने इस पूरे खेल में कानूनी पेंच और पोषाहार की सतत सप्लाई का हवाला देते हुए पोंटी चड्ढ़ा ग्रुप की कंपनियों की सप्लाई को मजबूरी बताकर नए टेंडर की प्रक्रिया को बदलने की बात कही थी। कुपोषण की समस्या और पोषाहार की निरंतर सप्लाई को लेकर अदालत के निर्देश को ध्यान में रखते हुए मामला ठंडा पड़ गया।

सीएम योगी आदित्यनाथ ने भी उस समय पोषाहार आपूर्ति के लिए नई नीति बनाने के निर्देश जारी किए। सीएम योगी के निर्देश के मुताबिक पोषाहार आपूर्ति के लिए ग्राम समूह व महिला मंडलों को आगे लाने को कहा गया। जिसका मुख्य उद्देश्य छोटे उद्यमी महिला संगठनों और स्वरोजगार के साथ छोटे स्तर पर रोजगार का सृजन कर रहीं संस्थाओं को जिला स्तर पर पोषाहार की सप्लाई के लिए संस्थाओं के चयन के साथ खाद्य सुरक्षा अधिनियम के तहत क्षेत्रीय अभिरुचि के आधार पर पोषाहार वितरण कराने व्यवस्था लागू करने को कहा था।

सीएम योगी के निर्देश का असर ये हुआ है कि विभागीय अधिकारियों ने ई टेंडरिंग के लिए नई प्रक्रिया का खाका खींचा गया। मुख्यमंत्री को खुश करने के लिए पोषाहार के चार सेंटरों की संख्या बढ़कार 14 कर दी गई। बड़ी कंपनियों के साथ ग्राम समूहों और महिला मंडलों को टेंडरिंग में शामिल करने की पात्रता प्रदान कर दी गई। इन सबके बीच दो शर्तें ऐसी डाल दी गईं जिन्हें पूरा कर पाना केवल बड़ी कंपनियों या फिर पहले से सप्लाई कर रहे सिंडीकेट के लिए ही संभव है। निविदा के साथ जमा होने वाली अर्नेस्ट मनी तीन करोड़ रखी गई है जबकि इस अर्नेस्ट मनी के अलावा टेंडर पाने के बाद छह करोड़ की बैंक गारंटी लगानी पड़ेगी।

अब सवाल उठता है कि सालभर में कुछ लाख तक का कारोबार करने वाले महिला मंडल और ग्राम समूह तीन करोड़ की रकम कहां से जुटा पाएंगे। क्या उत्तर प्रदेश में कोई ऐसा ग्राम समूह या ग्राम उद्योग समिति है, जो पोषाहार आपूर्ति के लिए छह करोड़ की बैंक गारंटी जमा करवाने की हैसियत में हो।

ई टेंडरिंग की शर्तें चड्ढ़ा ग्रुप को ध्यान में रखकर तैयार हुईं —

सीएम योगी ने पोषाहार आपूर्ति में पोंटी चड्ढ़ा के सिंडीकेट को तोड़ने और ग्राम समूहों और महिला मंडलों के कामगारों के हाथों को मजबूत करने के ​इरादे से टेंडरिंग प्रक्रिया बदलने को कहा था। जिन सरकारी लोगों को इस काम की जिम्मेदारी दी गई थी उन्होंने अपनी बफादारी चड्ढ़ा ग्रुप के सिंडीकेट के प्रति दिखाते हुए शर्तों में इतनी बड़ी रकमों को डाल दिया जो छोटे कारोबारियों के लिए जुटाना नामुमकिन है।

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में पोषाहार के नाम पर दशकों से केवल पंजीरी ही बांटी जा रही है। पोषाहार की श्रेणी में आने वाली इस पंजीरी से गरीब बच्चों और गर्भवती महिलाओं का कुपोषण दूर हुआ हो यह अब तक किसी सरकारी आंकड़े में सामने नहीं आया, लेकिन इस पंजीरी ने पिछले एक दशक में पोषाहार आपूर्ति व्यवस्था से जुड़े अफसरों की हैसियत को जमकर पोषित किया है। यही वजह है कि पोषाहार आपूर्ति व्यवस्था से जुड़े बाल एवं महिला पुष्टाहार…