लखनऊ। संगठित अपराध और माफिया गैंग्स को खत्म करने की ​नियत के साथ यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मकोका (MCOCA) की तर्ज पर यूपीकोका (UPCOCA) कानून लाने की तैयारी कर ली है। उम्मीद है कि योगी अपनी कैबिनेट में इस कानून को जल्द पास करने के बाद विधानसभा में पेश करेंगे। योगी सरकार की इस कदम पर लोगों की आपत्तियां आना भी शुरू हो चुकीं हैं। जिनमें एक नाम यूपी के पूर्व मुख्य सचिव और रिटायर्ड आईएएस आलोक रंजन का है। जिन्हें लगता है कि वर्तमान कानून ही पर्याप्त हैं, यूपीकोका जैसे किसी नए कानून की आवश्यकता यूपी में नहीं है।

यूपीकोका कानून महाराष्ट्र में 1999 में लागू किए गए मकोका एक्ट की तर्ज पर ही प्रावधान किए जाएंगे। मकोका यानी महाराष्ट्र कंट्रोल आॅफ आर्गेनाइज्ड क्राइम एक्ट को मुंबई में बढ़ते अंडरवर्ल्ड के प्रभाव को खत्म करने के लिए लागू किया गया था। इस कानून के डर ने अंडरवर्ल्ड के लिए काम करने वाले गैंग्स को खत्म करने का काम किया था। महाराष्ट्र में इस कानून के लागू होने के बाद आए परिणामों के बाद 2002 में दिल्ली सरकार ने भी इस कानून को लागू कर दिया था।

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यूपी में यह पहला मौका नहीं है जब किसी सरकार ने मकोका की तर्ज कानून लाने का प्रयास किया हो। योगी सरकार से पहले मायावती ने मुख्यमंत्री रहते इस कानून को लागू करने की कोशिश की थी, लेकिन तत्कालीन केन्द्र सरकार की मंजूरी न मिलने के चलते इस कानून को अंतिम रूप नहीं दिया जा सका।

कैसे काम करेगा यूपीकोका —

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उत्तर प्रदेश में अवैध बसूली, जमीनों पर अवैध कब्जे, विवादित जमीनों को खरीदने बेंचने और फिरौती हत्या जैसे अपराधों को बड़े और संगठित स्तर पर अंजाम दिया जाता है। ऐसे संगठित अपराधियों की कमर तोड़ने के लिए यूपी सरकार यूपीकोका को लागू करना चाहती है। इस कानून के तहत संगठित अपराध में लिप्त पाए जाने वाले अपराधियों को लंबे समय तक सलाखों के पीछे रखा जा सकेगा।

यूपीकोका की जरूरत नहीं —

कानून के कुछ जानकार मकोका जैसे कानूनों को लागू किए जाने के पक्षधर नहीं हैं। उनके मुताबिक देश में लागू आईपीसी में पहले से ही ऐसे गंभीर प्रावधान हैं जिनके आधार पर अपराधियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जा सकती है। ऐसे में मकोका जैसे कानून को लागू किए जाने से पुलिस बेलगाम हो जाती है। कई बार निर्दोष और मासूम लोग भी ऐसे कानूनों के लपेटे में आ जाते हैं। हमारे देश की अदालती प्रक्रिया को ध्यान में रखें तो ​मकोका जैसे कानूनों में फंसने के बाद निर्दोषों की जिन्दगी बर्बाद हो जाती है।

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