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CM योगी पहुँचे मानसरोवर मंदिर, भगवान शिव की पूजा- अर्चना की

By रवि तिवारी 
Updated Date

Cm Yogi Reached Mansarovar Temple Worshiped Lord Shiva

नई दिल्ली। वाराणसी से पधारे सतुआ बाबा महंत संतोष दास अयोध्या से पधारे महापौर राम मिलन दास महंत पंचालनकुरीची योगी राम नाथ योगी शांतिनाथ जी और पिछले 7 दिनों से जिन के श्री मुख से पावन कथा का श्रवण करने का आनंद आप सब ने दिया है। व्यासपीठ पर विराजमान बाबा बालक दास जी गोरखपुर के सभी श्रद्धालु जन आप जब श्री पढ़ो वर्षों के जो यहां के भावनाएं थे उन भावनाओं के अनुरूप स्थान की धार का कार्य मूर्ति प्राण प्रतिष्ठा के साथ संपन्न हो रहा है।

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इस अवसर पर चार प्रमुख दानदाताओं को जिन्होंने इन चार मंदिरों के निर्माण के लिए अपना योगदान दिया इसमें श्री कृष्ण मंदिर बनाया है। ओमप्रकाश करमचंदानी हैं जिन्होंने मां दुर्गा के मंदिर का निर्माण कराया। अरुण अग्रवाल राधा कृष्ण मंदिर राम दरबार और भगवान राम के मंदिर के निर्माण का कार्य संपन्न किया है। उन्होंने राधा कृष्ण मंदिर के निर्माण का कार्य संपन्न किया और यहां पर प्राण प्रतिष्ठा के कार्यक्रम के साथ ही वर्षा को साकार किया।

किसी गाय ने उसको खाया गाय के पेट में प्लास्टिक जाता है और फिर वह गाय मर जाती है। एक प्लास्टिक से कितना नुकसान हम स्वयं का नुकसान कर रहे हैं मंदिरों को भी धंधा कर रहे हैं। और जिसको हमने माता माना है उस गौ माता के साथ भी हम लोग कितना बड़ा खिलवाड़ कर रहे हैं। इसलिए हम सबका दायित्व बनता है कि हम प्लास्टिक का उपयोग न करें।

चारों या जवानों को हृदय से बधाई देता हूं एक सफल और पुण्य कार्य के लिए उनका अभिनंदन करता हूं आप सभी श्रद्धालु जनों को जिन्होंने पिछले 7 दिनों तक इस पावन कथा का श्रवण किया इसका भरपूर आनंद लिया और अपनी श्रद्धा के माध्यम से इन सब को एक नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने का कार्य किया है आप सब का भी मैं इस अवसर पर हृदय से आप सबको में शिवरात्रि की बधाई देता हूं अपने शुभकामनाएं देता हूं

पूरी तरह फिट हो चुके थे टूट चुके थे कल कोई घटना दुर्घटना हो सकती थी हम लोगों को भी वर्ष में केवल एक बार अवसर प्राप्त होता था। 25 वर्षों से गोरखनाथ मंदिर शारदीय नवरात्र में अवसर पर ही हम लोगों को शोभायात्रा के साथ आने जलाभिषेक करने और मंदिरों में दर्शन करने का अवसर प्राप्त होता था। मूर्तियां भी बहुत पुरानी पड़ चुकी थी खंडित हो चुकी थी।

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इसलिए इस स्थान का उद्धार किया जाना बहुत आवश्यकता है हम लोगों ने आठ 10 वर्ष पहले इस तालाब की धार की कार्यवाही को आगे बढ़ाया था। तालाब तो आदत बन चुका था लेकिन उसके सुंदरीकरण के कार्य को आगे नहीं बढ़ा पाए थे और आज उत्तर प्रदेश सरकार के सहयोग से पर्यटन विभाग ने तालाब और उसके आसपास के सुंदरीकरण के कार्य को अपने हाथ में लिया।

दिग्विजय नाथ जी महाराज 1917 से लेकर के 1923, 24 तक इस स्थान में रहे हैं यहां पर रह कर के उन्होंने अपनी शिक्षा भी आगे बढ़ाई थी। और साथ-साथ बहुत सारे गोरखपुर से जुड़े हुए विघ्न बाधाएं ऐसी थी जिन्हें उन्होंने संस्थान में रहकर की दूर की थी।

पहले स्थान पर रहा है अपने पुनरुद्धार के लिए 100 वर्ष हो गए और 100 वर्षों में यह कार्य नहीं हो पाया था लेकिन यह सौभाग्य इन चार लोगों को प्राप्त हुआ। हमें यहां पर इस पवित्र स्थान पर मां दुर्गा के मंदिर में दर्शन करने का सौभाग्य प्राप्त होगा राम दरबार का दर्शन करने का सौभाग्य प्राप्त होगा

बाबा जी को प्रसाद की और विदाई भी हम सबके हमेशा बने रहेंगे और यही कार्य में राधा कृष्ण जी के मंदिर में भी देखने को मिलता है। शुभकामनाएं देता हूं हर वर्ष यहां पर सावन महीने में कथा होती है। प्रयास होना चाहिए समय-समय पर कीर्तन के कार्यक्रम हरि कीर्तन के कार्यक्रम हो भगवत भजन के कार्यक्रम हो प्रवचन के कार्यक्रम हो एक धार्मिक माहौल बने लोगों को इस प्रकार के जागरूकता स्थान की प्रति दिखाई दे।

बाबा बालक दास जी को जिन्होंने यहां पर इस पावन कथा के माध्यम से आप सब को भगवान की कथा के बारे में बताया। इस पावन कथा के माध्यम से आज यहां पर कथा की पूर्णाहुति होगी और तनुश्री के आयोजन के साथ जलाभिषेक करने का अवसर प्राप्त होगा शिवरात्रि के पूर्व प्रसाद की व्यवस्था कर रखी है जहां तक है।

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रिपोर्ट- रवि जाइसवाल

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