भारतीय भाषा महोत्सव में बोले सीएम योगी-भाषाएं बोझ नहीं, आर्थिक स्वावलंबन में मददगार

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भारतीय भाषा महोत्सव में बोले सीएम योगी-भाषाएं बोझ नहीं, आर्थिक स्वावलंबन में मददगार

लखनऊ। लखनऊ विश्वविद्यालय के हिंदी व आधुनिक भारतीय भाषा विभाग और उत्तर प्रदेश भाषा संस्थान के संयुक्त तत्वावधान से तीन दिवसीय भारतीय भाषा महोत्सव का आगाज हुआ है। इस कार्यक्रम का आगाज मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने की है। इस दौरान सीएम योगी ने भााषा के महत्व पर प्रकाश डाला।

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इसको उन्होंने आर्थिक स्वावलंबन से भी जोड़ा। सीएम योगी आदित्यनाथ ने कहा कि शताब्दी वर्ष में भारतीय भाषा महोत्सव का बड़ा कदम है। हम सभी को पता है कि किसी भी मनुष्य की अभिव्यक्ति का आधार उसकी भाषा होती है। हर व्यक्ति के संवाद का माध्यम भी भाषा होती है। इसके बगैर अभिव्यक्ति संभव नहीं हो सकता है।

इसके बाद भी हमसे गलतियां हो जाती है। जिस भाव के साथ हम अपनी भाषा को व्यक्त करते है, वही हमारी ताकत है। मुख्यमंत्री ने कहा कि भाषा रोजगार का बहुत बड़ा माध्यम है। उन्होंने कहा कि मेरा मानना है कि संस्कृत जानने वाला व्यक्ति कभी भूखा नहीं मर सकता है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में योग्य शिक्षक पात्रता परीक्षक में 70 फीसदी अभ्यर्थियों भी पास नही हो सके।

आप एक भाषा सीख लो तो आपका रास्ता आसान हो जाएगा। भाषा में मजबूती वाले यूपी मूल के शिक्षक पूरे देश में हैं। उन्होंने कहा कि भाषा को बोझ न मान आर्थिक स्वावलंबन बनाएं। प्रदेश सरकार की इंटर्नशिप स्कीम भाषा के साथ भी लागू होगी। यह तो हर जनपद में यूथ हब बनाने की स्कीम है। सीएम ने कहा कि हिंदी देश के बड़े भूभाग को जोड़ने का काम करती है।

गांधी ने हिंदी इस देश की राष्ट्र भाषा माना है और यह भाषा किसी की विरोधी नहीं है। वैश्विक मंच से खुद पीएम हिंदी में लोगों को संबोधित करते हैं। बता दें कि, इस महोत्सव में देश-विदेश के भारतीय भाषा के लगभग 200 साहित्यकार शामिल हैं। इस महोत्सव में भाषा साहित्य से जुड़ी विभिन्न समस्याओं पर विचार विमर्श हो रहा है।

लखनऊ। लखनऊ विश्वविद्यालय के हिंदी व आधुनिक भारतीय भाषा विभाग और उत्तर प्रदेश भाषा संस्थान के संयुक्त तत्वावधान से तीन दिवसीय भारतीय भाषा महोत्सव का आगाज हुआ है। इस कार्यक्रम का आगाज मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने की है। इस दौरान सीएम योगी ने भााषा के महत्व पर प्रकाश डाला। इसको उन्होंने आर्थिक स्वावलंबन से भी जोड़ा। सीएम योगी आदित्यनाथ ने कहा कि शताब्दी वर्ष में भारतीय भाषा महोत्सव का बड़ा कदम है। हम सभी को पता है कि किसी भी मनुष्य की अभिव्यक्ति का आधार उसकी भाषा होती है। हर व्यक्ति के संवाद का माध्यम भी भाषा होती है। इसके बगैर अभिव्यक्ति संभव नहीं हो सकता है। इसके बाद भी हमसे गलतियां हो जाती है। जिस भाव के साथ हम अपनी भाषा को व्यक्त करते है, वही हमारी ताकत है। मुख्यमंत्री ने कहा कि भाषा रोजगार का बहुत बड़ा माध्यम है। उन्होंने कहा कि मेरा मानना है कि संस्कृत जानने वाला व्यक्ति कभी भूखा नहीं मर सकता है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में योग्य शिक्षक पात्रता परीक्षक में 70 फीसदी अभ्यर्थियों भी पास नही हो सके। आप एक भाषा सीख लो तो आपका रास्ता आसान हो जाएगा। भाषा में मजबूती वाले यूपी मूल के शिक्षक पूरे देश में हैं। उन्होंने कहा कि भाषा को बोझ न मान आर्थिक स्वावलंबन बनाएं। प्रदेश सरकार की इंटर्नशिप स्कीम भाषा के साथ भी लागू होगी। यह तो हर जनपद में यूथ हब बनाने की स्कीम है। सीएम ने कहा कि हिंदी देश के बड़े भूभाग को जोड़ने का काम करती है। गांधी ने हिंदी इस देश की राष्ट्र भाषा माना है और यह भाषा किसी की विरोधी नहीं है। वैश्विक मंच से खुद पीएम हिंदी में लोगों को संबोधित करते हैं। बता दें कि, इस महोत्सव में देश-विदेश के भारतीय भाषा के लगभग 200 साहित्यकार शामिल हैं। इस महोत्सव में भाषा साहित्य से जुड़ी विभिन्न समस्याओं पर विचार विमर्श हो रहा है।