अब बेघरों का जीवन लीलने की तरफ बढ़ गया है ठण्ड का कहर

लखनऊ: उत्तर भारत में सर्दी ने अपना सितम दिखाना शुरू कर दिया है। ठंड का कहर अब बेघरों का जीवन लीलने की तरफ बढ़ गया है। इसके तहत रविवार-सोमवार के चौबीस घंटों के दौरान दिल्ली के अलग-अलग क्षेत्रों में पांच और लोगों की मौत के मामले सामने आए हैं। पुलिस ने यह साफ नहीं किया कि इनकी मौत की वजह ठंड की ठिठुरन थी या फिर गंभीर बीमारी।दिल्ली सरकार के डीयूएसआईबी और सेंटर फॉर हॉलिस्टिक डेवलेपमेंट (सीएचडी) के अनुसार लावारिस जिन लोगों की मृत्यु हुई है उनकी उम्र क्रमश: इस प्रकार है।



आईएसबीटी में 50 वर्षीय व्यक्ति पीसीआर की मदद से अचेतावस्था में लोकनायक अस्पताल लाया गया जहां पर डाक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। इसके अलावा एम2के, दीपाली चौक पर 35 वर्षीय, पीजेएलएन मार्ग, दरियागंज में 55 वर्षीय, यमुनाब्रिज डीएनडी फ्लाई ओवर पर 40 वर्षीय, और लाजपत नगर-तीन स्थित हल्दीराम दुकान के बाहर फुटपाथ पर एक 50 साल का व्यक्ति मृत मिला। इन सभी को पीसीआर और डीसीडी की मदद से नजदीकी अस्पतालों मे ले जाया गया। जहां पर डाक्टरों ने प्राथमिक जांच के बाद मृत घोषित कर दिया। उनकी मौत की वजह ठंड से हुई या फिर अन्य किसी बीमारी से इस बारे में पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही पता चले पाएगा।




शवों की शिनाख्त नहीं हो सकी है। शवों को अस्पताल पहुंचाने वाली संस्था सीएचडी के निदेशक सुनील कुमार अलेडिया ने आशंका व्यक्त की है कि उनकी मौत ठिठुरन भरी ठंड से हुई है। विशेषज्ञों की नजर में : इंडियन हार्ट फाउंडेशन के अध्यक्ष डा. आरएन कालरा ने कहा कि ठंड से हृदय रोगियों में हार्ट अटैक की आशंका बढ़ जाती है। दिल्ली सरकार ने राजधानी में बेघरों के लिए 262 रैनबसेरों का प्रबंध किया है। जहां पर 21 हजार 524 लोगों को ठहरने की व्यवस्था की है। इसके तहत आरयूबी के 81 शेल्टर हाउसों में 9299 बेघर रात गुजारते हैं। जबकि 115 पोर्टा केबिनों में 6995, 64 टेंटों में 3230 और 2 सबवे में बने अस्थायी रैनबसेरों में दो हजार लोगों के ठहरने की व्यवस्था है।