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छात्रवृत्ति व फीस प्रतिपूर्ति के नाम पर कालेजों ने किया सैकड़ो करोड़ का खेल, एसआईटी कर रही मामले की जांच

By टीम पर्दाफाश 
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Colleges Do Sports Worth Hundreds Of Crores In The Name Of Scholarship And Fee Reimbursement Sit Is Investigating The Case

लखनऊ। प्रदेश में संचालिक हजारों इंजीनियरिंग व मैनेजमेंट कालेज में मौजूदा वक्त ठगी का एक नया रास्ता अख्तियार किया गया है। कालेज संचालक छात्रव्रत्ति व फीस प्रतिपूर्ति के नाम पर समाज कल्याण विभाग का करोड़ो रूपए की चपत लगा रहे है। इस मामले का खुलासा हुआ तो लोगों ने ऐतराज जताया, तब विभाग ने मामले की तह तक पहुंचने के लिए एक एसआईटी का गठन किया।

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बताया जा रहा है कि ये गोरखधंधा पश्चिमी उत्तर प्रदेश खासकर नोएडा व गाजियाबाद में संचालित करीब पांच सौ कालेजों में किया जा रहा था। एसआईटी इन जिलों में जांच करने पहुंची और करीब चार दिन वहां रूककर कालेज संचालकों से लाभार्थी छात्रों का टीम के सामने पेश करने को कहा। इस दौरान कालेज संचालकों ने बमुश्किल बीस प्रतिशत छात्रों को ही टीम के सामने पेश किया।

टीम ने उन मौजूद छात्रों से जब गहनता से पूछताछ की तो वो भी फर्जी निकले। विभाग ने एसआईटी द्वारा तैयार की गई रिपोर्ट जब शासन को सौंपी तो उसका अध्ययन करने के बाद शासन ने अजीब आदेश दे दिया। शासन ने कहा कि ऐसा प्रतीत नहीं होता है कि इस मामले की जांच के लिए किसी भी एसआईटी की जरूरत है। सूत्रों का कहना है कि सरकार ने ऐसा उन कालेज संचालकों के रसूख के चलते किया है।

सूत्रों का ये भी कहना है कि मामला बड़ा होने के चलते हाईकोर्ट में पीआईएल दाखिल हुई जिसमें इस पूरे फर्जीवाड़े को कोर्ट के सामने रखा गया। पूरे मामले को देखने के बाद कोर्ट ने इसमें एसआईटी से जांच करवाने का आदेश दिया। कोर्ट के आदेश पर गठित की गई टीम इस पूरे मामले की जांच कर रही है। बताया जा रहा है कि टीम में शामिल अधिकारी अब लाभांवित हुए छात्रों के घर जाकर पूरे मामले की जांच कर रही है।

सूत्रों के मुताबिक इस मामले की जांच कर रही टीम ने अभी जितने कालेजों की जांच की है उसमें से करीब 80 से 90 प्रतिशत लाभांवित छात्र फर्जी पाए गए है। अब सवाल ये उठता है जब शुरूआती पड़ताल में ही इतनी भारी मात्रा में छात्र फर्जी पाए गए हैं तो शासन ने क्यों एसआईटी जांच न करवाने का फरमान सुनाया था। इतना बड़ा घोटाला होने के बावजूद सरकार का ऐसा आदेश सीधे पर उक्त कालेज संचालकों के रसूख को दिखा रहा है।

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वहीं समाज कल्याण के अधिकारियों के मुताबिक अगर ये जांच सही तरीके से न करवाई गई तो कालेजों में पढ़ रहे लाखों की संख्या में पात्र छात्रों को इन योजनाओं का लाभ नहीं मिल सकेगा। वहीं नाम न लिखने की शर्त पर विभाग के ही एक अधिकारी ने बताया कि जब इस मामले की जांच शुरु हुई है तब इस गोरखधंधे में शामिल कालेज संचालकों की रातों की नींद उड़ी हुई है और वो पैसे और पहुंच के बल पर लगातार इस जांच को प्रभावित करने का प्रयास कर रहे हैं। आपकों बता दें कि पर्दाफाश की टीम इन फर्जी कालेजों के गोरखधंधे का जल्द ही खुलासा करेगी।

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