मुंबई में कुत्तों का रंग हो रहा नीला, वजह जान रह जाएंगे हैरान

कुछ दिनों से मुंबई में एक अलग तरह की घटना सामने आ रही है जो सोशल मीडिया पर भी काफी वायरल हो रही था. मुंबई में कुछ कुत्तों का रंग नीला हो रहा है और आपको बता दें की ऐसा मुख्य रूप से तलोजा औद्योगिक क्षेत्र के कुत्तों के साथ हो रहा है.

इस जानकारी के सामने आने के बाद नवी मुंबई पशु संरक्षण सेल ने बुधवार को ऐसे ही एक कुत्ते की तस्वीरें लीं और फिर गुरुवार को इस बात की शिकायत महाराष्ट्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड में की गई.

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दरअसल, कुत्तों के नीले पड़ने की वजह है कुत्तों का तलोजा इलाके में स्‍थित कसादी नदी के जहरीले पानी में जाना. कसादी नदी के आसपास करीब हजारों फॉर्मास्‍यूटिकल, फूड और इंजीनियरिंग फैक्‍ट्रियां हैं. इन फैक्‍ट्रियों से निकला जहरीला पानी और केमिकल्स सीधे नदी में मिलता है.

ऐसा जहरीला पानी ना सिर्फ जानवरों के लिए बल्कि पेड़ पौधों और पर्यावरण के लिए बेहद हानिकारक हो सकता है. आपको बता दें कि इस क्षेत्र में करीब 1000 दवा, खाद्य और इंजीनियरिंग कारखाने हैं. ऐसा माना जा रहा है की जब कोई जानवर इस पानी के संपर्क में आता है, तो उसके शरीर पर नीला रंग पड़ जाता है.

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सूत्रों की मानें तो इसी इलाके के कुछ कुत्‍ते इस नदी में आए थे जिसका प्रदूषित असर उनके शरीर पर पड़ा और वो नीले पड़ गए. और ये देखकर कुछ लोगों ने इन कुत्‍तों की फोटो खींचकर सोशल मीडिया पर वायरल कर दी.

जहां एक तरफ गंदगी और केमिकल्स के पानी में मिलने से कुत्तों का नीला पड़ना एक वजह बताई जा रही है वहीं दूसरी तरफ तलोजा मैनुफेक्चर्स एसोसिएशन के सेक्रेटरी जयश्री कातकर और प्रेजिडेंट संदीप डोंगरे का कहना है की ये सब सिर्फ अफवाएं हैं, इन सब का कोई ठोस सबूत भी नहीं है.

इनकी मानें तो सिर्फ कुछ ही कुत्ते ऐसे नीले रंग में मिले जिन्हे साफ किये जाने पर वे ठीक हो गए. वहीं, दूसरी तरफ नवी मुंबई एनिमल प्रोटेक्शन सेल की आरती चौहान ने कहा कि यह बेहद चौंकाने वाली घटना है. हमने ऐसे कई कुत्तों को देखा है जिनके फर का रंग बदल गया है. हमने ऐसे उद्योगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने की मांग की है.

महाराष्‍ट्र प्रदूषण बोर्ड के मुताबिक, कसादी नदी के पानी में टॉक्‍सिक की काफी मात्रा पाई गई है. इसमें मौजूद क्‍लोराइड पेड़-पौधों व जीव-जंतुओं के लिए काफी नुकसानदायक है. ऐसा कहा जा रहा है की शायद ये एक वजह हो सकती है की कुत्तों का रंग नीला पड़ गया था लेकिन तलोजा मनुफेक्चर्स एसोसिएशन इस बात को मानने को राज़ी ही नहीं है.

इतना ही नहीं इस क्षेत्र में प्रदूषण का स्तर 13 गुना अधिक पाया गया है. यानी सिर्फ जानवर और पेड़ पौधे ही नहीं बल्कि लोगों को भी इस पानी के इस्तेमाल से खतरा हो सकता है.