कांग्रेस ने धर्म के आधार पर बंटवारा किया, मजबूरी में लाए नागरिकता संशोधन बिल : शाह

Amit shah
नागरिकता संशोधन विधेयक राज्यसभा में पेश, 119 पहुंचा बहुमत का आंकड़ा

नई दिल्ली। केन्द्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने आज सोमवार को लोकसभा में नागरिकता संशोधन बिल पेश कर दिया। उनके बिल पेश करते ही सदन में हंगामा मच गया। लोकसभा में नागरिकता संशोधन विधेयक पेश हो गया है। विधेयक को पेश किए जाने के लिए विपक्ष की मांग पर मतदान करवाया गया और सदन ने 82 के मुकाबले 293 मतों से इस विधेयक को पेश करने की स्वीकृति दे दी। लोकसभा में कांग्रेस के नेता अधीर रंजन चौधरी ने कहा कि इस बिल के जरिए अल्पसंख्यकों को निशाना बनाया जा रहा है। इस पर अमित शाह ने जवाब दिया कि ये बिल देश के अल्पसंख्यकों के .001 फीसदी खिलाफ भी नहीं है।

Congress Divided On The Basis Of Religion Forced Citizenship Amendment Bill Shah :

गृहमंत्री शाह ने कहा कि मैं इस बिल पर हर सवाल का जवाब देने को तैयार हूं। इस बिल में कहीं भी मुसलमान नहीं लिखा हुआ है। मेरे बयान के बाद विपक्ष को भी बोलने का मौका मिलेगा। सभी मुद्दों पर चर्चा होनी चाहिए। तथ्यों को तोड़ मरोड़कर सदन को गुमराह न करें।

इसके बाद शुरू हुई चर्चा के दौरान शाह ने कहा कि मैं पूरे देश को आश्वस्त करना चाहता हूं कि ये बिल संविधान के किसी भी अनुच्छेद का उल्लंघन नहीं करता है। सभी ने अनुच्छेद 14 का उल्लेख किया। ये अनुच्छेद कानून बनाने से रोक नहीं सकता। पहली बार नागरिकता पर फैसला नहीं हो रहा है। 1971 में इंदिरा गांधी ने कहा था कि बांग्लादेश से आए लोगों को नागरिकता दी जाएगी। कांग्रेस शासन में युगांडा से आए लोगों को नागरिकता दी गई।

सदन में हंगामा होने पर अमित शाह ने कहा कि सरकार को पांच साल के लिए चुना है, हमें सुनना पड़ेगा। उन्होंने कहा, भारत से सटे तीन देशों अफगानिस्तान, बांग्लादेश और पाकिस्तान का प्रमुख धर्म इस्लाम है। अफगानिस्तान का संविधान कहता है कि यहां का धर्म इस्लाम है, संविधान के मुताबिक पाकिस्तान का धर्म भी इस्लाम है।

पाकिस्तान और बांग्लादेश में मुसलमान पर अत्याचार कभी नहीं होगा। तीनों देशों में सिर्फ अल्पसंख्यकों की धार्मिक प्रताड़ना होती है। कांग्रेस ने धर्म के आधार पर विभाजन किया। विभाजन नहीं हुआ होता तो इस बिल की जरूरत नहीं पड़ती। कांग्रेस ने हमें मजबूर किया।

अगर कोई मुसलमान हमारे कानून के आधार पर अपील करता है तो उसे सुना जाएगा। चूंकि उनके साथ धार्मिक प्रताड़ना नहीं हुई है, इसी आधार पर ये बिल लाया गया है और छह धर्मों हिंदू, सिख, ईसाई, बौद्ध, जैन और पारसी नागरिकों को नागरिकता का प्रावधान किया गया है।

नई दिल्ली। केन्द्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने आज सोमवार को लोकसभा में नागरिकता संशोधन बिल पेश कर दिया। उनके बिल पेश करते ही सदन में हंगामा मच गया। लोकसभा में नागरिकता संशोधन विधेयक पेश हो गया है। विधेयक को पेश किए जाने के लिए विपक्ष की मांग पर मतदान करवाया गया और सदन ने 82 के मुकाबले 293 मतों से इस विधेयक को पेश करने की स्वीकृति दे दी। लोकसभा में कांग्रेस के नेता अधीर रंजन चौधरी ने कहा कि इस बिल के जरिए अल्पसंख्यकों को निशाना बनाया जा रहा है। इस पर अमित शाह ने जवाब दिया कि ये बिल देश के अल्पसंख्यकों के .001 फीसदी खिलाफ भी नहीं है। गृहमंत्री शाह ने कहा कि मैं इस बिल पर हर सवाल का जवाब देने को तैयार हूं। इस बिल में कहीं भी मुसलमान नहीं लिखा हुआ है। मेरे बयान के बाद विपक्ष को भी बोलने का मौका मिलेगा। सभी मुद्दों पर चर्चा होनी चाहिए। तथ्यों को तोड़ मरोड़कर सदन को गुमराह न करें। इसके बाद शुरू हुई चर्चा के दौरान शाह ने कहा कि मैं पूरे देश को आश्वस्त करना चाहता हूं कि ये बिल संविधान के किसी भी अनुच्छेद का उल्लंघन नहीं करता है। सभी ने अनुच्छेद 14 का उल्लेख किया। ये अनुच्छेद कानून बनाने से रोक नहीं सकता। पहली बार नागरिकता पर फैसला नहीं हो रहा है। 1971 में इंदिरा गांधी ने कहा था कि बांग्लादेश से आए लोगों को नागरिकता दी जाएगी। कांग्रेस शासन में युगांडा से आए लोगों को नागरिकता दी गई। सदन में हंगामा होने पर अमित शाह ने कहा कि सरकार को पांच साल के लिए चुना है, हमें सुनना पड़ेगा। उन्होंने कहा, भारत से सटे तीन देशों अफगानिस्तान, बांग्लादेश और पाकिस्तान का प्रमुख धर्म इस्लाम है। अफगानिस्तान का संविधान कहता है कि यहां का धर्म इस्लाम है, संविधान के मुताबिक पाकिस्तान का धर्म भी इस्लाम है। पाकिस्तान और बांग्लादेश में मुसलमान पर अत्याचार कभी नहीं होगा। तीनों देशों में सिर्फ अल्पसंख्यकों की धार्मिक प्रताड़ना होती है। कांग्रेस ने धर्म के आधार पर विभाजन किया। विभाजन नहीं हुआ होता तो इस बिल की जरूरत नहीं पड़ती। कांग्रेस ने हमें मजबूर किया। अगर कोई मुसलमान हमारे कानून के आधार पर अपील करता है तो उसे सुना जाएगा। चूंकि उनके साथ धार्मिक प्रताड़ना नहीं हुई है, इसी आधार पर ये बिल लाया गया है और छह धर्मों हिंदू, सिख, ईसाई, बौद्ध, जैन और पारसी नागरिकों को नागरिकता का प्रावधान किया गया है।