सर्जिकल स्ट्राइक पर शक जताने वाले संजय निरूपम पर गिर सकती है गाज

नई दिल्ली: कांग्रेस ने सर्जिकल स्ट्राइक पर शक जताने वाले मुंबई कांग्रेस के अध्यक्ष संजय निरूपम से असहमति जताते हुए उनके खिलाफ कार्रवाई के संकेत दिए हैं। हालांकि इस विषय में सरकार से सवाल करने वाले वरिष्ठ नेता पी. चिदंबरम और दिग्विजय सिंह के विषय में पार्टी खामोश है।कांग्रेस के मीडिया प्रभारी रणदीप सुरजेवाला ने कहा, कांग्रेस अध्यक्षा सोनिया गांधी व कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने लगातार और बगैर किसी सवाल के भारतीय सेना द्वारा पाकिस्तान में छिपे आतंकियों पर कार्रवाई की प्रशंसा की है। उन्होंने कहा, दोनों ने सरकार का पूरा समर्थन भी किया कि पाकिस्तान में छिपे टैरर इन्फ्रास्ट्रक्चर को खत्म करने के लिए जो भी कदम सरकार उठाएगी कांग्रेस उसके साथ है। सुरजेवाला ने कहा, उस कटिबद्धता को जो कांग्रेस, सोनिया गांधी और राहुल गांधी ने हमारी सेना और सरकार के साथ बताई है उसे एक बार फिर दोहराता हूं।




उन्होंने कहा, कांग्रेस को सेना में पूर्ण विास है, यह न पहला सर्जिकल स्ट्राइक था और न आखिरी होगा।सुरजेवाला ने तीन तारीखों 1 सितम्बर 2011, 28 जुलाई 2013 और 14 जनवरी 2014 का जिक्र किया जब भारतीय सेना ने दुश्मन को करारा जवाब दिया था। उन्होंने कहा, हमें विास है कि इसी प्रकार का करारा जवाब भारतीय सेना लगातार दुश्मनों और आतंकियों को भविष्य में भी देती रहेगी। सुरजेवाला ने कहा, पूर्व की कांग्रेस सरकार ने परिपक्वता दिखाते हुए राष्ट्रीय सुरक्षा के हित में कभी भी उन सर्जिकल स्ट्राइक को पब्लिसाइज करना उचित नहीं समझा। उन्होंने कहा, हमारी सेना को कांग्रेस सरकार का संपूर्ण समर्थन हमेशा रहा।कांग्रेस नेता ने कहा, डॉयरेक्टर जनरल ऑफ मिलिट्री ऑपरेशन द्वारा दिए गए बयान पर न प्रश्न उठाने का सवाल पैदा होता है और न ही उसकी सच्चाई पर कोई प्रश्न खड़ा करने का सवाल पैदा होता है।




उन्होंने कहा, हमें हमारी सेना पर और ऑपरेशन के बाद दिए बयान पर संपूर्ण विास है। कांग्रेस नेता ने कहा, समय आ गया है कि भारत सरकार को पाकिस्तान के मिया, झूठे और बेबुनियाद प्रोपगेंडा को बेनकाब कर देना चाहिए। हालांकि यह भी सच है कि पाकिस्तान से आने वाला आतंकवाद दिन-प्रतिदिन आज भी चल रहा है। जैसा हमने बारामुला में देखा और लगातार पाकिस्तान द्वारा बॉर्डर सीजफायर वॉयलेशन हो रहा है। ऐसे में हम प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से पूछना चाहेंगे कि उनके रक्षामंत्री मनोहर पार्रिकर और उनके अन्य मंत्रिमंडल के साथियों द्वारा जो अपरिपक्व और राजनीति से प्रेरित बयान दिए जा रहे हैं, क्या उनका वह समर्थन करते हैं? हम मोदी सरकार से यह भी आग्रह करेंगे कि सेना की बहादुरी और कुर्बानी का राजनीतिकरण न करें, और उनका राजनितिक तौर से इस्तेमाल न करें।