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मिलीभगत: आवासीय भूखंड में बना दिया दु​कानें और फ्लैट, आवास-विकास भी मौन

Construction Of Shops And Flats At Residential Plot Awas Vikas Is Also Silent

By टीम पर्दाफाश 
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लखनऊ। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में आवास—विकास के अधिकारियों और बिल्डरों के सम्बंध इतने मधुर हैं कि बिल्डर चाहे जो मनमानी करें, विभाग पूरी तरीके से मौन रहता हैं। इसकी नजीर इन्दिरानगर इलाके में देखने को मिली, जहां एक शख्स ने अपने आवासीय प्लाट पर दर्जनों दुकाने और फ्लैट बना दिए। यहीं नहीं उसने करोड़ो रूपए में बेंच भी दिया। बता दें जब लोगों ने जब इसकी शिकायत विभाग में की, तो काफी दबाव के बाद इसके ध्वस्तीकरण का आदेश भी हो गया, लेकिन इस आदेश को हुए करीब सात साल बीत गए, फिर भी बिल्डर के रसूख के चलते यहां आज तक कोई कार्रवाई नहीं हुई।

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आवास विकास के इन्दिरानगर योजना के खसरा संख्या 359 में स्थित 1424.97 वर्गमीटर के प्लाट वास्तुकला अनुभाग ने दो भागों में विभाजित कर आवा​सीय मानचित्र स्वीकृत किया था, लेकिन बिल्डर ने इन दोनों भागों में ओम प्लाजा और ओम अपार्टमेंट के नाम से व्यवसायिक निर्माण कराया। बताया जा रहा है कि ओम प्लाजा के बेसमेंट और भूतल पर उसने दर्जनों दुकानों बनवाई और फिर इसके द्वितीय व तीसरे तल पर फ्लैट का निर्माण करवा दिया। जिन्हे बाद में उसने करोड़ो लेकर सैकड़ो लोगों के हाथों बेंच दिया।

वहीं, हौसलाबुलंद बिल्डर ने करीब दो वर्ष पहले ओम अपार्टमेंट का ​भी निर्माण कार्य पूरा करवा दिया। यहां नियमविरूद्ध निर्माण होता रहा और विभाग का कोई भी अधिकारी वहां झांकने तक नहीं गया। इससे विभाग और बिल्डर की मिलीभगत का अनुमान सहज ही लगाया जा सकता है। अब सवाल ये उठता है कि जब पूर्व के निर्माण का ही ध्वस्तीकरण आदेश पारित है तो इस भूखंड पर आगे का निर्माण कार्य कैसे हो गया।

ओम प्लाजा में दुकान लेने वाले दुकानदारों का कहना है कि बिल्डर द्वारा बनवाए गए ओम अपार्टमेंट का रास्ता भी ओम प्लाजा के बीच से दिया गया है, जिसका दुकानदारों ने विरोध भी किया। इसकी शिकायत पीड़ितों ने विभाग में की तो विभाग के अधिकारियों ने बीती 3 मई को मौके का निरीक्षण कर बिल्डर को उक्त दरवाजा बंद करने के आदेश दिए, जिसका उसने पालन भी नहीं किया। दुकानदारों का कहना है कि जब उक्त भवन के ध्वस्तीकरण का आदेश है तो फिर अधिकारियों ने सिर्फ दरवाजा बंद करने का ही आदेश क्यों दिया।

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