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कोरोना ने बदला लखनऊ बैकुंठधाम का नजारा: अब यहां चिताएं ज्यादा जलती हैं और अंत्येष्टि में शामिल होने वाले कम

कोरोना महामारी ने लखनऊ बैकुंठधाम का नजारा इन दिनों बदल दिया है। एक समय था जब अंतिम संस्कार में परिजन, रिश्तेदारों के साथ ही मित्र या पड़ोसी, सब शामिल होते थे, लेकिन अब कोरोना महामारी की दूसरी ने सब कुछ बदल कर रख दिया है।

By संतोष सिंह 
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Corona Changed The View Of Lucknow Baikunthadham Now The Pyre Is Burning More Here

लखनऊ। कोरोना महामारी ने लखनऊ बैकुंठधाम का नजारा इन दिनों बदल दिया है। एक समय था जब अंतिम संस्कार में परिजन, रिश्तेदारों के साथ ही मित्र या पड़ोसी, सब शामिल होते थे, लेकिन अब कोरोना महामारी की दूसरी ने सब कुछ बदल कर रख दिया है। यहां की तस्वीरें बयां कर रही है बैकुंठधाम की ​सरकार के दावे की हकीकत बयां कर रही हैं। सरकार के तरफ से जारी कोरोना से मृतकों के जारी आंकड़े तो कुछ और होते हैं, लेकिन राजधानी के विभिन्न स्थलों पर हो रहे अंतिम संस्कार कुछ और कहानी बयां कर रहे हैं। जबकि मुस्लिमों के कब्रिस्तान के दफनाने वालों की तस्वीरें नहीं मिल पा रही हैं।

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बैकुंठधाम में चिताएं ज्यादा हैं तो अंतिम संस्कार में शामिल होने वाले कम हैं। कोरोना प्रोटोकॉल और खुद के बचाव के लिए लोग अब अंत्येष्टि में कम ही शामिल हो रहे हैं। हालांकि, कई दिन बाद शुक्रवार को अंतिम संस्कार के लिए लाए गए शवों का आंकड़ा दो सौ से नीचे 180 रहा। कई दिनों से बैकुंठधाम और गुलाला घाट पर अंतिम संस्कार के लिए आने वाले शवों का आंकड़ा 200 के पार जा रहा था। बृहस्पतिवार को यह आंकड़ा 220 रहा था। उससे पहले बुधवार को भी आंकड़ा 200 के पार ही रहा था। शुक्रवार को जो शव अंतिम संस्कार के लिए रात आठ बजे तक पहुंचे, उनमें करीब 100 शव संक्रमित माने जा रहे हैं।

संक्रमित शव आधी रात तक आते रहते हैं और उनका अंतिम संस्कार भी रात में ही कर दिया जाता है। सूत्र बताते हैं कि रात दस और 12 बजे के बीच हर दिन पांच से दस शव अस्पतालों से अंतिम संस्कार के लिए पहुंचते हैं। हालांकि इसको लेकर प्रशासन की ओर से चुप्पी ही रहती है कि कितने शवों को अंतिम संस्कार हुआ।

अंतिम संस्कार के लिए पंडित और लकड़ी का शुल्क तय

बैकुंठधाम पर अंतिम संस्कार कराने वाले पंडों का रेट नगर निगम ने तय कर दिया है। इसे लेकर बोर्ड भी लगा दिया गया है, जिसमें तय रेट से अधिक लेने पर शिकायत के लिए दो अधिकारियों का नंबर भी दिया गया है। नगर आयुक्त अजय द्विवेदी ने बताया कि अंतिम संस्कार कराने वाले पंडित या लकड़ी के ठेकेदार अधिक पैसा न लें, इसे लेकर वहां पर बोर्ड लगा दिया है।

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लकड़ी प्रति कुंतल रेट 550 रुपये और अंतिम संस्कार के लिए पंडित का शुल्क 600 रुपये है, जिसमें गोदान व फूल चुननेे की क्रिया का भी शुल्क शामिल है। यदि इससे अधिक पंडित शुल्क मांगते हैं या अधिक रेट पर लकड़ी देते हैं तो व्यक्ति अपर नगर आयुक्त अमित कुमार को मोबाइल नंबर 6389300003 पर या सहायक अभियंता किशोरी लाल को मोबाइल नंबर 6389300084 पर शिकायत कर सकता है। शिकायत का निस्तारण कराया जाएगा।

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